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भागवत ने कहाः धर्म के आधार पर नहीं, भारतवासी होने के नाते सभी को मानते हैं हिंदू..

Mon, 20 Jan 2020 02:19 AM IST
बरेली ब्यूरो अनूप शर्मा, बरेली
अनूप शर्मा, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Mon, 20 Jan 2020 02:19 AM IST
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'Not on the basis of religion, Hindus believe everyone as being an Indian ...'
भागवत - फोटो : अमर उजाला

सीएए और एनपीआर के खिलाफ देश भर में गरमाए माहौल के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मुसलमानों समेत सभी पंथ-संप्रदायों के साथ भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की संकल्पना प्रस्तुत की। उन्होंने यह भी साफ किया कि संघ जाति-धर्म, भाषा और प्रांत के आधार पर कोई भेदभाव किए बगैर उन सभी को हिंदू मानता है जो भारत में रह रहे हैं और जिनके पूर्वज हिंदू थे।

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'Not on the basis of religion, Hindus believe everyone as being an Indian ...'
ध्यानमग्न होकर व्याख्यान सुनते संतोष गंगवार। - फोटो : अमर उजाला, बरेली
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के स्टेडियम में ‘भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ पर व्याख्यान देते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि 1857 में स्वतंत्रता आंदोलन शुरू होने के बाद अनेक महापुरुषों ने भविष्य के ऐसे ही भारत की कल्पना की थी। शब्दों का फर्क जरूर हो सकता है लेकिन संघ की कल्पना उससे रत्ती भर भी अलग नहीं है। देश के संविधान में भी यही भावना है। संघ प्रमुख ने भारत के संदर्भ में अनेकता में एकता के सिद्धांत से अलग एकता की विविधता का तर्क देते हुए कहा कि देश की इसी संस्कृति का नाम हिंदू है जिसे अनेक पंथों के साथ आस्तिक-नास्तिक सभी लोगों ने अपनाया है। भारत न सिर्फ एक नाम है न जमीन का टुकड़ा है। भारत एक प्रवृत्ति और स्वभाव है जो बदलता है तो पाकिस्तान बन जाता है।
सरसंघचालक ने कहा कि संघ की शाखाओं में सभी पूजा पद्धतियों के लोग आते हैं। इनमें मुसलमान भी हैं। संघ उन्हें भी हिंदू मानता है और कभी इसका ढिंढोरा नहीं पीटता। अगर कोई कहता है कि वह हिंदू नहीं है तब भी संघ की सद्भावना उसके प्रति रहती है क्योंकि संघ को शब्दों से
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मोहन भागवत का व्याख्यान सुनते लोग। - फोटो : अमर उजाला, बरेली
कोई विरोध नहीं है। संघ सिर्फ अपनत्व सिखाता है और अपनत्व के एक सूत्र में संपूर्ण भारतवर्ष को बांधना ही संघ का लक्ष्य है। यह होने के बाद संघ को कुछ और नहीं करना है।
संघ प्रमुख ने कहा कि संघ के खिलाफ वहम पैदा किया जाता है। वहम पैदा करने वाले जो लोग हैं, उनके इतिहास और वर्तमान का भी अध्ययन हो पता चल जाएगा कि उनका भविष्य क्या है। असल में संघ किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता। विरोध सत्य पर आधारित होना चाहिए। संघ ऐसे विरोध का स्वागत करता है।
 
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मोहन भागवत का व्याख्यान सुनते लोग। - फोटो : अमर उजाला, बरेली

दो बच्चों का कानून नहीं, जनसंख्या नियंत्रण के लिए नीति बनाने की बात कही थी

संघ प्रमुख ने कहा कि हाल ही में यह मुद्दा खूब गूंजा था कि उन्होंने देश में दो बच्चों का कानून लाने की बात कही है जबकि उन्होंने ऐसा कुछ कहा ही नहीं था। उन्होंने किसी संदर्भ में इसके बजाय यह कहा था कि जनसंख्या एक समस्या है और एक साधन भी बन सकती है। इस पर विचार करके एक नीति बननी चाहिए और उसे लागू करने से पहले सबका मन भी उसी के अनुरूप बनाना चाहिए क्योंकि इसके बाद उसे लागू करने में कठिनाई नहीं आएगी।
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