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Bareilly News: दुश्मनों को निपटाने में खूब दिमाग लगाया, कानूनी शिकंजे में खुद फंसा महेंद्र
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बरेली। रामबेटी की हत्या में जेल भेजे गए बेटे महेंद्र ने दुश्मनों को ठिकाने लगाने के लिए काफी दिमाग लगाया, लेकिन खुद फंस गया। वह न तो विरोधियों की तरह पॉलिग्राफ टेस्ट कराने के लिए तैयार हुआ, न ही एसआईटी के सवालों के जवाब दे सका।
एसआईटी ने पड़ताल शुरू की तो नामजद आरोपी नत्थू की लोकेशन घटना के वक्त बरेली में मिली। नत्थू का भाई वीरेंद्र पूरी रात इफको कारखाने में रामबेटी के तीसरे बेटे के साथ ड्यूटी पर था। एसआईटी ने पीड़ित और आरोपी पक्ष के सामने पॉलिग्राफ टेस्ट का प्रस्ताव रखा तो आरोपी तैयार हो गए। उन्होंने टेस्ट करा भी लिया, जबकि महेंद्र ने इससे इन्कार कर दिया। तब पुलिस का शक पुख्ता हो गया।
यह थी असली रंजिश
महेंद्र के तहेरे भाई नत्थू के बेटे का राशन कोटा था। महेंद्र की शिकायत पर कोटा निरस्त हो गया। इसका बदला नत्थू ने महेंद्र के भतीजे आशीष को देसी राइफल के साथ पकड़वाकर ले लिया। इस पर दोनों पक्षों में मारपीट हुई। पुलिस ने नत्थू व महेंद्र का शांतिभंग में चालान कर दिया। झगड़े के दो दिन बाद गांव के अंदर बने घर से अपनी मां को महेंद्र बाहरी हिस्से में बने अपने घर ले आया। वहां से शाम को अपने बच्चों व भतीजों को पुराने घर पर भेज दिया। महेंद्र खुद ताला लगाकर रात 11 बजे पत्नी के साथ पुराने घर पर जाकर सो गया। उसके मुताबिक, रात आठ बजे खाना खाकर मां घर के बाहर पेड़ के नीचे सो गई थीं। सुबह पौने चार बजे वह गांव के बाहर वाले घर आया और मां की हत्या की सूचना पुलिस को दी। किसी को गोली मारकर तो किसी को चाकू से हत्या करने की सूचना दी। खुद के बजाय भाई गजेंद्र को वादी बनाया।
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पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट की लखनऊ तक हुई जांच
विवेचक संजय धीर ने पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट देखी तो पाया कि पेट में आधा पचा खाना था। उन्होंने राज्य मेडिकल बोर्ड से इसकी जांच कराई। वहां भोजन करने का वक्त हत्या से दो से चार घंटे पहले का निकला। चूंकि महेंद्र रात 11 बजे पुराने घर पर गया था तो ये पुष्ट हुआ कि वही हत्या करके चला गया और सुबह आकर शोर मचा दिया।
मां की हत्या से होने थे दो फायदे
इन सब बिंदुओं पर जब महेंद्र से पूछताछ की गई तो उसने कहा कि वह मां की हत्या कर नत्थू पक्ष को घेरना चाहता था। मां भी उसके बजाय दूसरे भाइयों को चाहती थी तो उसने सोचा कि इनके बाद संपत्ति व जेवर का भी बंटवारा हो जाएगा।
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एसआईटी ने पड़ताल शुरू की तो नामजद आरोपी नत्थू की लोकेशन घटना के वक्त बरेली में मिली। नत्थू का भाई वीरेंद्र पूरी रात इफको कारखाने में रामबेटी के तीसरे बेटे के साथ ड्यूटी पर था। एसआईटी ने पीड़ित और आरोपी पक्ष के सामने पॉलिग्राफ टेस्ट का प्रस्ताव रखा तो आरोपी तैयार हो गए। उन्होंने टेस्ट करा भी लिया, जबकि महेंद्र ने इससे इन्कार कर दिया। तब पुलिस का शक पुख्ता हो गया।
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यह थी असली रंजिश
महेंद्र के तहेरे भाई नत्थू के बेटे का राशन कोटा था। महेंद्र की शिकायत पर कोटा निरस्त हो गया। इसका बदला नत्थू ने महेंद्र के भतीजे आशीष को देसी राइफल के साथ पकड़वाकर ले लिया। इस पर दोनों पक्षों में मारपीट हुई। पुलिस ने नत्थू व महेंद्र का शांतिभंग में चालान कर दिया। झगड़े के दो दिन बाद गांव के अंदर बने घर से अपनी मां को महेंद्र बाहरी हिस्से में बने अपने घर ले आया। वहां से शाम को अपने बच्चों व भतीजों को पुराने घर पर भेज दिया। महेंद्र खुद ताला लगाकर रात 11 बजे पत्नी के साथ पुराने घर पर जाकर सो गया। उसके मुताबिक, रात आठ बजे खाना खाकर मां घर के बाहर पेड़ के नीचे सो गई थीं। सुबह पौने चार बजे वह गांव के बाहर वाले घर आया और मां की हत्या की सूचना पुलिस को दी। किसी को गोली मारकर तो किसी को चाकू से हत्या करने की सूचना दी। खुद के बजाय भाई गजेंद्र को वादी बनाया।
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पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट की लखनऊ तक हुई जांच
विवेचक संजय धीर ने पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट देखी तो पाया कि पेट में आधा पचा खाना था। उन्होंने राज्य मेडिकल बोर्ड से इसकी जांच कराई। वहां भोजन करने का वक्त हत्या से दो से चार घंटे पहले का निकला। चूंकि महेंद्र रात 11 बजे पुराने घर पर गया था तो ये पुष्ट हुआ कि वही हत्या करके चला गया और सुबह आकर शोर मचा दिया।
मां की हत्या से होने थे दो फायदे
इन सब बिंदुओं पर जब महेंद्र से पूछताछ की गई तो उसने कहा कि वह मां की हत्या कर नत्थू पक्ष को घेरना चाहता था। मां भी उसके बजाय दूसरे भाइयों को चाहती थी तो उसने सोचा कि इनके बाद संपत्ति व जेवर का भी बंटवारा हो जाएगा।