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डेढ़ सौ प्रधानों के फर्जीवाड़े की कुंडली तैयार.. होगी जांच
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जिला पंचायतराज विभाग ने तैयार की सूची, डीएम को भेजी जाएगी
बरेली। गांवों में विकास के लिए जारी बजट का दुरुपयोग कर चहेतों की जेब गर्म करने वाले करीब डेढ़ सौ ग्राम प्रधानों की सूची तैयार कर ली गई है। जिला पंचायत राज विभाग ने करीब माह भर तक चली लंबी कसरत के बाद ग्राम प्रधानों की कुंडली तैयार की है। अब इसे डीएम को सौंपकर संबंधित प्रधानों के खिलाफ जांच की संस्तुति की जाएगी।
डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक, साल भर से प्रधानों के खिलाफ शिकायतें पहुंच रहीं थीं, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते जांच नहीं हो पा रही थी। छह माह पहले भ्रष्टाचार निवारण समिति ने विभाग के एक बाबू को प्रधानों के खिलाफ होने वाली जांच को प्रभावित करने करने के लिए रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। मामले का खुलासा होने के बाद गिरफ्तार बाबू का पटल लंबे समय तक खाली पड़ा रहा। करीब डेढ़ माह पहले डीएम ने प्रधानों के खिलाफ लंबित जांच की फाइलों पर आगे की कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इस पर फाइलें निकालीं गई और सूची तैयार कराई गई है। इसमें करीब डेढ़ सौ प्रधान की रिपोर्ट तैयार हुई है। इन सभी की जांच के लिए डीएम को लिस्ट दी जाएगी। बताया जाता है कि प्रधानों पर घटिया निर्माण कराना, रिश्तेदारों की फर्म के नाम से फर्जी बिल बाउचर बनाना, तालाब सौंदर्यीकरण, पौधरोपण समेत अन्य कार्यों में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं।
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बरेली। गांवों में विकास के लिए जारी बजट का दुरुपयोग कर चहेतों की जेब गर्म करने वाले करीब डेढ़ सौ ग्राम प्रधानों की सूची तैयार कर ली गई है। जिला पंचायत राज विभाग ने करीब माह भर तक चली लंबी कसरत के बाद ग्राम प्रधानों की कुंडली तैयार की है। अब इसे डीएम को सौंपकर संबंधित प्रधानों के खिलाफ जांच की संस्तुति की जाएगी।
डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक, साल भर से प्रधानों के खिलाफ शिकायतें पहुंच रहीं थीं, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते जांच नहीं हो पा रही थी। छह माह पहले भ्रष्टाचार निवारण समिति ने विभाग के एक बाबू को प्रधानों के खिलाफ होने वाली जांच को प्रभावित करने करने के लिए रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। मामले का खुलासा होने के बाद गिरफ्तार बाबू का पटल लंबे समय तक खाली पड़ा रहा। करीब डेढ़ माह पहले डीएम ने प्रधानों के खिलाफ लंबित जांच की फाइलों पर आगे की कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इस पर फाइलें निकालीं गई और सूची तैयार कराई गई है। इसमें करीब डेढ़ सौ प्रधान की रिपोर्ट तैयार हुई है। इन सभी की जांच के लिए डीएम को लिस्ट दी जाएगी। बताया जाता है कि प्रधानों पर घटिया निर्माण कराना, रिश्तेदारों की फर्म के नाम से फर्जी बिल बाउचर बनाना, तालाब सौंदर्यीकरण, पौधरोपण समेत अन्य कार्यों में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं।
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