Bareilly: सड़क के लिए नगर निगम में ग्रामीणों का डेरा, ठंड से बच्ची की जान गई तब अफसर बोले- जल्द होगा निर्माण
नगर निगम क्षेत्र के गांव परसाखेड़ा गौटिया और गोकिलपुर में सड़क और बुनियादी सुविधाएं नहीं है। शुक्रवार सुबह 10 बजे ग्रामीण नगर निगम के बाहर मांगों को लेकर इकठ्ठा हुए और धरने पर बैठ गए। धरने में ग्रामीणों के साथ पुष्पा अपनी एक साल की बेटी विद्या और सास हीराकली के साथ धरने में शामिल होने आई थी।
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बरेली में नगर निगम के बाहर शुक्रवार से धरना दे रहे ग्रामीणों के साथ आई परसाखेड़ा गौटिया के हरिचंद्र की एक साल की बेटी विद्या की ठंड लगने से शनिवार को मौत हो गई। शुक्रवार रात ठंड लगने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी। पूरी रात इलाज नहीं मिल सका। सुबह उसे माता-पिता के साथ गांव भेजा गया। वहां दवाई दिलाई गई, लेकिन सही इलाज न मिलने के कारण दोपहर करीब एक बजे मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद 24 घंटे से चल रहा धरना नगर आयुक्त ने लिखित आश्वासन देकर समाप्त करा दिया।
परसाखेड़ा गौटिया के साथ ही गोकिलपुर के काफी लोग सड़क और बुनियादी सुविधाओं की मांगों को लेकर शुक्रवार सुबह दस बजे धरने पर बैठ गए थे। बेटी विद्या और सास हीराकली के साथ पुष्पा भी इसमें शामिल हुई थीं। पूर्व पार्षद सुखदीश कश्यप के अनुसार रात करीब नौ बजे ठंड से बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने इलाज के लिए राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार को फोन किया। कुछ देर बाद एक एम्बुलेंस आई और दो मिनट तक खड़े रहने के बाद चली गई। बच्ची को दूध पिलाया तो वह सो गई। सुबह करीब पांच बजे गांव ले जाने के बाद दोपहर उसकी मौत हो गई।
नगर आयुक्त ने ये कहा
नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने कहा कि ग्रामीण सड़क के लिए धरना दे रहे थे। उन्हें शुक्रवार को भी समझाया गया था, मगर वह लोग नहीं माने। शनिवार की शाम उन्हें समझाकर धरना खत्म करा दिया गया। ग्रामीणों को बताया गया है कि सड़क निर्माण का मामला नगर निगम में लंबित नहीं है। शासन में पत्र भेज दिया गया है।
महापौर उमेश गौतम ने कहा कि मेरे संज्ञान में नहीं है। ऐसा कुछ हुआ है तो इससे दुखद कुछ हो नहीं सकता है। जो भी लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, शासन को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
वन राज्यमंत्री ने कहा कि मेरे पास रात फोन आया कि बच्ची की तबीयत खराब है। मैंने कहा कि एंबुलेंस को फोन करो और यदि न आए तो मुझे बताना। उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया और एंबुलेंस आई भी। इसके बाद मेरे पास फोन नहीं आया तो मैंने समझा बच्ची को इलाज मिल गया होगा। मैंने खुद सुबह अपनी ओर से फोन कर हाल जानना चाहा तो बताया कि एंबुलेंस आई थी, मगर इलाज नहीं मिला तो मैंने कहा कि मुझे बताना चाहिए था, क्यों नहीं बताया। शाम को पता चला कि बच्ची की मौत हो गई। यह बहुत दुखद है।