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सपा के पार्टी दफ्तर पर टकराव अब तय
बरेली
Updated Wed, 04 Jan 2017 12:53 AM IST
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सपा कार्यालय को लेकर अखिलेश और मुलायम वादियों के बीच टकराव तय लग रहा है। पुरानी सपा के जिलाध्यक्ष वीर पाल सिंह यादव ने मंगलवार को साफ किया कि मिशन कपाउंड स्थित जिला कार्यालय सपा का नहीं बल्कि लोहिया ट्रस्ट की संपत्ति है। जिसको 2002 में सपा सरकार के दौरान लोहिया ट्रस्ट के नाम से लिया गया था। उन दिनों इस भवन को बनवाने में जिले के प्रमुख नेताओं का योगदान रहा है, उनमें से अब कई बसपा और भाजपा के प्रमुख पदों पर हैैं। आशय साफ है कि वह यूं ही दफ्तर खाली करने वाले नहीं है।
जिलाध्यक्ष ने पार्टी कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बरेली ही नहीं प्रदेश के अधिकांश सपा कार्यालय लोहिया ट्रस्ट की संपत्ति हैं। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव इस ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष हैं, जबकि सपा नेता शिवपाल यादव ट्रस्टी हैं। इनके अलावा काफी संख्या में लोहिया ट्रस्ट में प्रदेश और देश के प्रमुख लोग सदस्य तथा अन्य पदाधिकारी हैं। मिशन कंपाउंड स्थित ट्रस्ट के भवन को 2005 से 2006 के बीच बनाया गया था। जिसको बनवाने में सुल्तान बेग, ब्रह्म स्वरूप सागर और वीरेंद्र सिंह गंगवार,धर्मेंद्र कश्यप आदि ने अहम भूमिका निभाई। अब ये सभी बसपा और भाजपा के प्रमुख पदों पर हैं। सोमवार के वीरपाल दप्तर नहीं आए थे उन्होंने अपने निवास पर ही अपने लोगों के साथ बैठक की। अलबत्ता उनके कुछ करीबी लोग जरूर दफ्तर परिसर में रहे। इधर अखिलेशवादी बहुत साफ तो नहीं कह रहे हैं लेकिन ये जरूर कह रहे हैं कि नई कार्यकारिणी बनने के बाद दप्तर जाएंगे। संकेत मिले हैं कि दो - तीन दिन में नए जिलाध्यक्ष की तैनाती हो जाएगी, उसी के बाद कब्जे को लेकर जंग के आसार हैं।
वीरपाल ने दफ्तर की संपत्ति पर बयान देकर उन्होंने इशारा कर दिया है कि मौजूदा हालात में वह दूसरे लोगों को आसानी से अपना दफ्तर नहीं सौंपने वाले हैं। वीरपाल यादव अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिशन कंपाउंड स्थित कार्यालय में करीब तीन घंटे तक जमे रहे। वहां मौजूद अधिकांश सपा कार्यकर्ता लखनऊ और दिल्ली में हो रही सपा नेताओं की गतिविधियों पर नजर लगाए हुए थे। उनके आने से पहले और जाने के बाद दर्जन भर लोग वहीं जमेे थे।
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अखिलेशवादी बोले,वीरपाल संगठन विरोधी
बरेली। पिछले सप्ताह से संगठन में चल रही जंग स्थानीय स्तर पर भी खुलकर आ गई है। सपा अखिलेश गुट के नेता एवं पूर्व महानगर अध्यक्ष कदीर अहमद ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए जिलाध्यक्ष वीरपाल पर जमकर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्ष खुद तो जीते नहीं, सपा प्रत्याशियों को हराने और उनके टिकट कटवाकर संगठन को कमजोर करने का काम करते रहे हैं।
पूर्व महानगर अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष ने तो चुनाव के दौरान सर्वराज सिंह, भगवत शरण गंगवार, अताउर रहमान, अरुण कुमार, धर्मेंद्र कश्यप तथा महीपाल सिंह यादव तक को चुनाव के दौरान हराने का काम किया है। यहां तक कि एमएलसी के चुनाव में अनिल शर्मा को एन वक्त पर टिकट कटवाया। अब कह रहे हैं कि सपा गठन से लेकर अब तक पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं। उनका यह बयान सरासर झूठ है, क्योंकि बरेली की जनता जानती है कि वह पहले क्या थे और सपा संगठन से जुड़ने के बाद क्या हो गए। वार्ता के दौरान अरविंद यादव, सूरज यादव, रवेंद्र पाल सिंह, दीपक शर्मा, सुरेंद्र सिंह, दिनेश कुमार, राजेश यादव आदि मौजूद थे।
आरोप लगाने वालों की कोई औकात नहीं
बरेली।वीर पाल सिंह ने अखिलेशवादियों की प्रेस वार्ता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरे ऊपर आरोप लगाने वालों की कोई औकात नहीं है। उनके लगाए गए आरोपों का क्या जवाब दूं। इनकी औकात तो इसी से लगाई जा सकती है कि वह 2012 के विधानसभा चुनाव में अपने बूथों से संगठन को 100-100 वोट तक नहीं दिला पाए। उनके इलाकों से सपा को कितने वोट मिले, यह ब्योरा चुनाव आयोग की साइट पर देखा जा सकता है।
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जिलाध्यक्ष ने पार्टी कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बरेली ही नहीं प्रदेश के अधिकांश सपा कार्यालय लोहिया ट्रस्ट की संपत्ति हैं। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव इस ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष हैं, जबकि सपा नेता शिवपाल यादव ट्रस्टी हैं। इनके अलावा काफी संख्या में लोहिया ट्रस्ट में प्रदेश और देश के प्रमुख लोग सदस्य तथा अन्य पदाधिकारी हैं। मिशन कंपाउंड स्थित ट्रस्ट के भवन को 2005 से 2006 के बीच बनाया गया था। जिसको बनवाने में सुल्तान बेग, ब्रह्म स्वरूप सागर और वीरेंद्र सिंह गंगवार,धर्मेंद्र कश्यप आदि ने अहम भूमिका निभाई। अब ये सभी बसपा और भाजपा के प्रमुख पदों पर हैं। सोमवार के वीरपाल दप्तर नहीं आए थे उन्होंने अपने निवास पर ही अपने लोगों के साथ बैठक की। अलबत्ता उनके कुछ करीबी लोग जरूर दफ्तर परिसर में रहे। इधर अखिलेशवादी बहुत साफ तो नहीं कह रहे हैं लेकिन ये जरूर कह रहे हैं कि नई कार्यकारिणी बनने के बाद दप्तर जाएंगे। संकेत मिले हैं कि दो - तीन दिन में नए जिलाध्यक्ष की तैनाती हो जाएगी, उसी के बाद कब्जे को लेकर जंग के आसार हैं।
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वीरपाल ने दफ्तर की संपत्ति पर बयान देकर उन्होंने इशारा कर दिया है कि मौजूदा हालात में वह दूसरे लोगों को आसानी से अपना दफ्तर नहीं सौंपने वाले हैं। वीरपाल यादव अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिशन कंपाउंड स्थित कार्यालय में करीब तीन घंटे तक जमे रहे। वहां मौजूद अधिकांश सपा कार्यकर्ता लखनऊ और दिल्ली में हो रही सपा नेताओं की गतिविधियों पर नजर लगाए हुए थे। उनके आने से पहले और जाने के बाद दर्जन भर लोग वहीं जमेे थे।
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अखिलेशवादी बोले,वीरपाल संगठन विरोधी
बरेली। पिछले सप्ताह से संगठन में चल रही जंग स्थानीय स्तर पर भी खुलकर आ गई है। सपा अखिलेश गुट के नेता एवं पूर्व महानगर अध्यक्ष कदीर अहमद ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए जिलाध्यक्ष वीरपाल पर जमकर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्ष खुद तो जीते नहीं, सपा प्रत्याशियों को हराने और उनके टिकट कटवाकर संगठन को कमजोर करने का काम करते रहे हैं।
पूर्व महानगर अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष ने तो चुनाव के दौरान सर्वराज सिंह, भगवत शरण गंगवार, अताउर रहमान, अरुण कुमार, धर्मेंद्र कश्यप तथा महीपाल सिंह यादव तक को चुनाव के दौरान हराने का काम किया है। यहां तक कि एमएलसी के चुनाव में अनिल शर्मा को एन वक्त पर टिकट कटवाया। अब कह रहे हैं कि सपा गठन से लेकर अब तक पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं। उनका यह बयान सरासर झूठ है, क्योंकि बरेली की जनता जानती है कि वह पहले क्या थे और सपा संगठन से जुड़ने के बाद क्या हो गए। वार्ता के दौरान अरविंद यादव, सूरज यादव, रवेंद्र पाल सिंह, दीपक शर्मा, सुरेंद्र सिंह, दिनेश कुमार, राजेश यादव आदि मौजूद थे।
आरोप लगाने वालों की कोई औकात नहीं
बरेली।वीर पाल सिंह ने अखिलेशवादियों की प्रेस वार्ता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरे ऊपर आरोप लगाने वालों की कोई औकात नहीं है। उनके लगाए गए आरोपों का क्या जवाब दूं। इनकी औकात तो इसी से लगाई जा सकती है कि वह 2012 के विधानसभा चुनाव में अपने बूथों से संगठन को 100-100 वोट तक नहीं दिला पाए। उनके इलाकों से सपा को कितने वोट मिले, यह ब्योरा चुनाव आयोग की साइट पर देखा जा सकता है।