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मां-बाप की अज्ञानता से चली गई नवजात की जान
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Tue, 23 Aug 2016 12:59 AM IST
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कांधरपुर के विजेंद्र और उनकी पत्नी मंजू की लापरवाही से नवजात की जान चली गई। कांधरपुर स्वास्थ्य केंद्र पर जन्म लेने के बाद डॉक्टरों ने कुपोषण की बात कहकर उसे जिला अस्पताल रेफर किया था मगर दोनों उसे घर ले आए। तीन घंटे बाद उसकी मौत हो गई।
प्रसव पीड़ा होने पर मंजू रविवार को कांधरपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। रात तीन बजे नार्मल डिलीवरी से बच्ची पैदा हुई। आशा नीलम ने बताया कि बच्ची सातवें महीने में पैदा हुई थी। कुपोषित होने के कारण उसकी हालत गंभीर थी। बच्ची को अस्पताल से जिला अस्पताल भेजा गया था, लेकिन विजेंद्र और घर वाले उसे लेकर घर चले गए। नीलम के अनुसार मंजू को अब तक सात बच्चे पैदा हो चुके हैं, जिनमें से सिर्फ तीन साल बच्चा ही बचा है। दो जुड़वा नवजात पिछले साल दम तोड़ चुके हैं। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. उदित ने कहा कि बच्चा कमजोर था उसे सांस में दिक्कत आ रही थी लेकिन घर वालों ने जिला अस्पताल ले जाने की सलाह नहीं मानी। उधर, विजेंद्र ने इसे भगवान की मर्जी बताकर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
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प्रसव पीड़ा होने पर मंजू रविवार को कांधरपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। रात तीन बजे नार्मल डिलीवरी से बच्ची पैदा हुई। आशा नीलम ने बताया कि बच्ची सातवें महीने में पैदा हुई थी। कुपोषित होने के कारण उसकी हालत गंभीर थी। बच्ची को अस्पताल से जिला अस्पताल भेजा गया था, लेकिन विजेंद्र और घर वाले उसे लेकर घर चले गए। नीलम के अनुसार मंजू को अब तक सात बच्चे पैदा हो चुके हैं, जिनमें से सिर्फ तीन साल बच्चा ही बचा है। दो जुड़वा नवजात पिछले साल दम तोड़ चुके हैं। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. उदित ने कहा कि बच्चा कमजोर था उसे सांस में दिक्कत आ रही थी लेकिन घर वालों ने जिला अस्पताल ले जाने की सलाह नहीं मानी। उधर, विजेंद्र ने इसे भगवान की मर्जी बताकर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
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