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रिसर्च: रेमेडेसिविर न क्लोरोक्वीन इम्युनिटी ही देगी कोरोना को मात

Sun, 18 Oct 2020 01:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 01:23 AM IST
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Research: Remedicivir nor chloroquine immunity will beat Corona
prayagraj news : Corona News prayagraj - फोटो : prayagraj

डब्ल्यूएचओ के दावे के बाद विशेषज्ञों में शुरू हुई बहस
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अब तक कारगर बताई जा रही दवाओं को बताया बेकार

बरेली। कोरोना के इलाज में प्रभावी मानी जा रही कई दवाओं और इंजेक्शन को डब्ल्यूएचओ ने बेअसर बताया है। इसे लेकर डॉक्टरों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। उनके मुताबिक कोरोना की कोई वैक्सीन न होने की वजह से जिस दवा से दो चार मरीज ठीक हो रहे थे, उसी को कारगर मानकर इस्तेमाल किया जा रहा था। मगर, हकीकत में संक्रमितों की इम्युनिटी ही उन्हें कोरोना के चंगुल सेनिकाल रही थी।
शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ ने 30 देशों के 405 अस्पतालों में 11,266 मरीजों पर किए गए परीक्षण के नतीजे सार्वजनिक किए। इनमें पाया गया कि रेमडेसिविर, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन, लोपिनवीर, इंटरफेरॉन देने के बाद भी संक्रमितों की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। रिकवरी का औसत उन संक्रमितों के बराबर ही था, जिन्हें ये दवाएं नहीं दी गईं थीं। इस आधार पर डब्ल्यूएचओ ने इन दवाओं को प्रभावी नहीं माना।
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इस संबंध में संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल का कहना है कि कोविड-19 वायरस पर कौन सी दवा कारगर होगी, इसे लेकर किसी को कोई जानकारी नहीं थी। महामारी बढ़ने पर जो संभव हो सका, उसका इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया। इसमें दवाओं के साथ ही, अन्य तरीके भी शामिल थे। इनमें सबसे कारगर तरीका दो गज की शारीरिक दूरी, मास्क और लगातार हाथ धोना रहा। इम्युनिटी मजबूत होने पर ही संक्रमित बचे। चेस्ट रोग के विशेषज्ञ डॉ. राजीव टंडन ने भी इस पर सहमति जताई है।
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रेमडेसिविर न देने से मौत होने का लगा था आरोप

जिले में बीते दिनों कोविड अस्पतालों पर रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने में लापरवाही से संक्रमितों की मौत होने के भी आरोप लगे थे। इस पर शासन ने निशुल्क उपलब्ध कराए गए इंजेक्शन न लगाने पर अस्पतालों के खिलाफ जांच के निर्देश दिए थे। अब जबकि डब्ल्यूएचओ ने इसे कारगर नहीं माना है तो चल रही जांचों को खारिज किए जाने की सुगबुगाहट है। हालांकि, अफसर बगैर शासन के दिशानिर्देश के कुछ कहने से इनकार कर रहे हैं।

खप चुके लाखों के इंजेक्शन और दवाएं

महानगर बरेली केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी के मुताबिक रेमडेसिविर जिले में मौजूद नहीं था। शासन ने भी इसका स्टॉक करने पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। शुरुआत में ये दिल्ली से मंगाकर जरूरतमंदों को अस्पताल ने मुहैया कराए। इसके लिए मनमाने दाम भी वसूले गए। इसके अलावा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन भी बाजार से गायब हो चुकी है। इसका खामियाजा जनता ने साइड इफेक्ट का सामना कर उठाया।
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