Lok Sabha Elections: बदायूं की जनता ने 10 बार बाहरी नेताओं को पहुंचाया संसद, सिर्फ सात बार स्थानीय जीते
बदायूं में लोकसभा के लिए अब तक 17 बार चुनाव हुए। जनता ने स्थानीय नेताओं से ज्यादा बाहरी नेताओं पर भरोसा जताया है। 10 बार बाहर से आए नेता सांसद बने। पढ़िए अब तक चुनावी इतिहास...
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बदायूं में विकास की उम्मीद में बाहर से आए नेताओं को स्थानीय मतदाताओं ने सिर आंखों पर बैठाया और जिताया लेकिन यह बात दीगर है कि बुनियादी सुविधाओं के लिए भी बदायूं की जनता इंतजार कर रही है। चिकित्सा सेवाओं की बात हो या फिर सड़कों का हाल हो। उम्मीदें पूरीं नहीं हुईं।
लोकसभा के लिए अब तक 17 बार चुनाव हुए। स्थानीय नेताओं से ज्यादा जनता ने बाहरी नेताओं पर भरोसा किया। सबसे ज्यादा भरोसा सलीम इकबाल शेरवानी पर रहा। दूसरा स्थान धर्मेंद्र यादव का है। साल 1952 से 1980 तक 28 साल में सात बार चुनाव हुए और प्रत्येक बार स्थानीय नेता ही सांसद चुने गए लेकिन 1984 में पहली बार सलीम इकबाल शेरवानी को जब कांग्रेस ने उतारा तो सीट स्थानीय नेताओं के हाथ से खिसक गई। जनता ने विकास की उम्मीद करते हुए उन पर विश्वास व्यक्त कर दिया।
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सलीम इकबाल शेरवानी पहली बदायूं से सांसद बन गए। फिर 1984 से 2019 तक 35 साल में दस बार लोकसभा के लिए चुनाव हुए और प्रत्येक बाहर बाहरी नेता के सिर पर ही जीत का ताज सजा। प्रयागराज के सलीम इकबाल शेरवानी पांच बार, सैफई के धर्मेंद्र यादव दो बार, मध्य प्रदेश के शरद यादव, शाहजहांपुर के स्वामी चिन्मयानंद और लखनऊ की संघमित्रा मौर्य एक-एक बार सांसद रहीं।
1952 कांग्रेस बदन सिंह स्थानीय
1957 कांग्रेस रघुवीर सहाय स्थानीय
1962 जनसंघ ओमकार सिंह स्थानीय
1967 बीजेएस ओमकार सिंह स्थानीय
1971 कांग्रेस करन सिंह यादव स्थानीय
1977 बीएलडी ओमकार सिंह स्थानीय
1980 कांग्रेस मो. असरार अहमद स्थानीय
1984 कांग्रेस सलीम शेरवानी बाहरी
1989 जनता दल शरद यादव बाहरी
1991 भाजपा स्वामी चिन्मयानंद बाहरी
1996 सपा सलीम शेरवानी बाहरी
1998 सपा सलीम शेरवानी बाहरी
1999 सपा सलीम शेरवानी बाहरी
2004 सपा सलीम शेरवानी बाहरी
2009 सपा धर्मेद्र यादव बाहरी
2014 सपा धर्मेद्र यादव बाहरी
2019 भाजपा संघमित्रा मौर्य बाहरी
भाजपा ने छेड़ा स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा
सपा पर सियासी वार के लिए भाजपा के उम्मीदवार दुर्विजय सिंह ने स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा चुनाव प्रचार के पहले ही दिन छेड़ दिया। अब सपा के नेता कह रहे हैं कि बाहरी नेताओं को तो भाजपा ने भी लड़ाया और जिताया है तब उनका यह मुद्दा कहां था। इसका जवाब देते हुए कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ने कहा कि मुद्दा सियासी शिगूफा है।
भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि 35 साल से किसी भी प्रमुख दल ने स्थानीय व्यक्ति को टिकट नहीं दिया पर भाजपा ने अबकी बार बाहरी व्यक्ति को चुनाव लड़ाने की राजनीतिक दलों की परंपरा को तोड़ दिया है, अब विपक्षी दल बताएं? वे स्थानीय के मुद्दे पर क्या कहेंगे।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह ने कहा कि बदायूं लोकसभा क्षेत्र दुर्विजय सिंह भी बाहरी हैं। उनका पैतृक गांव आंवला लोकसभा क्षेत्र में है। वह खुद बरेली में रहते हैं और सिर्फ चुनाव के लिए आए हैं। अगर वे खुद को स्यानीय बता रहे हैं तो बदायूं के किसी मुद्दे पर संघर्ष किया हो तो बताएं।