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Bareilly News: सहसवान घराने की सरगम, कदम के साथ थिरकते हैं पद्म

Wed, 21 Jun 2023 03:05 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Wed, 21 Jun 2023 03:05 AM IST
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Padma dances with the gamut of Sahaswan Gharana
बरेली। संगीत की दुनिया में सहसवान घराने की सरगम सबसे जुदा है। शास्त्रीय संगीत की दुनिया में बदायूं का सहसवान घराना 200 साल से देश-दुनिया में अपने सुरों की खनक बिखेर रहा है। इस घराने के संगीतकारों को अब तक आठ पद्म पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। पिछले साल ही राष्ट्रपति ने उस्ताद राशिद खान को पद्मभूषण से सम्मानित किया था।
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रामपुर के नवाब समेत देश की बड़ी रियासतों में सहसवान के संगीतकारों की महफिल सजती थी। पद्मभूषण उस्ताद निसार हुसैन खान के नाती दानिश हुसैन बदायूंनी बताते हैं कि उस्ताद इनायत हुसैन खां को रामपुर-सहसवान घराने का संस्थापक माना जाता है। वह रामपुर नवाब के यहां संगीतकार थे। वहां से वह नेपाल चले गए। वहां वह राजगायक रहे।
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उनके भाई उस्ताद हैदर हुसैन खां ने अपने शागिर्द पद्मभूषण उस्ताद मुशताक हुसैन खां की जिम्मेदारी इनायत हुसैन खां को दी। उनसे तालीम हासिल कर 1957 में उस्ताद मुशताक हुसैन खां ने पद्मभूषण प्राप्त किया। उस्ताद हैदर के पोते उस्ताद निसार हुसैन खां ने 1971 में घराने को दूसरा पद्मभूषण दिया। उनके शार्गिदों ने कई फिल्मी गीतों को भी अपनी आवाज दी।
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1991 में उस्ताद निसार के शागिर्द उस्ताद गुलाम मुस्तफा खां को पद्मश्री मिला। उन्हें 2006 में पद्मभूषण और 2018 में पद्म विभूषण पुरस्कार से नवाजा गया। उस्ताद निसार के दामाद उस्ताद हफीज अहमद खां को 1991 में पद्मश्री मिला। वह ऑल इंडिया रेडियो के डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर भी रह चुके हैं। 2005 में उस्ताद गुलाम सादिक खां को पद्मश्री मिला।
राशिद खां को मिला 2022 में पद्मभूषण
राजभवन में होने वाले कार्यक्रम में सहयोग करने वाले उस्ताद दानिश हुसैन बदायूंनी ने बताया कि बॉलीवुड की प्रचलित फिल्म जब वी मेट, माय नेम इज खान के गानों में अपनी आवाज देने वाले उस्ताद राशिद खां को 2006 में पद्मश्री दिया गया था। पिछले साल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया। इससे अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि सहसवान घराने का शास्त्रीय संगीत कितना पुराना और समृद्ध है।

देश-विदेश में नाम रोशन कर रहे सहसवान घराने के लोग
सहसवान घराने के उस्ताद मुश्ताक हुसैन के परिजन हांगकांग में बस गए हैं और वहां लोगों को संगीत की शिक्षा दे रहे हैं। उस्ताद राशिद खां कोलकाता रहते हैं। उस्ताद गुलाम मुस्तफा खां का परिवार मुंबई में संगीत के क्षेत्र में ही काम कर रहा है। उस्ताद निसार हुसैन खां के परिजन दिल्ली व बदायूं में हैं। बदायूं में उनके नाती उस्ताद दानिश हुसैन खां घराने का दबदबा बनाए हुए हैं। घराने में सितार वादक के तौर पर केवल महबूब खां का नाम लिया जाता है। इफ्तिखार हुसैन के बेटे मुजतबा हसन ने सितार वादन में नाम कमाया है।
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