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लखनऊ-दिल्ली के बीच फोरलेन होगा रेल ट्रैक
बरेली
Updated Wed, 28 Dec 2016 01:24 AM IST
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अब बरेली से भी लखनऊ और दिल्ली के लिए 160 किमी की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ेंगी, क्योंकि लखनऊ से वाया दिल्ली रेल ट्रैक को फोरलेन बनाया जाएगा। अभी इसमें तीन साल का वक्त लगेगा। नई लाइन बिछाने के लिए रेलवे के तकनीकी विभाग ने नापजोख की है और अप्रयुक्त जमीन पर कटीले तारों की बाड़ भी लगानी शुरू कर दी गई है। इससे भूमि पर कब्जा करने वालों में खलबली मच गई है।
बिलपुर स्टेशन पर जांच को पहुंचे रेलवे के एक तकनीक विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नई दोहरी लाइन के साथ हर स्टेशन पर अतिरिक्त साइडिंग तैयार होगी, जिसे बनाने को रेलवे को आवश्यकता पड़ने पर स्टेशन के पास की जमीन को एक निश्चित दूरी तक की जमीन अधिग्रहीत करनी पड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बिछी रेल पटरियां लगातार बढ़ रही ट्रेनों और गुड्स ट्रेनों की आवश्यकता के लिहाज से अपर्याप्त और कमजोर हो चुकी हैं। इन्हें बदलना सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती का सामना नई रेल पटरी को बिछाकर ही किया जा सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि रेलवे की सर्वाधिक आय का प्रमुख श्रोत गुड्स ट्रैफिक है। किंतु गुड्स ट्रेनों को पैसेंजर गाड़ियों की तुलना में प्राथमिकता मिलने के कारण निर्धारित स्टेशनों पर पहुंचने में अधिक देरी हो जाती है। इस कारण रेलवे को हर साल नुकसान उठाना पड़ता है। इससे निपटने के लिए नई रेल लाइनें बिछाई जानी हैं। वैसे भी गुड्स यातायात के लिए प्रायोजित एक कंपनी ने नई रेलवे लाइनें बिछाने में रेलवे का सहयोग करने का आश्वासन दे रखा है। इसके चलते नई लाइनें बिछाने का रास्ता साफ हो चुका है। बहरहाल रेलवे द्वारा की जा रही नई पहल से जहां जर्जर हो चुकी रेल पटरियों को राहत मिल सकेगी, वहीं अप्रयुक्त के रूप से पटरियों के दोनों ओर पड़ी लाखों मीटर जमीनों पर जमे माफिया में हड़कंप मच गया है।
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बिलपुर स्टेशन पर जांच को पहुंचे रेलवे के एक तकनीक विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नई दोहरी लाइन के साथ हर स्टेशन पर अतिरिक्त साइडिंग तैयार होगी, जिसे बनाने को रेलवे को आवश्यकता पड़ने पर स्टेशन के पास की जमीन को एक निश्चित दूरी तक की जमीन अधिग्रहीत करनी पड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बिछी रेल पटरियां लगातार बढ़ रही ट्रेनों और गुड्स ट्रेनों की आवश्यकता के लिहाज से अपर्याप्त और कमजोर हो चुकी हैं। इन्हें बदलना सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती का सामना नई रेल पटरी को बिछाकर ही किया जा सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि रेलवे की सर्वाधिक आय का प्रमुख श्रोत गुड्स ट्रैफिक है। किंतु गुड्स ट्रेनों को पैसेंजर गाड़ियों की तुलना में प्राथमिकता मिलने के कारण निर्धारित स्टेशनों पर पहुंचने में अधिक देरी हो जाती है। इस कारण रेलवे को हर साल नुकसान उठाना पड़ता है। इससे निपटने के लिए नई रेल लाइनें बिछाई जानी हैं। वैसे भी गुड्स यातायात के लिए प्रायोजित एक कंपनी ने नई रेलवे लाइनें बिछाने में रेलवे का सहयोग करने का आश्वासन दे रखा है। इसके चलते नई लाइनें बिछाने का रास्ता साफ हो चुका है। बहरहाल रेलवे द्वारा की जा रही नई पहल से जहां जर्जर हो चुकी रेल पटरियों को राहत मिल सकेगी, वहीं अप्रयुक्त के रूप से पटरियों के दोनों ओर पड़ी लाखों मीटर जमीनों पर जमे माफिया में हड़कंप मच गया है।
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