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जाम देखा तो स्कूटी से शहर घूमे परिवहन मंत्री
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बरेली। बरेली से ही अपनी राजनीतिक कैरियर शुरू करने वाले परिवहन मंत्री अशोक कटारिया शनिवार सुबह यहां विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने पहुंचे तो विद्यार्थी परिषद का कार्यालय और पुराने दोस्त भी याद आ गए। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद वह शहर के जाने-पहचाने इलाकों में खुद को घूमने से नहीं रोक पाए। मगर शाम को जैसे ही भ्रमण के लिए निकले और उनका काफिला पंजाबी बाजार में कुमार सिनेमा तक पहुंचा कि जाम उनके आड़े आ गया। आगे काफिले के साथ निकलना मुमकिन न देखकर उन्होंने एक करीबी को बुलाया और उसके पीछे स्कूटी पर बैठकर शहर में घूमकर पुरानी यादें ताजा कीं।
परिवहन मंत्री अशोक कटारिया को भी शनिवार शाम शहर के जाम का झाम झेलना पड़ा। उन्हें उम्मीद थी कि स्मार्ट सिटी में चयन होने के बाद बरेली शहर बदल गया होगा लेकिन शहरी में भ्रमण के लिए निकलते ही अतिक्रमण, बेतरतीब ट्रैफिक और जाम जैसे हालात ने उन्हें जगह-जगह रोकना शुरू कर दिया। कई जगह जाम में फंसने के बाद उन्होंने कुमार सिनेमा से पहले ही काफिला छोड़ दिया और एक मित्र के साथ स्कूटी पर बैठकर आरआरएस और विद्यार्थी परिषद कार्यालय पहुंचे। कुतुबखाना चौराहा पर जाम में फंस गए तो कुछ परिचितों ने पहचान लिया, स्कूटी पर बैठे परिवहन मंत्री को देखकर वे चौंकें। कुछ खास दोस्तों से मिले और चाय की चुस्कियों के बीच पुरानी यादें ताजा की। इस दौरान उन्हें स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कारोबार आदि मुद्दों पर चर्चा कर मौजूदा स्थिति अपटेड की।
कुलपति के साथ भोजन किया, चतुर्थ श्रेणी कर्मी के घर पी चाय
विश्वविद्यालय कार्यक्रम में पहुंचे परिवहन मंत्री कटारिया ने हॉस्टल कर्मचारी वीरेंद्र को देखते ही गले लगा लिया। उन्होंने बताया कि यह कर्मी हॉस्टल में खाना बनाकर खिलाता था। इससे पहले उन्होंने कुलपति के साथ भोजन किया और पुराने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से मिलने घर पहुंच गए। मंत्री ने एक छोटे कर्मचारी के परिवार के साथ चाय पी और पुराने संस्मरण भी सुनाए।
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परिवहन मंत्री अशोक कटारिया को भी शनिवार शाम शहर के जाम का झाम झेलना पड़ा। उन्हें उम्मीद थी कि स्मार्ट सिटी में चयन होने के बाद बरेली शहर बदल गया होगा लेकिन शहरी में भ्रमण के लिए निकलते ही अतिक्रमण, बेतरतीब ट्रैफिक और जाम जैसे हालात ने उन्हें जगह-जगह रोकना शुरू कर दिया। कई जगह जाम में फंसने के बाद उन्होंने कुमार सिनेमा से पहले ही काफिला छोड़ दिया और एक मित्र के साथ स्कूटी पर बैठकर आरआरएस और विद्यार्थी परिषद कार्यालय पहुंचे। कुतुबखाना चौराहा पर जाम में फंस गए तो कुछ परिचितों ने पहचान लिया, स्कूटी पर बैठे परिवहन मंत्री को देखकर वे चौंकें। कुछ खास दोस्तों से मिले और चाय की चुस्कियों के बीच पुरानी यादें ताजा की। इस दौरान उन्हें स्थानीय राजनीति, प्रशासन, कारोबार आदि मुद्दों पर चर्चा कर मौजूदा स्थिति अपटेड की।
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कुलपति के साथ भोजन किया, चतुर्थ श्रेणी कर्मी के घर पी चाय
विश्वविद्यालय कार्यक्रम में पहुंचे परिवहन मंत्री कटारिया ने हॉस्टल कर्मचारी वीरेंद्र को देखते ही गले लगा लिया। उन्होंने बताया कि यह कर्मी हॉस्टल में खाना बनाकर खिलाता था। इससे पहले उन्होंने कुलपति के साथ भोजन किया और पुराने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से मिलने घर पहुंच गए। मंत्री ने एक छोटे कर्मचारी के परिवार के साथ चाय पी और पुराने संस्मरण भी सुनाए।
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