{"_id":"5ea87dfa8ebc3e907234a5f2","slug":"rice-godown-checked-bareilly-news-bly404164624","type":"story","status":"publish","title_hn":"घटिया चावल वितरण के मामले में एसडब्ल्यूसी ने चेक किए गोदाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घटिया चावल वितरण के मामले में एसडब्ल्यूसी ने चेक किए गोदाम
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बरेली। केंद्र सरकार ने सरकारी राशन दुकानों से 15 अप्रैल से गरीबों को पांच-पांच किलो मुफ्त चावल वितरित कराना शुरू किया है, लेकिन भारतीय खाद्य निगम ने इसकी आड़ में घोटाला कर दिया। उसने राशन दुकानों पर घटिया चावल की सप्लाई कर दी। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया तो खाद्य विभाग में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य भंडारण निगम (एसडब्ल्यूसी) ने गोदामों का स्टॉक चेक करना शुरू कर दिया है। विभागीय अफसरों ने मंगलवार को बरेली और बदायूं में एफसीआई के गोदाम चेक किए।
राशन कार्ड के प्रत्येक यूनिट पर पांच-पांच किलोग्राम चावल फ्री देने की योजना लागू होते ही एफसीआई अफसरों की मौज आ गई। सूत्रों ने बताया कि एफसीआई ने फ्री चावल वितरण योजना में वर्ष 2017 का पुराना स्टाक भी सप्लाई कर दिया। हजारों क्विंटल घटिया चावल राशन दुकानों पर पहुंचा तो कार्ड धारकों ने हंगामा कर दिया। इसका समाचार अमर उजाला ने प्रमुखता से छापा तो जिले के प्रभारी मंत्री (ऊर्जा मंत्री) ने जांच कराने का आदेश दिया। इसके बाद राज्य भंडारण निगम ने तुरंत एफसीआई अफसरों से घटिया चावल सप्लाई की जानकारी मांगी तो उन्हें गोलमोल जवाब दिया गया। निगम ने संयुक्त टीम से गोदाम चेक कराने का प्रस्ताव रखा, तो एफएसआई ने सहमति तो जता दी, लेकिन संयुक्त टीम के लिए कोई अधिकारी नामित नहीं किया। इसके बाद फिर से भंडारण निगम ने प्रयास किया तब एफसीआई अफसरों ने कह दिया कि उन्होंने गोदाम चेक करा लिए हैं।
घटिया चावल सप्लाई मामले की अनदेखी होते देख मंगलवार दोपहर एसडब्लूसी अधिकारी खुद रसोईया गोदाम पहुंच गए। वहां से एफसीआई गोदाम प्रबंधक को फोन किया लेकिन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद क्षेत्रीय प्रबंधक रविंद्र राजन ने अपनी टीम के साथ गोदाम का स्टॉक चेक किया और बदायूं जिले में स्थित गोदामों में भंडारित चावल की क्वालिटी देखी।
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भारतीय खाद्य निगम ने खपा दिया घटिया चावल
एफसीआई ने घटिया चावल का पुराना स्टाक फ्री योजना में खपा दिया है, क्योंकि मंगलवार दोपहर गोदाम चेक करने गई टीम को एफसीआई गोदामों पर स्टॉक नहीं मिला। बताया जाता है कि एफसीआई के गोदामों में भंडारित पुराना घटिया चावल 40 फीसदी टूटा हुआ था। इस स्टाक को खाद्यान्न वितरण एजेंसियां लेने से मना कर रहीं थीं। लिहाजा उसे लॉक डाउन में मौका मिलते ही खपा दिया गया। गोदामों से सबूत नष्ट करने के लिए नमूने भी बदल दिए गए हैं। इसकी सही जानकारी देने से एफसीआई अफसर बच रहे हैं लेकिन एसडब्लूसी टीम का निरीक्षण कुछ गुल खिला सकता है। मामला जिले के प्रभारी मंत्री तक पहुंचा तो उन्होंने नाराजी जताई और जांच करने का कहा, इससे महकमे में खलबली मची हुई है।
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राशन कार्ड के प्रत्येक यूनिट पर पांच-पांच किलोग्राम चावल फ्री देने की योजना लागू होते ही एफसीआई अफसरों की मौज आ गई। सूत्रों ने बताया कि एफसीआई ने फ्री चावल वितरण योजना में वर्ष 2017 का पुराना स्टाक भी सप्लाई कर दिया। हजारों क्विंटल घटिया चावल राशन दुकानों पर पहुंचा तो कार्ड धारकों ने हंगामा कर दिया। इसका समाचार अमर उजाला ने प्रमुखता से छापा तो जिले के प्रभारी मंत्री (ऊर्जा मंत्री) ने जांच कराने का आदेश दिया। इसके बाद राज्य भंडारण निगम ने तुरंत एफसीआई अफसरों से घटिया चावल सप्लाई की जानकारी मांगी तो उन्हें गोलमोल जवाब दिया गया। निगम ने संयुक्त टीम से गोदाम चेक कराने का प्रस्ताव रखा, तो एफएसआई ने सहमति तो जता दी, लेकिन संयुक्त टीम के लिए कोई अधिकारी नामित नहीं किया। इसके बाद फिर से भंडारण निगम ने प्रयास किया तब एफसीआई अफसरों ने कह दिया कि उन्होंने गोदाम चेक करा लिए हैं।
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घटिया चावल सप्लाई मामले की अनदेखी होते देख मंगलवार दोपहर एसडब्लूसी अधिकारी खुद रसोईया गोदाम पहुंच गए। वहां से एफसीआई गोदाम प्रबंधक को फोन किया लेकिन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद क्षेत्रीय प्रबंधक रविंद्र राजन ने अपनी टीम के साथ गोदाम का स्टॉक चेक किया और बदायूं जिले में स्थित गोदामों में भंडारित चावल की क्वालिटी देखी।
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भारतीय खाद्य निगम ने खपा दिया घटिया चावल
एफसीआई ने घटिया चावल का पुराना स्टाक फ्री योजना में खपा दिया है, क्योंकि मंगलवार दोपहर गोदाम चेक करने गई टीम को एफसीआई गोदामों पर स्टॉक नहीं मिला। बताया जाता है कि एफसीआई के गोदामों में भंडारित पुराना घटिया चावल 40 फीसदी टूटा हुआ था। इस स्टाक को खाद्यान्न वितरण एजेंसियां लेने से मना कर रहीं थीं। लिहाजा उसे लॉक डाउन में मौका मिलते ही खपा दिया गया। गोदामों से सबूत नष्ट करने के लिए नमूने भी बदल दिए गए हैं। इसकी सही जानकारी देने से एफसीआई अफसर बच रहे हैं लेकिन एसडब्लूसी टीम का निरीक्षण कुछ गुल खिला सकता है। मामला जिले के प्रभारी मंत्री तक पहुंचा तो उन्होंने नाराजी जताई और जांच करने का कहा, इससे महकमे में खलबली मची हुई है।