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गृह क्लेश मेें उजड़ गई गरीबी से जूझते परिवार की गृहस्थी
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बरेली/भुता। बेहद गरीबी से जूझ रहे बंटू के परिवार को गृह क्लेश ने उजाड़ दिया। शराब की लत की वजह से मेहनत-मजदूरी करने के बावजूद परिवार चलाने में मुश्किल होती थी। अक्सर इसी पर परिवार में झगड़ा होता था और जयंती घर छोड़कर चली जाती थी। बुधवार को भी ऐसा ही हुआ था लेकिन इस बार झगड़ा इस हद तक बढ़ गया कि पूरा परिवार ही उजड़ गया।
बंटू के पिता छेदा लाल ने बताया कि पहले उनके पास 68 बीघा जमीन थी। मगर धीरे-धीरे सारी जमीन बिक गई। अब पांच बीघा जमीन बची है। दो-दो बीघा दोनों बेटों के पास और एक बीघा पत्नी के पास। पत्नी से नहीं बनी तो वह भी बंटू के पास आकर रहने लगे मगर यहां जयंती से भी उनकी नहीं बनी। मजबूरन उन्होंने अपना अलग चूल्हा रख लिया। बंटू और जयंती में भी नहीं बनती थी। बंटू मेहनत-मजदूरी करता था लेकिन शराब भी पी लेता था। इस पर भड़ककर जयंती बच्चों को लेकर घर से चली जाती थी और रात-रात भर नहीं लौटती थी।
कई बार दोनों में झगड़ा होने के बाद मारपीट तक हो जाती थी। बंटू बच्चों को बहुत प्यार करता था लेकिन जयंती उन्हें पीटती थी। छेदालाल ने बताया कि बंटू ने अपने हिस्से का पुराना मकान बेचकर गांव के बाहर आगे पीछे दो कमरों का घर बनाया लेकिन न घर की बाउंड्री है और न दरवाजा। घर में सामान के नाम पर टूटी-फूटी दो चारपाई, एक बक्सा और कुछ बर्तन हैं। जैसे-तैसे उसकी गृहस्थी चल रही थी मगर जयंती ने उनके परिवार को बर्बाद कर दिया।
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बंटू के पिता छेदा लाल ने बताया कि पहले उनके पास 68 बीघा जमीन थी। मगर धीरे-धीरे सारी जमीन बिक गई। अब पांच बीघा जमीन बची है। दो-दो बीघा दोनों बेटों के पास और एक बीघा पत्नी के पास। पत्नी से नहीं बनी तो वह भी बंटू के पास आकर रहने लगे मगर यहां जयंती से भी उनकी नहीं बनी। मजबूरन उन्होंने अपना अलग चूल्हा रख लिया। बंटू और जयंती में भी नहीं बनती थी। बंटू मेहनत-मजदूरी करता था लेकिन शराब भी पी लेता था। इस पर भड़ककर जयंती बच्चों को लेकर घर से चली जाती थी और रात-रात भर नहीं लौटती थी।
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कई बार दोनों में झगड़ा होने के बाद मारपीट तक हो जाती थी। बंटू बच्चों को बहुत प्यार करता था लेकिन जयंती उन्हें पीटती थी। छेदालाल ने बताया कि बंटू ने अपने हिस्से का पुराना मकान बेचकर गांव के बाहर आगे पीछे दो कमरों का घर बनाया लेकिन न घर की बाउंड्री है और न दरवाजा। घर में सामान के नाम पर टूटी-फूटी दो चारपाई, एक बक्सा और कुछ बर्तन हैं। जैसे-तैसे उसकी गृहस्थी चल रही थी मगर जयंती ने उनके परिवार को बर्बाद कर दिया।
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