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Bareilly News: मनमानी की बुनियाद पर खड़ी अट्टालिकाओं में खतरे का अट्टहास

Fri, 26 Jun 2026 01:41 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Fri, 26 Jun 2026 01:41 AM IST
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The mocking laughter of danger amidst edifices built on the foundation of arbitrariness.
बरेली। शहर की बहुमंजिला इमारतें मनमानी की बुनियाद पर टिकी हैं। महानगर में 45 से ज्यादा बड़े अपार्टमेंट हैं। इनमें से करीब 60 फीसदी, यानी 27 इमारतों में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम अधूरे हैं। डीडीपुरम व राजेंद्रनगर में बीडीए से नक्शा पास कराए बिना ही संचालित दो इमारतों को सील किया गया है। इनके पास फायर एनओसी भी नहीं मिली थी। इनमें रहने या काम करने वालों की जान कभी भी जोखिम में पड़ सकती है, लेकिन जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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सिविल लाइंस में कमल टॉकीज वाली गली से लेकर पुराने बस अड्डे तक के इलाके में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। इन संकरी गलियों में बनी बहुमंजिला इमारतों में सेटबैक (इमारत के चारों तरफ छोड़ी जाने वाली खाली जगह) पर भी अवैध निर्माण कर लिया गया है। संकरी सीढ़ियां और अव्यवस्थित बेसमेंट आपात स्थिति में खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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नियमों के मुताबिक, इमारत की लंबाई-चौड़ाई के आधार पर ओवरहेड टैंक, हर मंजिल पर नॉब वाले पाइप, ग्राउंड फ्लोर पर फायर हाइड्रेंट और बड़ी इमारतों में एक लाख लीटर क्षमता का अंडरग्राउंड टैंक होना अनिवार्य है। नक्शों में तो ये सब बड़े करीने से दिखाए जाते हैं, लेकिन हकीकत में बिल्डरों ने वाटर टैंक और छत की जगह को भी पार्किंग या गोदाम के रूप में बेच दिया है।
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बेसमेंट में मकड़ी के जाल के बीच टंगे हैं फायर सेफ्टी उपकरण
इन भवनों में लगे फायर सेफ्टी उपकरण महज दिखावा हैं। बेसमेंट और दीवारों पर टंगे लाल रंग के सिलिंडरों और पाइपों पर मकड़ियों ने जाले बना लिए हैं। न तो इनकी समय पर रिफिलिंग कराई जाती है, न ही कोई मरम्मत होती है। कभी कोई बड़ा अग्निकांड हो जाए तो वहां मौजूद कर्मचारियों या निवासियों को इन उपकरणों को चलाने का कोई प्रशिक्षण ही नहीं है। करोड़ों की लागत से बनीं ये इमारतें किसी बड़े हादसे के इंतजार में खड़ी नजर आती हैं। बीडीए और अन्य संबंधित विभागों की निष्क्रियता से भी बिल्डरों की मनमानी जारी है।
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पांच साल में सेफ्टी ऑडिट जरूरी, पर दस माह में नहीं आया एक भी आवेदनसंवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। शहर में ऊंची इमारतें खड़ी की होड़ मची है। सुकून और सुरक्षा के नाम पर लोग लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर गेटबंद सोसाइटियों और बहुमंजिला अपार्टमेंट में आशियाना तलाश रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे अनजाने खतरे को मोल ले रहे हैं। बिल्डरों और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि प्राधिकरण की मंजूरी और फायर एनओसी के बिना ही इमारतें खड़ी की जा रही हैं। बीडीए के टाउन प्लानर कार्यालय में दस माह से स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट के लिए एक भी आवेदन न आना इसका प्रमाण है।
शहर में बहुमंजिली इमारतों के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट का नियम लागू है। इसके तहत निर्माण के 10 वर्ष पूरे होने के बाद हर पांच साल में ऑडिट कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद, बिल्डरों ने अपार्टमेंट बनाकर भारी-भरकम मुनाफा कमाया और पूरी व्यवस्था को खरीदारों के भरोसे छोड़ दिया है। आम जनता को न तो इन नियमों की जानकारी है, न ही प्रशासन उन्हें जागरूक करने में रुचि दिखा रहा है।

वर्जन
नक्शा पास कराए बिना बनाए गए बहुमंजिला भवनों के विरुद्ध अभियान जारी है। कई भवनों नोटिस जारी किए गए हैं। कुछ को सील भी किया गया है। कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। - दीपक कुमार, संयुक्त सचिव, बीडीए
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