फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   rape

पूरे गांव के लिए कलंक है निर्भया वाला दरिंदा

Tue, 17 Dec 2019 02:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2019 02:45 AM IST
विज्ञापन
rape
निर्भया कांड का जब-जब जिक्र होगा, तब-तब लोग उस दरिंदे को याद करेंगे, जिसने बिटिया के साथ सबसे ज्यादा बेरहम सुलूक किया। भले ही वह उस वक्त नाबालिग था। आज वह जहां भी होगा लगभग 24 साल का हो गया होगा। गांव वालों को भी नही पता कि वह अब कहां है। लेकिन लोग गांव के लिए उसे कलंक मानते हैं। ये अलग बात है कि वक्त की धूल उनके गुस्से पर जम गई है। लेकिन घटना का जिक्र छिड़ते ही आज भी वह शर्मिंदगी महसूस करने लगते हैं। कहते हैं उसने जो किया। वह गलत किया। अब हम उससे कोई मतलब नहीं रखना चाहते।
विज्ञापन

मां बोली- आठ साल का था, जब घर से निकला, इसके बाद तो पुलिस उसे ढूंढते हुए आई
इस्लामनगर। रविवार को दरिंदे की मां घर के बाहर शॉल ओढ़कर चारपाई पर लेटी थी। उसके बारे में पूछा तो बोली पता नहीं कहां है। जब से गया है, तब से आज तक बात नहीं हुई। न ही उसका चेहरा देखा है। उन्होंने बताया कि लगभग आठ साल का रहा होगा, जब गांव के ही कुछ लोग दिल्ली में नौकरी कराने के लिए ले गए थे। तीन चार महीने तक उसने घर पर पैसा भी भेजा। लेकिन उसके बाद पैसा भेजना बंद कर दिया। उसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला। जब पुलिस घर आई तो पता चला कि उसने क्या किया है।
विज्ञापन

निर्भयाकांड के दोषी के घर आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। पिता मानसिक मंदित हैं। घर में मां के अलावा दो छोटी बहनें और तीन भाई हैं। भाइयों की उम्र 15 साल, 13 साल व 11 साल है। दोषी को कुछ सालों तक बाल सुधार गृह में रखने के बाद दिसंबर-16 में रिहा कर दिया गया था। मां का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम कि वह कहां है। बताया जाता है कि उसे किसी एनजीओ को दे दिया गया। हालांकि कुछ गांव वालों के मुताबिक उन्होंने पिछली ईद पर उसे घर में देखा था। एक ग्रामीण ने बताया कि ईद पर उधर से निकलते समय कुछ बच्चों ने शोर मचा दिया था कि लड़का आया है, तो उनकी नजर उस पर पड़ी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

गांव में बमुश्किल लोग 20 हैं हाईस्कूल-इंटर पास
इस्लामनगर। दोषी के गांव में शिक्षा के लिए केवल एक ही प्राथमिक विद्यालय है। यहां के बच्चे केवल कक्षा पांच तक ही पढ़ पाते हैं। इससे आगे की शिक्षा लेने के लिए उन्हें पास ही के गांव में स्थित जूनियर हाई स्कूल तथा उससे आगे पढ़ने के लिए पांच किमी दूर इस्लामनगर जाना पढ़ता है। यही वजह है कि लगभग तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में मुश्किल से 15-20 लोग ही ऐसे होंगे, जिन्होंने हाईस्कूल या इंटर तक की शिक्षा प्राप्त की हो। अशिक्षा का यही जहर शायद दोषी के अंदर भरा था, जिसके कारण उसने ऐसी जघन्य वारदात को अंजाम दे डाला।
कक्षा तीन तक पढ़ा था दोषी
निर्भया कांड का दोषी गांव के प्राथमिक विद्यालय में केवल कक्षा तीन तक पढ़ा था। स्कूल के एसआर रजिस्टर में उसका नाम क्रमांक 435 पर दर्ज है। रिकॉर्ड के मुताबिक उसने 19 जुलाई 2002 को कक्षा एक में दाखिला लिया था। इसके बाद 12 मई 2003 को कक्षा दो में तथा 11 मई 2005 में कक्षा तीन में उसका दाखिला हुआ। स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार वह चार जून 1995 को पैदा हुआ था। स्कूूल रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि के कारण ही उसे नाबालिग होने का लाभ मिल गया।
बचपन में ही उसे देखा था, अब तो ठीक से पहचाना भी नहीं जाएगा। उसने जो किया वह गलत था, लेकिन अब गांव वालों को उससे मतलब नहीं है। वह आए तो ठीक और न आए तो ठीक।
गांव वालों को उस कांड की आज तक याद है, लेकिन उससे कोई मतलब नहीं। वह आए या न आए, इससे हम पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
सजा देने का हक हम लोगों को नहीं है। उसने जो किया, उसकी सजा उसे मिल गई है। अब वह गांव में आकर रहे या कहीं और रहे। इससे किसी को मतलब नहीं है।
शुरू में गांव वालों में गुस्सा था, लेकिन अब सब अपने अपने काम में लग गए हैं। उसका पता नहीं है कि वह कहां है, लेकिन वह जहां भी रहे, हमें कुछ लेना देना नहीं है।
पूर्व प्रधानाध्यापक बोले- उसे तो होनी चाहिए थी फांसी
जिस स्कूल में दुष्कर्मी पढ़ा था, उसका दाखिला करने वाले प्रधानाध्यापक तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन 2012 में होने वाले इस कांड के समय के प्रधानाध्यापक साफ कहते हैं कि उसे तो फांसी की सजा होनी चाहिए थी। जब ये कांड हुआ था तो दो बार दिल्ली जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट में वह बयान देने एसआर रजिस्टर लेकर गए थे। पुलिस ने बसंत विहार थाने में उसके बारे में बताया था तो उनका खून खौल उठा था। अव वह भी 2013 में रिटायर हो गए ।

गांव के कुछ लोग नहीं चाहते कि दोषी गांव आए, क्योंकि उसकी वजह से पूरा गांव बदनाम हो गया। कुछ लोग चाहते हैं कि हो सकता है कि वह सुधर गया हो। इसलिए उसे यहां आकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करनी चाहिए। हालांकि गांव वालों का नजरिया उसके प्रति अच्छा नहीं है। आखिर उसने इतना बड़ा अपराध जो किया है। लेकिन हां अब गांव में अब शांति है।
प्रधानपति
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed