UP: खौफ के साये में गुजरे दिन... खरीद लिया था कफन; ईरान से बरेली लौटे जायरीनों ने बताए वहां के हालात
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ईरान से सोमवार बरेली लौटे जायरीन ने वहां फैली बारूद की गंध से अपनी माटी की सुगंध को बेहतर बताया। उन्होंने बताया कि सिर के ऊपर उड़ती मिसाइलें, धमाके और धुएं का गुबार दिल में खौफ पैदा कर रहा था। एयरपोर्ट बंद थे। मायूसी के बीच भारतीय दूतावास ने उनको कोम से मशद पहुंचाया। तब जाकर तसल्ली मिली। वहां बेहतर सुविधाओं वाले पांच सितारा होटल में ठहराया गया, पर दिल में वतन वापसी को लेकर बेचैनी थी। ऊपर वाले का शुक्र है कि हम सकुशल अपनी मिट्टी पर कदम रख सके। फिलहाल, शहर के कुछ लोग दिल्ली में ही रुके हुए हैं।
खरीदकर रख लिया था कफन
कंघी टोला की नजमा बेगम ने कहा कि ईरान में आखिरी चार दिन दहशत के साये में गुजरे। मिसाइलें उड़ती देखकर दिल बैठ जाता था। फिर यह तय कर लिया था कि अगर यहीं जिंदगी का खात्मा हुआ तो शहादत मिल जाएगी। कफन भी खरीदकर रख लिया था। ईरान का माहौल काफी जज्बाती है।
मीरा की पैठ रुखसार नकवी ने कहा कि अचानक फ्लाइट कैंसिल होने की खबर ने परेशानी बढ़ा दी थी। बस दुआ कर रहे थे कि किसी तरह वतन वापसी का इंतजाम हो जाए। कोम से मशद आए। वहां दिन ढलने के बाद बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी। वतन लौटकर सुकून का एहसास हो रहा है।
जायरीन को ज्यादा परेशानी नहीं हुई
किला की मुजीब जहरा ने कहा कि जायरीन को ज्यादा परेशानी नहीं हुई, मगर सब घबरा गए थे। भारतीय दूतावास के मीसम रजा और ईरान के मौलाना हैदर ने हमारी बहुत मदद की। दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर लोगों ने तिरंगा देकर स्वागत किया तो बहुत अच्छा लगा। भारत और ईरान दोनों सरकारों का शुक्रिया।
किला छवनी के हसन जाफर ने कहा कि उड़ती मिसाइलों और धमाके की आवाजों के बीच सभी सकुशल वतन वापसी की दुआ कर रहे थे। हालत यह था कि मशद एयरपोर्ट आने तक मोबाइल फोन तक बंद करा दिए गए थे। इसके ठीक विपरीत ईरान के लोगों में कोई खौफ नहीं था। वह उड़ती मिसाइलों का वीडियो बना रहे थे।