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सेटेलाइट ब्रिज प्रतिक्रिया
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फोटो: एके मिश्रा पूर्व चीफ इंजीनियर
चौंके पीडब्लूडी के
पूर्व चीफ इंजीनियर
200 फीट चौडे़ रोड पर पुल...
क्या और कोई रास्ता ही नहीं था
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। करीब 50 मीटर चौड़े नेशनल हाइवे पर सेटेलाइट फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर पहले से लोग सवाल दाग रहे हैं कि आखिर यहां पर पुल क्यों बनाया जा रहा है। अब पीलीभीत मार्ग पर फ्लाईओवर का एक सिरा उतारने की चर्चा शुरू होते ही लोग हैरत में है कि सरकारी धन अनापशनाप कामों में क्यों लगाया जा रहा है। जबकि दोनों मार्गों पर अतिक्रमण साफ कर यातायात सुगम बनाया जा सकता था। इस पर लोक निर्माण विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर एके मिश्रा से अनौपचारिक बात हुई तो वे हैरत करने लगे कि सेटलाइट स्टेशन के सामने 200 मीटर चौड़ी सड़क पर पुल क्या जरूरत है? वे बोले- योजनाएं और प्रोजेक्ट जनहित में बने किसी राजनीति से प्रेरित होकर न हो। क्योंकि करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट तैयार कराने में कुछ व्यक्ति विशेष ही पीछे होते हैं, जबकि इसका फायदा सभी को मिलता है। अगर कोई प्रोजेक्ट गलत बन जाए तो भी सभी प्रभावित होते हैं।
बरेली में रहे चुके पूर्व चीफ इंजीनियर एके मिश्रा से सेटेलाइट फ्लाईओवर और पीलीभीत दिशा में एक लेन बनाए जाने पर प्रतिक्रिया जानना चाहा। उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि इतने चौड़े हाइवे पर फ्लाईओवर की कोई जरूरत नहीं थी। लेकिन विकास कार्य के नाम पर प्रोजेक्ट लाया गया। इससे यातायात समस्या आने वाले दिनों बढ़ेगी। श्यामगंज फ्लाईओवर प्रोजेक्ट सामने है, नीचे आवागमन में परेशानी हो रही है। लेकिन कारें आदि पुल से ऊपर जा रहे हैं यानी पुल से फायदा हुआ। लेकिन सेटेलाइट पर बस स्टेशन है, इसलिए वहां पर अतिक्रमण बना रहेगी। पुल बनने के बाद फ्लाईओवर के नीचे लोग कब्जा कर ही लेते हैं। इसलिए कोई भी प्रोजेक्ट हो उसका हर एेंगल से देखना जरूरी होता है।
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फोटो:
उमेश गुप्ता
पुल तो कुतुबखाना बाजार में बनना चाहिए
हम तो हर दिन शहर में कारोबार करने आते हैं। सेटेलाइट पर पुल बनाने की जरूरत नहीं थी, हाइवे पर चौड़ी सड़क से सिर्फ अतिक्रमण साफ करने से ही यातायात सुगम हो जाता है। इसके बदले कुतुबखाना बाजार पर पुल बनाया जाता। अब पीलीभीत मार्ग पर एक एक लेन उतारने की चर्चा हो रही है, यह सब पैसे की बर्बादी है।
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- उमेश गुप्ता, कारोबारी
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फोटो: मुख्तार
बेहद चौड़ी सड़क पर पहले सेटेलाइट पुल और अब पीलीभीत दिशा में भी इसे उतारने की कोशिश हो रही है। यह सब सरकारी धन का दुरुपयोग होगा। इसी तरह नरियावल नकटिया पर पुल बनाया जा रहा है। पीलीभीत दिशा में पुल का एक सिरा उतारने अतिक्रमण बढ़ेगा और यातायात जाम होगा। सेतु निगम और राजनेता इस पर विचार जरूर करें।
- मुख्तार अहमद, समाजसेवी
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चौंके पीडब्लूडी के
पूर्व चीफ इंजीनियर
200 फीट चौडे़ रोड पर पुल...
क्या और कोई रास्ता ही नहीं था
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। करीब 50 मीटर चौड़े नेशनल हाइवे पर सेटेलाइट फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर पहले से लोग सवाल दाग रहे हैं कि आखिर यहां पर पुल क्यों बनाया जा रहा है। अब पीलीभीत मार्ग पर फ्लाईओवर का एक सिरा उतारने की चर्चा शुरू होते ही लोग हैरत में है कि सरकारी धन अनापशनाप कामों में क्यों लगाया जा रहा है। जबकि दोनों मार्गों पर अतिक्रमण साफ कर यातायात सुगम बनाया जा सकता था। इस पर लोक निर्माण विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर एके मिश्रा से अनौपचारिक बात हुई तो वे हैरत करने लगे कि सेटलाइट स्टेशन के सामने 200 मीटर चौड़ी सड़क पर पुल क्या जरूरत है? वे बोले- योजनाएं और प्रोजेक्ट जनहित में बने किसी राजनीति से प्रेरित होकर न हो। क्योंकि करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट तैयार कराने में कुछ व्यक्ति विशेष ही पीछे होते हैं, जबकि इसका फायदा सभी को मिलता है। अगर कोई प्रोजेक्ट गलत बन जाए तो भी सभी प्रभावित होते हैं।
बरेली में रहे चुके पूर्व चीफ इंजीनियर एके मिश्रा से सेटेलाइट फ्लाईओवर और पीलीभीत दिशा में एक लेन बनाए जाने पर प्रतिक्रिया जानना चाहा। उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि इतने चौड़े हाइवे पर फ्लाईओवर की कोई जरूरत नहीं थी। लेकिन विकास कार्य के नाम पर प्रोजेक्ट लाया गया। इससे यातायात समस्या आने वाले दिनों बढ़ेगी। श्यामगंज फ्लाईओवर प्रोजेक्ट सामने है, नीचे आवागमन में परेशानी हो रही है। लेकिन कारें आदि पुल से ऊपर जा रहे हैं यानी पुल से फायदा हुआ। लेकिन सेटेलाइट पर बस स्टेशन है, इसलिए वहां पर अतिक्रमण बना रहेगी। पुल बनने के बाद फ्लाईओवर के नीचे लोग कब्जा कर ही लेते हैं। इसलिए कोई भी प्रोजेक्ट हो उसका हर एेंगल से देखना जरूरी होता है।
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फोटो:
उमेश गुप्ता
पुल तो कुतुबखाना बाजार में बनना चाहिए
हम तो हर दिन शहर में कारोबार करने आते हैं। सेटेलाइट पर पुल बनाने की जरूरत नहीं थी, हाइवे पर चौड़ी सड़क से सिर्फ अतिक्रमण साफ करने से ही यातायात सुगम हो जाता है। इसके बदले कुतुबखाना बाजार पर पुल बनाया जाता। अब पीलीभीत मार्ग पर एक एक लेन उतारने की चर्चा हो रही है, यह सब पैसे की बर्बादी है।
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- उमेश गुप्ता, कारोबारी
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फोटो: मुख्तार
बेहद चौड़ी सड़क पर पहले सेटेलाइट पुल और अब पीलीभीत दिशा में भी इसे उतारने की कोशिश हो रही है। यह सब सरकारी धन का दुरुपयोग होगा। इसी तरह नरियावल नकटिया पर पुल बनाया जा रहा है। पीलीभीत दिशा में पुल का एक सिरा उतारने अतिक्रमण बढ़ेगा और यातायात जाम होगा। सेतु निगम और राजनेता इस पर विचार जरूर करें।
- मुख्तार अहमद, समाजसेवी