{"_id":"575c71014f1c1b0e369c5535","slug":"sahbon-bungalows-deviates-from-the-panchayat-hygienists","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहबों के बंगलों से हटेंगे पंचायत सफाई कर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साहबों के बंगलों से हटेंगे पंचायत सफाई कर्मी
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 12 Jun 2016 01:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
डीपीआरओ ने बड़ी हिम्मत दिखाते हुए शनिवार को जिले के 146 पंचायत सफाई कर्मियों का अटैचमेंट खत्म कर दिया। इनमें से अधिकांश कर्मी प्रशासनिक और विभिन्न विभागों के बंगलों पर कार्यरत हैं। अटैचमेंट खत्म करने के डीपीआरओ के आदेश के बाद विभाग में चर्चा यह रही कि अफसरों के बंगलों से इन सफाई कर्मियों के हटाए जाने के बाद अब वहां कौन काम करेगा। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि डीपीआरओ अपना ही आदेश लागू करा पाएंगे तो बड़ी बात होगी।
जिन सफाई कर्मी की मूल नियुक्ति ग्राम पंचायतों में वहां की गलियों में साफसफाई करने के लिए है, उनमें से लगभग 146 कर्मियों को पिछले कुछ वर्षों में जहां-तहां अटैच कर दिया गया। कई प्रशासनिक अफसरों के बंगलों में ही लगभग 30 कर्मचारी अटैच हैं और वह गांव के बजाय बंगलों में अफसरों के लिए काम कर रहे हैं। पांच सफाई कर्मी उपनिदेशक पंचायत और इतने ही डीपीआरओ तथा डीआरडीए के परियोजना अधिकारी के आवास पर काम कर रहे हैं। कई तो पीडी के अलावा कई ब्लाकों के बीडीओ के वाहन भी चला रहे हैं। सारे खंड विकास कार्यालयों से भी कर्मी अटैच हैं। पांच कर्मचारी निर्वाचन कार्यालय और विकास भवन से भी अटैच कर दिए गए हैं। अटैच कर्मचारियों को अपनी-अपनी पंचायतों में जाने से छूट हासिल रहती है। इसके चलते इन गांवों में नियमित साफसफाई नहीं हो पाती। तहसील दिवसों के दौरान ग्राम प्रधान और ग्रामीणों की ओर से गांव में सफाई न होने की शिकायतें की जाती रहती हैं। इसको देखते हुए डीपीआरओ दिनेश सिंह ने सारे कर्मचारियों का अटैचमेंट खत्म करके उनको पंचायतों में जाकर सफाई का काम करने के आदेश दिए हैं। यह भी चेताया है कि अगर वह पंचायतों में नहीं गए तो उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा। बता दें कि जिले में कुल 1947 पंचायत सफाई कर्मचारी कार्यरत है।
जिन सफाई कर्मी की मूल नियुक्ति ग्राम पंचायतों में वहां की गलियों में साफसफाई करने के लिए है, उनमें से लगभग 146 कर्मियों को पिछले कुछ वर्षों में जहां-तहां अटैच कर दिया गया। कई प्रशासनिक अफसरों के बंगलों में ही लगभग 30 कर्मचारी अटैच हैं और वह गांव के बजाय बंगलों में अफसरों के लिए काम कर रहे हैं। पांच सफाई कर्मी उपनिदेशक पंचायत और इतने ही डीपीआरओ तथा डीआरडीए के परियोजना अधिकारी के आवास पर काम कर रहे हैं। कई तो पीडी के अलावा कई ब्लाकों के बीडीओ के वाहन भी चला रहे हैं। सारे खंड विकास कार्यालयों से भी कर्मी अटैच हैं। पांच कर्मचारी निर्वाचन कार्यालय और विकास भवन से भी अटैच कर दिए गए हैं। अटैच कर्मचारियों को अपनी-अपनी पंचायतों में जाने से छूट हासिल रहती है। इसके चलते इन गांवों में नियमित साफसफाई नहीं हो पाती। तहसील दिवसों के दौरान ग्राम प्रधान और ग्रामीणों की ओर से गांव में सफाई न होने की शिकायतें की जाती रहती हैं। इसको देखते हुए डीपीआरओ दिनेश सिंह ने सारे कर्मचारियों का अटैचमेंट खत्म करके उनको पंचायतों में जाकर सफाई का काम करने के आदेश दिए हैं। यह भी चेताया है कि अगर वह पंचायतों में नहीं गए तो उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा। बता दें कि जिले में कुल 1947 पंचायत सफाई कर्मचारी कार्यरत है।
विज्ञापन