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सब गोलमाल है, साहब यहां भी हेराफेरी! न चौड़ीकरण हुआ
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बरेली। साल भर पहले तक बरेली में पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर रहे हिमांशु मित्तल यहां घोटालों का अच्छा-खासा इतिहास बना गए। प्रयागराज में तैनाती के दौरान हाल ही में 144 करोड़ के घोटाले में उनका नाम शामिल होने के बाद बरेली में किए कई और घोटाले भी एक-एक कर सामने आने लगे हैं। इन्हीं में एक भमोरा से चौपुला के बीच सड़क को चौड़ा करने के नाम पर हुआ करोड़ों का घोटाला शामिल है। शिकायत हुई है कि वर्ष 2016 में बरेली-बदायूं फोरलेन रोड के प्रोजेक्ट का हिस्सा रही इस सड़क को पूरा बनाकर चौड़ा करने के बजाय सिर्फ उसे साइडों से चौड़ा कर पूरा बजट साफ कर दिया गया।
बदायूं-बरेली फोरलेन का करीब 280 करोड़ का प्रोजेक्ट था जिसमें अब एक के बाद एक घोटाले की परतें उधड़ रही हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बदायूं से बरेली की सीमा में भमोरा तक सड़क चौड़ी किए जाने का काम होना था। भमोरा से चौपुला चौराहे तक भी इस सड़क को चौड़ा किया जाना था। पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन चीफ इंजीनियर हिमांशु मित्तल की देखरेख में ही इस सड़क पर काम हुआ था। इस प्रोजेक्ट के घोटाले के संबंध में शासन में शिकायत भी पहुंची थी कि भमोरा से चौपुला चौराहे तक पुरानी सड़क को ठीक किए बगैर ही उसके किनारों को चौड़ा कर हॉटमिक्स की लेयर बिछा दी गई थी। पुराने डिवाइडर तक को नहीं छुआ गया। सिर्फ उस पर पेंट कर दिया गया था। शिकायत है कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने रोड के इस हिस्से के पूरे निर्माण का पेमेंट कर कई करोड़ रुपये का गोलमाल कर लिया है। लोगों का कहना है कि रोड सही न बनने से यह सड़क खराब होनी शुरू हो गई है। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है।
हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी अफसरों से जांच जल्द पूरा करने को कहा
यह घोटाला सामने आने के बावजूद पीडब्ल्यूडी के अफसर लंबे समय तक इसे दबाए रहे। बाद में यह मामला हाईकोर्ट में पहुंचा। कोर्ट ने करीब साढ़े तीन माह पहले पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को आदेश दिए थे कि इस प्रकरण की जांच को 15 दिन में पूरा किया जाए, लेकिन इसे अब तक पूरा नहीं किया गया। कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को फिर से जांच पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
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144 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी में फंसे हैं हिमांशु मित्तल
बरेली। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल अब प्रयागराज में तैनात हैं। हाल ही में उनके खिलाफ सड़कों केअनुबंधों की स्वीकृति में नियमों की अनदेखी कर अरबों रुपये की वित्तीय अनियमितता करने का मामला सामने आया है। शासन से गठित जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर घोटाले बरेली और आगरा में तैनाती के दौरान हुए। मित्तल ने निर्माण कार्यों में खुलकर मानकों की अनदेखी की। अकेले बरेली क्षेत्र में ठेका फर्मों की मिलीभगत से 144 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद यूपी के भ्रष्ट अधिकारियों की सूची में शामिल किया गया था।
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बदायूं-बरेली फोरलेन का करीब 280 करोड़ का प्रोजेक्ट था जिसमें अब एक के बाद एक घोटाले की परतें उधड़ रही हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बदायूं से बरेली की सीमा में भमोरा तक सड़क चौड़ी किए जाने का काम होना था। भमोरा से चौपुला चौराहे तक भी इस सड़क को चौड़ा किया जाना था। पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन चीफ इंजीनियर हिमांशु मित्तल की देखरेख में ही इस सड़क पर काम हुआ था। इस प्रोजेक्ट के घोटाले के संबंध में शासन में शिकायत भी पहुंची थी कि भमोरा से चौपुला चौराहे तक पुरानी सड़क को ठीक किए बगैर ही उसके किनारों को चौड़ा कर हॉटमिक्स की लेयर बिछा दी गई थी। पुराने डिवाइडर तक को नहीं छुआ गया। सिर्फ उस पर पेंट कर दिया गया था। शिकायत है कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने रोड के इस हिस्से के पूरे निर्माण का पेमेंट कर कई करोड़ रुपये का गोलमाल कर लिया है। लोगों का कहना है कि रोड सही न बनने से यह सड़क खराब होनी शुरू हो गई है। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है।
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हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी अफसरों से जांच जल्द पूरा करने को कहा
यह घोटाला सामने आने के बावजूद पीडब्ल्यूडी के अफसर लंबे समय तक इसे दबाए रहे। बाद में यह मामला हाईकोर्ट में पहुंचा। कोर्ट ने करीब साढ़े तीन माह पहले पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को आदेश दिए थे कि इस प्रकरण की जांच को 15 दिन में पूरा किया जाए, लेकिन इसे अब तक पूरा नहीं किया गया। कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को फिर से जांच पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
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144 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी में फंसे हैं हिमांशु मित्तल
बरेली। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल अब प्रयागराज में तैनात हैं। हाल ही में उनके खिलाफ सड़कों केअनुबंधों की स्वीकृति में नियमों की अनदेखी कर अरबों रुपये की वित्तीय अनियमितता करने का मामला सामने आया है। शासन से गठित जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर घोटाले बरेली और आगरा में तैनाती के दौरान हुए। मित्तल ने निर्माण कार्यों में खुलकर मानकों की अनदेखी की। अकेले बरेली क्षेत्र में ठेका फर्मों की मिलीभगत से 144 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद यूपी के भ्रष्ट अधिकारियों की सूची में शामिल किया गया था।