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लेखपाल बोले-मांगें पूरी होने तक रहेगी हड़ताल, हम जेल भी जाने को तैयार
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पीलीभीत। लंबित मांगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर जिले भर के लेखपाल 12वें दिन भी हड़ताल पर रहे। हड़ताल लंबी खिंचने के चलते आम लोगों की राजस्व से जुड़ी समस्याओं का शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
सदर तहसील में जिले भर के लेखपाल मंगलवार को भी इकट्ठा हुए। यहां उन्होंने मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर धरना दिया। लेखपालों ने कहा कि जैसे-जैसे लेखपालों पर कार्रवाईयां की जा रही है, वैसे-वैसे ही लेखपालों में उबाल आ रहा है। लेखपाल निडर होकर अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं और यह धरना तब तक चलता रहेगा, जबकि मांगें पूरी नहीं हो जाती। जिलाध्यक्ष अशोक गंगवार ने कहा कि प्रशासन द्वारा अधिकतम कार्रवाइयां की जा चुकी हैं, अब जेल भी जाना पड़ा तो जेल में भी आंदोलन करेंगे। धरना देने वालों में जितेंद्र कुमार, रुपेश कुमार, नूर अफरोज, मुकेश चंद्र सैनी, हरीराम, रामकुमार राना, पुनीत यादव, विशाल राठौर समेत कई लेखपाल शामिल रहे।
पूरनपुर। लेखपालों की हड़ताल से अब आम लोग परेशान होने लगे हैं। आय 687, जाति के 322 और निवास 353 प्रमाण पत्रों के आवेदन लंबित पड़े हैं। प्रमाण पत्र न बनने से लोग तहसील मुख्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। यही नहीं भूमि संबंधी विवादों का निस्तारण भी नहीं हो रहा है। जमीन के मुकदमों में लेखपालों के बयान न होने से लोग परेशान हैं।
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भूमि संबंधी विवादों का निपटारा कराने में लेखपाल की अहम भूमिका होती है। इसके अलावा खसरा, भूमि संबंधी विवाद पर लेखपाल के बयान दर्ज होते है। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र बनवाने को वैसे तो ऑनलाइन आवेदन करना होता है, लेकिन इन प्रमाण पत्रों के आवेदन पर जांच के बाद हल्का लेखपाल की सबसे पहले रिपोर्ट लगती है। इसके बाद राजस्व निरीक्षक और बाद में तहसीलदार, एसडीएम की ओर से प्रमाण पत्र जारी होते है। लेखपाल दस दिसंबर से हड़ताल पर है। ऐसे में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे है। भूमि संबंधी विवादों को लेकर लोगों को अफसरों के चक्कर लगाने पड़ रहे है। इसके अलावा अन्य विभागीय कार्य प्रभावित है। लेखपालों की हड़ताल कब खत्म होगी और कब प्रमाण पत्र जारी होंगे आदि को लेकर लोगों में रोष है। तहसीलदार आशुतोष कुमार ने बताया कि लेखपालों की हड़ताल से समस्या बनी हुई है। लेखपालों ने निर्देश के बाद अब तक अभिलेख भी जमा नहीं किए हैं। इसको लेकर लेखपालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है, ताकि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाई जा सके।
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सदर तहसील में जिले भर के लेखपाल मंगलवार को भी इकट्ठा हुए। यहां उन्होंने मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर धरना दिया। लेखपालों ने कहा कि जैसे-जैसे लेखपालों पर कार्रवाईयां की जा रही है, वैसे-वैसे ही लेखपालों में उबाल आ रहा है। लेखपाल निडर होकर अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं और यह धरना तब तक चलता रहेगा, जबकि मांगें पूरी नहीं हो जाती। जिलाध्यक्ष अशोक गंगवार ने कहा कि प्रशासन द्वारा अधिकतम कार्रवाइयां की जा चुकी हैं, अब जेल भी जाना पड़ा तो जेल में भी आंदोलन करेंगे। धरना देने वालों में जितेंद्र कुमार, रुपेश कुमार, नूर अफरोज, मुकेश चंद्र सैनी, हरीराम, रामकुमार राना, पुनीत यादव, विशाल राठौर समेत कई लेखपाल शामिल रहे।
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पूरनपुर। लेखपालों की हड़ताल से अब आम लोग परेशान होने लगे हैं। आय 687, जाति के 322 और निवास 353 प्रमाण पत्रों के आवेदन लंबित पड़े हैं। प्रमाण पत्र न बनने से लोग तहसील मुख्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। यही नहीं भूमि संबंधी विवादों का निस्तारण भी नहीं हो रहा है। जमीन के मुकदमों में लेखपालों के बयान न होने से लोग परेशान हैं।
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भूमि संबंधी विवादों का निपटारा कराने में लेखपाल की अहम भूमिका होती है। इसके अलावा खसरा, भूमि संबंधी विवाद पर लेखपाल के बयान दर्ज होते है। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र बनवाने को वैसे तो ऑनलाइन आवेदन करना होता है, लेकिन इन प्रमाण पत्रों के आवेदन पर जांच के बाद हल्का लेखपाल की सबसे पहले रिपोर्ट लगती है। इसके बाद राजस्व निरीक्षक और बाद में तहसीलदार, एसडीएम की ओर से प्रमाण पत्र जारी होते है। लेखपाल दस दिसंबर से हड़ताल पर है। ऐसे में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे है। भूमि संबंधी विवादों को लेकर लोगों को अफसरों के चक्कर लगाने पड़ रहे है। इसके अलावा अन्य विभागीय कार्य प्रभावित है। लेखपालों की हड़ताल कब खत्म होगी और कब प्रमाण पत्र जारी होंगे आदि को लेकर लोगों में रोष है। तहसीलदार आशुतोष कुमार ने बताया कि लेखपालों की हड़ताल से समस्या बनी हुई है। लेखपालों ने निर्देश के बाद अब तक अभिलेख भी जमा नहीं किए हैं। इसको लेकर लेखपालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है, ताकि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाई जा सके।