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त्रिशूल की नई बाउंड्रीवॉल बनेगी, काम शुरू
बरेली
Updated Sun, 31 Jan 2016 01:29 AM IST
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बरेली। एयरफोर्स स्टेशन प्रशासन त्रिशूल एयरबेस की जर्जर बाउंड्रीवॉल बनवाएगा। इसके लिए शनिवार से काम शुरू करा दिया गया। स्टेशन के अफसरों ने ठेकेदार के साथ बाउंड्रीवॉल का सर्वे कराया। आईवीआरआई रोड पर परतापुर चौधरी गांव से लेकर कंजादासपुर होते हुए गेट नंबर एक समेत दर्जनभर गांवों के बाहरी इलाके में बनी त्रिशूल एयरबेस की बाउंड्रीवॉल जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। बाउंड्रीवॉल में कई जगह बड़े छेद हैं। इनसे कोई भी अंदर घुस सकता है और उनमें झांककर अंदर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। इतना ही नहीं, लोहे के कंटीले तार और उनको लगाने के लिए दीवार में बनाए गए खंभे भी गायब हो गए हैं।
पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद हाईअलर्ट घोषित करने के बावजूद भी त्रिशूल एयरफोर्स प्रशासन को अपनी दीवार में यह छेद नजर नहीं आ रहे थे। अमर उजाला ने शनिवार को ‘त्रिशूल की बाउंड्रीवॉल में हैं कई छेद’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित करके वास्तविकता सामने रखी तो एयरफोर्स स्टेशन प्रशासन में खलबली मची। इसके बाद सुबह ही एयरफोर्स अफसरों ने ठेकेदारों के साथ जर्जर बाउंड्रीवॉल का सर्वे कराया। इसके बाद बाउंड्रीवॉल के नए सिरे से निर्माण का काम शुरू करा दिया गया। एयरफोर्स स्टेशन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गुप कैप्टन मुथुवल ने बताया कि बाउंड्रीवॉल क े नए सिरे से निर्माण कराया जा रहा है। जल्द ही इसका निर्माण पूरा करा लेंगे। बता दें कि इस जर्जर बाउंड्रीवॉल का निर्माण 1963 में त्रिशूल एयरबेस की स्थापना के साथ कराया गया था, तब से इसकी मरम्मत नहीं कराई गई। पठानकोट हमले के बाद त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को लेकर भी खतरा खड़ा हो गया है, इसके बावजूद भी इस ओर अफसर नहीं जागे हैं।
त्रिशूल से सटे इलाकोें में जमीन की रजिस्ट्री पर रोक
-डीएम का सब रजिस्ट्रार को आदेश
-सौ मीटर के दायरे से बाहर होने पर ही मिलेगी अनुमति
बरेली। त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा के दृष्टिगत डीएम ने बड़ा आदेश जारी कर दिया है। त्रिशूल की सौ मीटर परिधि में आने वाले इलाकों और गांवों में जमीनों और मकानों के क्रय-विक्रय की रजिस्ट्री पर डीएम ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उन्होंने सब रजिस्ट्रार को आदेश दिए हैं कि उनकी अनुमति के बिना यहां की जमीनों की कोई रजिस्ट्री न की जाए। अब अगर कोई रजिस्ट्री कराने आएगा तो उस जमीन की पहले डीएम कमेटी से जांच कराएंगे। उसमें यह साबित हो जाएगा कि यह जमीन त्रिशूल की सौ मीटर परिधि से से बाहर है, तभी उसकी रजिस्ट्री की अनुमति दी जाएगी अन्यथा नहीं। इतना ही नहीं, त्रिशूल के इलाके में अब कोई भी रजिस्ट्री कंडीशनल होगी। कंडीशन यह रहेगी कि भविष्य में अगर वह जमीन त्रिशूल के सुरक्षा दायरे में आती है तो रजिस्ट्री निरस्त मानी जाएगी।
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त्रिशूल एयरबेस के सौ मीटर की परिधि में बेतहाशा अवैध निर्माण होने का मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। इसको संज्ञान में लेकर डीएम गौरव दयाल ने जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगाई है। सुरक्षा इंतजाम के दृष्टिगत सौ मीटर की परिधि में किसी भी तरह के निर्माण पर पूरी तरह से रोक है। इसके बावजूद कंजादासपुर, परतासपुर, गायत्रीनगर, आलोकनगर समेत त्रिशूल से सटे कई गांवों और दर्जनों कालोनियों में निर्माण कार्य लगातार हो रहे थे। मुद्दा उठने के बाद इन इलाकों में जमीनों और मकानों की रजिस्ट्री कराने की होड़ लग गई थी। भविष्य की आशंका से लोग आननफानन में रजिस्ट्री कराने लगे थे लेकिन डीएम की रोक के बाद अब रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी।
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पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद हाईअलर्ट घोषित करने के बावजूद भी त्रिशूल एयरफोर्स प्रशासन को अपनी दीवार में यह छेद नजर नहीं आ रहे थे। अमर उजाला ने शनिवार को ‘त्रिशूल की बाउंड्रीवॉल में हैं कई छेद’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित करके वास्तविकता सामने रखी तो एयरफोर्स स्टेशन प्रशासन में खलबली मची। इसके बाद सुबह ही एयरफोर्स अफसरों ने ठेकेदारों के साथ जर्जर बाउंड्रीवॉल का सर्वे कराया। इसके बाद बाउंड्रीवॉल के नए सिरे से निर्माण का काम शुरू करा दिया गया। एयरफोर्स स्टेशन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गुप कैप्टन मुथुवल ने बताया कि बाउंड्रीवॉल क े नए सिरे से निर्माण कराया जा रहा है। जल्द ही इसका निर्माण पूरा करा लेंगे। बता दें कि इस जर्जर बाउंड्रीवॉल का निर्माण 1963 में त्रिशूल एयरबेस की स्थापना के साथ कराया गया था, तब से इसकी मरम्मत नहीं कराई गई। पठानकोट हमले के बाद त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को लेकर भी खतरा खड़ा हो गया है, इसके बावजूद भी इस ओर अफसर नहीं जागे हैं।
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त्रिशूल से सटे इलाकोें में जमीन की रजिस्ट्री पर रोक
-डीएम का सब रजिस्ट्रार को आदेश
-सौ मीटर के दायरे से बाहर होने पर ही मिलेगी अनुमति
बरेली। त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा के दृष्टिगत डीएम ने बड़ा आदेश जारी कर दिया है। त्रिशूल की सौ मीटर परिधि में आने वाले इलाकों और गांवों में जमीनों और मकानों के क्रय-विक्रय की रजिस्ट्री पर डीएम ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उन्होंने सब रजिस्ट्रार को आदेश दिए हैं कि उनकी अनुमति के बिना यहां की जमीनों की कोई रजिस्ट्री न की जाए। अब अगर कोई रजिस्ट्री कराने आएगा तो उस जमीन की पहले डीएम कमेटी से जांच कराएंगे। उसमें यह साबित हो जाएगा कि यह जमीन त्रिशूल की सौ मीटर परिधि से से बाहर है, तभी उसकी रजिस्ट्री की अनुमति दी जाएगी अन्यथा नहीं। इतना ही नहीं, त्रिशूल के इलाके में अब कोई भी रजिस्ट्री कंडीशनल होगी। कंडीशन यह रहेगी कि भविष्य में अगर वह जमीन त्रिशूल के सुरक्षा दायरे में आती है तो रजिस्ट्री निरस्त मानी जाएगी।
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त्रिशूल एयरबेस के सौ मीटर की परिधि में बेतहाशा अवैध निर्माण होने का मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। इसको संज्ञान में लेकर डीएम गौरव दयाल ने जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगाई है। सुरक्षा इंतजाम के दृष्टिगत सौ मीटर की परिधि में किसी भी तरह के निर्माण पर पूरी तरह से रोक है। इसके बावजूद कंजादासपुर, परतासपुर, गायत्रीनगर, आलोकनगर समेत त्रिशूल से सटे कई गांवों और दर्जनों कालोनियों में निर्माण कार्य लगातार हो रहे थे। मुद्दा उठने के बाद इन इलाकों में जमीनों और मकानों की रजिस्ट्री कराने की होड़ लग गई थी। भविष्य की आशंका से लोग आननफानन में रजिस्ट्री कराने लगे थे लेकिन डीएम की रोक के बाद अब रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी।