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कुपोषण से लड़ेगा सोयाबीन का दूध और सोया पनीर
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आईवीआरआई
- फोटो : सोशल नेटवर्क
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आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र ने प्रशिक्षण देना शुरू किया
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विशेषज्ञों बोले- गाय व भैंस के दूध की तरह ही फायदेमंद है यह पनीर-दूध
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र (आईवीआरआई) के कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ रोजगार के अवसर बढ़ाते हुए सोयाबीन से दूध और पोया पनीर बढ़ाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन से बनने वाला दूध और पनीर स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होगा।
हाल ही में कृषि विज्ञान केंद्र की गृह विज्ञान इकाई के द्वारा सोयाबीन का दूध, पनीर और अन्य उत्पाद बनाने का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया था। कोरोना गाइडलाइन की वजह से कार्यक्रम में ‘एक उम्मीद’ नाम के स्वयं सहायता समूह से केवल सात महिलाओं को ही सम्मिलित किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों में बढ़ती हुई कुपोषण की समस्या की ओर उनका ध्यान आकर्षित करना था। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र की गृह विज्ञान इकाई की विषय विशेषज्ञ डॉ. रंजना गुप्ता ने महिलाओं को बताया कि आजकल भोजन में प्रोटीन की कमी ही कुपोषण का मुख्य कारण है। इस समस्या का एक समाधान है- सोयाबीन का खानपान में प्रतिदिन उपयोग। सोयाबीन प्रोटीन का एक बहुत ही सस्ता एवं आसानी से उपलब्ध श्रोत है। एक किलो सोयाबीन से लगभग सात लीटर सोयाबीन का दूध और डेढ़ किलो पनीर तैयार हो जाता है, जिसमें पोषक तत्वों की मात्रा गाय व भैंस के दूध के लगभग बराबर ही होती है। वसा की मात्रा बिल्कुल नहीं होती है। इन कारणों से सोयाबीन का दूध बीमार व बुजुर्गों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने स्वयं सोयाबीन का दूध और पनीर के साथ बची हुई दाल से सोया हलवा आदि तैयार किया, जिसे खूब पसंद किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (भोपाल) की ओर से पनीर बनाने का भी खास प्रशिक्षण दिया गया, ताकि दुग्ध व्यवसाय से जुड़ी महिलाएं इससे अपने व्यवसाय के रूप में अपना सके।
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विशेषज्ञों बोले- गाय व भैंस के दूध की तरह ही फायदेमंद है यह पनीर-दूध बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र (आईवीआरआई) के कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ रोजगार के अवसर बढ़ाते हुए सोयाबीन से दूध और पोया पनीर बढ़ाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन से बनने वाला दूध और पनीर स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होगा।
हाल ही में कृषि विज्ञान केंद्र की गृह विज्ञान इकाई के द्वारा सोयाबीन का दूध, पनीर और अन्य उत्पाद बनाने का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया था। कोरोना गाइडलाइन की वजह से कार्यक्रम में ‘एक उम्मीद’ नाम के स्वयं सहायता समूह से केवल सात महिलाओं को ही सम्मिलित किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों में बढ़ती हुई कुपोषण की समस्या की ओर उनका ध्यान आकर्षित करना था। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र की गृह विज्ञान इकाई की विषय विशेषज्ञ डॉ. रंजना गुप्ता ने महिलाओं को बताया कि आजकल भोजन में प्रोटीन की कमी ही कुपोषण का मुख्य कारण है। इस समस्या का एक समाधान है- सोयाबीन का खानपान में प्रतिदिन उपयोग। सोयाबीन प्रोटीन का एक बहुत ही सस्ता एवं आसानी से उपलब्ध श्रोत है। एक किलो सोयाबीन से लगभग सात लीटर सोयाबीन का दूध और डेढ़ किलो पनीर तैयार हो जाता है, जिसमें पोषक तत्वों की मात्रा गाय व भैंस के दूध के लगभग बराबर ही होती है। वसा की मात्रा बिल्कुल नहीं होती है। इन कारणों से सोयाबीन का दूध बीमार व बुजुर्गों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने स्वयं सोयाबीन का दूध और पनीर के साथ बची हुई दाल से सोया हलवा आदि तैयार किया, जिसे खूब पसंद किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (भोपाल) की ओर से पनीर बनाने का भी खास प्रशिक्षण दिया गया, ताकि दुग्ध व्यवसाय से जुड़ी महिलाएं इससे अपने व्यवसाय के रूप में अपना सके।