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बरेली-बीसलपुर रोड की मरम्मत में भी कर दिया खेल, दो महीने में ही उधड़ गया
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बदहाल बरेली-बीसलपुर रोड।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। बरेली-बीसलपुर रोड पर नौ लोगों की मौतों के बाद ढाई करोड़ से सड़क की मरम्मत के नाम पर किए गए घपले का नतीजा है कि यह खूनी सड़क दो महीने में ही फिर से जगह-जगह उधड़ और टूट गई है। भयंकर गड्ढे होने के साथ ही खूनी मोड़ पर भी सड़क टूटने और कोलतार उधड़ने से बजरी फैल गई है। इससे हादसे का खतरा और बढ़ गया है।
पीडब्ल्यूडी ने पिछले साल इस रोड को ठीक कराने के लिए करीब ढाई करोड़ का बजट खर्च किया था, लेकिन कई जगहों पर खूनी मोड़ पर रोड सुरक्षा के काम न कराए जाने और गड्ढे हो जाने से यहां दुर्घटनाएं नहीं रुक पा रही हैं। 30 अक्तूबर, 2019 को इस हाईवे पर हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने कुछ जगहों पर फिर से पैच वर्क कराया लेकिन महज औपचारिकता निभाने के लिए कराए गए इस काम का कोई नतीजा नहीं निकला। सड़क फिर से खराब हो गई है। भुता पेट्रोल पंप के सामने, मिलक गौंटिया, दौलतपुर डांडिया, कैलास पुल मोड़ पर कोलतार गायब हो चुका है। बजरी उधड़कर सड़क पर फैल गई है। इससे बाइक-स्कूटी वालों के फिसलने का खतरा पैदा हो गया है। भुता से रसूलपुर तक करीब नौ किलोमीटर तक नवंबर में सड़क की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन ये हिस्सा दो महीने में ही फिर से खराब हो गया है। गौरतलब है कि इस रोड को बनाने में पहले भी घपले उजागर होते रहे हैं। वर्ष 2018 में इस मामले में पीडब्ल्यूडी के छह इंजीनियरों के खिलाफ शासन ने कार्रवाई भी की थी।
कमिश्नर तक पहुंचा रोड निर्माण में घपले का मामला
बीसलपुर रोड निर्माण और मरम्मत के नाम पर हुए घपले का मामला कमिश्नर तक पहुंच गया है। पूर्व में इस रोड को दुरुस्त और एक्सीडेंट जोन खत्म करने के लिए संघर्ष कर रहे क्रांतिकारी विचार मंच ने बीसलपुर रोड का पूरा हाल कमिश्नर रणवीर प्रसाद तक पहुंचा दिया है। मंच के संरक्षक देवस्वरूप पटेल का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के अफसर तब तक कोई सुध नहीं लेते, जब तक यहां कोई बड़ा हादसा न हो जाए। उन्होंने इस रोड की बदहाली को लेकर फिर से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। उन्होंने पीलीभीत और सीतापुर हाईवे का भी मामला उठाया है।
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पीडब्ल्यूडी ने पिछले साल इस रोड को ठीक कराने के लिए करीब ढाई करोड़ का बजट खर्च किया था, लेकिन कई जगहों पर खूनी मोड़ पर रोड सुरक्षा के काम न कराए जाने और गड्ढे हो जाने से यहां दुर्घटनाएं नहीं रुक पा रही हैं। 30 अक्तूबर, 2019 को इस हाईवे पर हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने कुछ जगहों पर फिर से पैच वर्क कराया लेकिन महज औपचारिकता निभाने के लिए कराए गए इस काम का कोई नतीजा नहीं निकला। सड़क फिर से खराब हो गई है। भुता पेट्रोल पंप के सामने, मिलक गौंटिया, दौलतपुर डांडिया, कैलास पुल मोड़ पर कोलतार गायब हो चुका है। बजरी उधड़कर सड़क पर फैल गई है। इससे बाइक-स्कूटी वालों के फिसलने का खतरा पैदा हो गया है। भुता से रसूलपुर तक करीब नौ किलोमीटर तक नवंबर में सड़क की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन ये हिस्सा दो महीने में ही फिर से खराब हो गया है। गौरतलब है कि इस रोड को बनाने में पहले भी घपले उजागर होते रहे हैं। वर्ष 2018 में इस मामले में पीडब्ल्यूडी के छह इंजीनियरों के खिलाफ शासन ने कार्रवाई भी की थी।
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कमिश्नर तक पहुंचा रोड निर्माण में घपले का मामला
बीसलपुर रोड निर्माण और मरम्मत के नाम पर हुए घपले का मामला कमिश्नर तक पहुंच गया है। पूर्व में इस रोड को दुरुस्त और एक्सीडेंट जोन खत्म करने के लिए संघर्ष कर रहे क्रांतिकारी विचार मंच ने बीसलपुर रोड का पूरा हाल कमिश्नर रणवीर प्रसाद तक पहुंचा दिया है। मंच के संरक्षक देवस्वरूप पटेल का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के अफसर तब तक कोई सुध नहीं लेते, जब तक यहां कोई बड़ा हादसा न हो जाए। उन्होंने इस रोड की बदहाली को लेकर फिर से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। उन्होंने पीलीभीत और सीतापुर हाईवे का भी मामला उठाया है।
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