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टेल्गो: 275 की रफ्तार से दौड़ने की क्षमता
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 30 May 2016 01:04 AM IST
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टेल्गो ट्रेन का कोच
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टेल्गो कोच की विशेषता यह है कि ट्रैक बेहतर हो तो 250 से लेकर 275 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इस ट्रेन को दौड़ाया जा सकता है लेकिन भारत के ट्रैक पर इसको औसतन 180 किलोमीटर स्पीड पर चलाने की योजना है। स्पेन तकनीकी के टेल्गो कोच एल्यूमोनियम के बने हुए है, जिससे इनका वजन लोहे से बने भारतीय रेलवे के कोचों से आधा है। टेल्गो के कोच का वजन 20 टन है।
भारतीय रेल के प्रत्येक कोच में दो बोगियां होती हैं, जिस पर चार चक्के एक्सल से जुडे़ होते है जबकि टेल्गो कोच स्वतंत्र चक्कों पर निर्भर हैं। इसमें दो कोचों के बीच में मात्र चार चक्के होतेे हैं। हाइड्रोलिक प्रेशर से संचालित होने वाले इन चक्कों में डिस्क ब्रेक लगा हुआ है, जिसके कारण ब्रेक लगाए जाने पर गाड़ी चंद सेकेंडों में बिना झटके के रुककर खड़ी हो जाती है। दुर्घटना होने पर इसके कोच एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते। इससे जानमाल की हानि की संभावना नहीं रहती। इस गाड़ी के नौ कोचों के रेक में एक पावर कार, एक डाइनिंग कार, दो एक्जीक्यूटिव क्लास तथा पांच द्वितीय श्रेणी के कोच हैं। ट्रेन की कुर्सियों के बीच मेें काफी जगह दी गई है ताकि बैठने में आराम रहे। एक्जीक्यूटिव क्लास के कोचों में कुर्सियां इस तरह की है कि यात्री बैठकर आफिस का कार्य भी कर सकते हैं। एक्जीक्यूटिव क्लास में 24 सीट और द्वितीय श्रेणी में 36 सीटे हैं। कुल मिलाकर पूरी गाड़ी में 222 व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था है। इस गाड़ी में यात्रियों के मनोरंजन के लिए एलईडी टीवी स्क्रीन तथा सामान रखने के लिए प्रत्येक कोच मेें लगेज रेक की भी व्यवस्था है। डाइनिंग कार में ज्वलनशील गैस के स्थान पर माइक्रोवेव या अन्य तकनीक का सहारा लिया गया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि गाड़ी में उपलब्ध सभी सुख सुविधाएं उच्च कोटि की हैं, जो यात्रियों के सफर को फास्ट और आरामदायक बनाती है। कोच का संचालन सेंसर पर आधारित है। ट्रेन को तत्काल रोकने के लिए डिस्क ब्रेक लगे होते हैं। इसके कारण यात्रियों को झटका महसूस नहीं होता। कोच में चार लाइन के बीच में एक एलईडी लगा हुआ है। हर सीट पर चार्जर और ईयरफोन के लिए प्वाइंट लगे हुए हैं। भारत सरकार को स्पेन की कंपनी टेलगो ने एक बोगी की कीमत वहां से आयात कराने पर सात करोड़ रुपये निर्धारित की है। भारत में बोगी बनाने के लिए अनुबंध हुआ तो यहां पर साढ़े चार करोड़ में मिलेगी।
ट्रेन की खूबियां
- भारतीय कोच की तुलना में टेल्गो के कोच बेहद छोटे हैं। टेल्गो के कोच 12 मीटर है।
- ट्रेन के कोच एल्युमिनियम से बने हैं। जिसकी कीमत 1.70 करोड़ रुपये है। जबकि भारत के एलएचबी कोच की कीमत 2.75 करोड़ रुपये है।
- सभी कोच एनर्जी एफिसिएंट हैं और तीस प्रतिशत तक बिजली की खपत कम होती है।
- कोच के अंदर का इंटीरियर फायरप्रूफ है। कोच में लगे साउंट इंसुलेशन से आवाज मुक्त यात्रा का अनुभव मिलेगा।
- ट्रेन के कोच इस तरह डिजाइन किए गए हैं जिससे वे अधिक स्पीड पर भी आसानी से मुड़ सकें।
झटके लगे या नहीं, सेंसर बताएंगे
स्पेन के हाईस्पीड कोच टेल्गो का पहला ट्रायल कितना कारगर रहा, इसका खुलासा सेंसर की रिपोर्ट बताएगी। ट्रायल के दौरान कोच की स्पीड, घर्षण आदि की मानीटरिंग जैसी हर गतिविधि को आरएसडीए की टीम ने सेंसर में कैद कर लिया। यह भी सेंसर में कैद हो गया है कि ट्रायल के दौरान इन कोचों में झटके लगे या नहीं। बरेली-मुरादाबाद रूट पर हुए पहले ट्रायल की सेंसर डाटा लेकर आरएसडीए की टीम रविवार शाम को लखनऊ मुख्यालय रवाना हो गई। वहां इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उसके आधार पर निकलने वाले निष्कर्ष के मुताबिक अगले ट्रायल में कुछ पहलुओें पर फोकस किया जाएगा।
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सेंसर की डाटा रिपोर्ट आने में एक-दो दिन का समय लग सकता है इसलिए सोमवार को टेल्गो का ट्रायल नहीं कराया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि अब ट्रायल मंगलवार को हो सकता है। टेल्गो हाईस्पीड कोच हैं और औसतन 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से भारतीय इंजन के जरिए दौड़ाने पर इसकी कितनी स्पीड सामान्य तौर पर निकलेगी। इन कोच के अनुकूल रेल ट्रैक है या नहीं और जैसा कि स्पेन के इंजीनियरों का दावा है कि इन कोचों में बैठने वाले यात्रियों को झटके नहीं लगते, इन सभी पहलुओं का डाटा ट्रायल के दौरान सेंसर में कैद किया गया है। इसके लिए आरडीएसओ के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर टेस्टिंग हामिद अख्तर अपनी खास टीम के साथ ट्रायल में रहे। आरडीएसओ की टीम ने बरेली जंक्शन से टेल्गो को 40 किलोमीटर की स्पीड से आगे बढ़ाया। इसके बाद 60 फिर 70, 80, 90, 100, 105, 110 और 115 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से इसको ट्रैक पर दौड़ाया गया। प्रत्येक स्तर की स्पीड पर हर तकनीकी पहलू का सेंसर डाटा लिया गया। टेल्गो कोचों के दोनों ओर इंजन लगाए गए थे। एक तरह जहां सामान्य इंजन था, जो इसको मुरादाबाद तक लेकर गया। दूसरी ओर डब्ल्यूडीपी4 इंजन लगा था, जिसकी स्पीड क्षमता 220 किलोमीटर प्रति घंटा है। मुरादाबाद से वापसी में इसी स्पेशल इंजन के जरिए टेल्गो कोचों को बरेली जंक्शन पर लाया गया। दोनों इंजनों से कोचों की स्पीड, पटरियों का घर्षण और झटकों का सेंसर डाटा अलग-अलग तैयार किया गया।
किन-किन चीजों का सेंसर हुआ
-एनर्जी की खपत
-घर्षण कितना है
-पटरी, पहिए का घिसाव
-भारतीय इंजन के साथ स्पीड
-हाइड्रोलिक डिस्क ब्रेक की क्षमता
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भारतीय रेल के प्रत्येक कोच में दो बोगियां होती हैं, जिस पर चार चक्के एक्सल से जुडे़ होते है जबकि टेल्गो कोच स्वतंत्र चक्कों पर निर्भर हैं। इसमें दो कोचों के बीच में मात्र चार चक्के होतेे हैं। हाइड्रोलिक प्रेशर से संचालित होने वाले इन चक्कों में डिस्क ब्रेक लगा हुआ है, जिसके कारण ब्रेक लगाए जाने पर गाड़ी चंद सेकेंडों में बिना झटके के रुककर खड़ी हो जाती है। दुर्घटना होने पर इसके कोच एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते। इससे जानमाल की हानि की संभावना नहीं रहती। इस गाड़ी के नौ कोचों के रेक में एक पावर कार, एक डाइनिंग कार, दो एक्जीक्यूटिव क्लास तथा पांच द्वितीय श्रेणी के कोच हैं। ट्रेन की कुर्सियों के बीच मेें काफी जगह दी गई है ताकि बैठने में आराम रहे। एक्जीक्यूटिव क्लास के कोचों में कुर्सियां इस तरह की है कि यात्री बैठकर आफिस का कार्य भी कर सकते हैं। एक्जीक्यूटिव क्लास में 24 सीट और द्वितीय श्रेणी में 36 सीटे हैं। कुल मिलाकर पूरी गाड़ी में 222 व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था है। इस गाड़ी में यात्रियों के मनोरंजन के लिए एलईडी टीवी स्क्रीन तथा सामान रखने के लिए प्रत्येक कोच मेें लगेज रेक की भी व्यवस्था है। डाइनिंग कार में ज्वलनशील गैस के स्थान पर माइक्रोवेव या अन्य तकनीक का सहारा लिया गया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि गाड़ी में उपलब्ध सभी सुख सुविधाएं उच्च कोटि की हैं, जो यात्रियों के सफर को फास्ट और आरामदायक बनाती है। कोच का संचालन सेंसर पर आधारित है। ट्रेन को तत्काल रोकने के लिए डिस्क ब्रेक लगे होते हैं। इसके कारण यात्रियों को झटका महसूस नहीं होता। कोच में चार लाइन के बीच में एक एलईडी लगा हुआ है। हर सीट पर चार्जर और ईयरफोन के लिए प्वाइंट लगे हुए हैं। भारत सरकार को स्पेन की कंपनी टेलगो ने एक बोगी की कीमत वहां से आयात कराने पर सात करोड़ रुपये निर्धारित की है। भारत में बोगी बनाने के लिए अनुबंध हुआ तो यहां पर साढ़े चार करोड़ में मिलेगी।
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ट्रेन की खूबियां
- भारतीय कोच की तुलना में टेल्गो के कोच बेहद छोटे हैं। टेल्गो के कोच 12 मीटर है।
- ट्रेन के कोच एल्युमिनियम से बने हैं। जिसकी कीमत 1.70 करोड़ रुपये है। जबकि भारत के एलएचबी कोच की कीमत 2.75 करोड़ रुपये है।
- सभी कोच एनर्जी एफिसिएंट हैं और तीस प्रतिशत तक बिजली की खपत कम होती है।
- कोच के अंदर का इंटीरियर फायरप्रूफ है। कोच में लगे साउंट इंसुलेशन से आवाज मुक्त यात्रा का अनुभव मिलेगा।
- ट्रेन के कोच इस तरह डिजाइन किए गए हैं जिससे वे अधिक स्पीड पर भी आसानी से मुड़ सकें।
झटके लगे या नहीं, सेंसर बताएंगे
स्पेन के हाईस्पीड कोच टेल्गो का पहला ट्रायल कितना कारगर रहा, इसका खुलासा सेंसर की रिपोर्ट बताएगी। ट्रायल के दौरान कोच की स्पीड, घर्षण आदि की मानीटरिंग जैसी हर गतिविधि को आरएसडीए की टीम ने सेंसर में कैद कर लिया। यह भी सेंसर में कैद हो गया है कि ट्रायल के दौरान इन कोचों में झटके लगे या नहीं। बरेली-मुरादाबाद रूट पर हुए पहले ट्रायल की सेंसर डाटा लेकर आरएसडीए की टीम रविवार शाम को लखनऊ मुख्यालय रवाना हो गई। वहां इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उसके आधार पर निकलने वाले निष्कर्ष के मुताबिक अगले ट्रायल में कुछ पहलुओें पर फोकस किया जाएगा।
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किन-किन चीजों का सेंसर हुआ
-एनर्जी की खपत
-घर्षण कितना है
-पटरी, पहिए का घिसाव
-भारतीय इंजन के साथ स्पीड
-हाइड्रोलिक डिस्क ब्रेक की क्षमता