बरेली-सितारगंज हाईवे: 80 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचा भूमि अधिग्रहण घोटाला, विस्तृत जांच में खुलेंगी और परतें
बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे और बरेली रिंग रोड भू-अधिग्रहण घोटाला 80 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है। इतनी रकम 50 लाख से ऊपर मुआवजा पाने वालों की जांच में सामने आई है। विस्तृत जांच में 200 करोड़ से अधिक की घपलेबाजी हो सकती है।
विस्तार
बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे और बरेली रिंग रोड भू-अधिग्रहण घोटाले की रकम शुरुआती जांचों में ही 80 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है। यह स्थिति तब है जबकि अभी सिर्फ 50 लाख रुपये से अधिक मुआवजा पाने वालों की जांच की गई है। अभी 50 लाख रुपये कम मुआवजे वालों की सूची की जांच होनी है। जानकारों का मानना है कि मंडलायुक्त व जिला प्रशासन की संस्तुति पर शासन यदि विस्तृत जांच कराएगा तो यह घोटाला दो सौ करोड़ रुपये से अधिक का निकल सकता है।
अभी तक बरेली जिले में जिला प्रशासन की जांच में 21.52 करोड़ रुपये से अधिक मूल्यांकन होने का खुलासा हुआ है। वहीं पीलीभीत जिले की जांच में मंडलायुक्त की जांच समिति ने मुआवजे की रकम में 58.91 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी पकड़ी है। दोनों जांच समितियों ने खुद माना है कि विस्तृत जांच में और स्थिति स्पष्ट होगी। यही नहीं उत्तराखंड के सितारगंज में अलग से जांच चल रही है। वहां हुए घपले की रकम भी इस घोटाले में जुड़ेगी।
- 30 जुलाई 2024 रिंग रोड के सरनिया में अधिक मूल्यांकन तय किए जाने की शिकायत आई
- 30 अगस्त 2024 को डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया
- 10 सितंबर 2024 को जांच कमेटी ने डीएम को रिपोर्ट सौंपी
- 01 अगस्त को एनएचएआई मुख्यालय की जांच कमेटी बरेली आई, चार दिनों तक छानबीन
- 14 अगस्त को एनएचएआई के चेयरमैन ने अधिक मूल्यांकन के सवाल पर जांच के लिए मुख्य सचिव को लिखा
- 23 अगस्त को एनएचएआई के तत्कालीन पीडी बीपी पाठक, क्षेत्रीय अधिकारी संजीव शर्मा निलंबित किए गए
- 10 सितंबर को जिला प्रशासन की जांच समिति ने बरेली जिले में हुई गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट जारी की।
- 13 सितंबर को मंडलायुक्त की ओर से गठित समिति ने पीलीभीत जिले की जांच रिपोर्ट जारी की।
गलत भू उपयोग में 28 लोगों के नाम आए सामने
अधिकारियों -दलालों से सांठगांठ कर अधिक मुआवजा पाने के लिए परियोजना के आसपास जमीन खरीदने और उसे अकृषक घोषित करवाकर निर्माण भी दिखाने के मामलों में अब तक 28 लोगों के नाम सामने आए हैं। इसमें नौ मामले जिला प्रशासन की जांच में खुले है, जिनमें छह नवाबगंज तहसील व तीन सदर तहसील के हैं। वहीं 19 लोगों के नाम पीलीभीत में गलत ढंग से जमीन खरीदने में अब सामने आए हैं।
2021 में जहां हो रही थी खेती, वहां दिखाए पुराने निर्माण
जांच में सामने आया है कि जहां मार्च 2021 में खेती हो रही थी, वहां सरकारी विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों व सर्वे एजेंसी ने निर्माण दिखा दिए। समिति के अनुसार एनएचएआई की ओर से उपलब्ध कराये गए ड्रोन सर्वे, सेटेलाइट इमेज डाटा से स्पष्ट है कि उक्त भूखंडों को खरीदने के बाद उन पर निर्माण कराया गया है। वहीं, मूल्यांकन रिपोर्ट में गवर्नमेंट अप्रूव्ड वैल्युअर एसए इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड, एनएचएआई परियोजना कार्यान्वयन इकाई बरेली व लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता/अधिशासी अभियंता ने परिसंपत्तियों के निर्माण की अवधि दो से लेकर सात वर्ष तक अंकित की है।
साथ ही सर्वे रिपोर्ट में एसए इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड, एनएचएआई परियोजना कार्यान्वयन इकाई बरेली, क्षेत्रीय लेखपाल व भू अर्जन अमीन ने स्थल पर पूर्ण निर्माण की रिपोर्ट प्रस्तुत की है। समिति के अनुसार इससे स्पष्ट है कि परिसंपत्तियों की सर्वे व मूल्यांकन रिपोर्ट गड़बड़ है। मौके पर स्थित स्ट्रक्चर से अधिक का मूल्यांकन किया गया। इससे यह भी स्पष्ट है कि उक्त परिसंपत्तियों के प्रतिकर का भुगतान अवैध तरीके से किया गया, जो कि नियमानुसार योग्य नहीं था।
संबंधित विभागों को भेजेंगे पत्र, तय होगी अफसरों की जिम्मेदारी
जांच अधिकारी अपर आयुक्त प्रशासन प्रीति जायसवाल के मुताबिक जांच अभी थमी नहीं है। भू उपयोग में बदलाव से जुड़े कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। भूमि अधिग्रहण और मूल्यांकन के दौरान राजस्व विभाग, सक्षम अधिकारी, कन्सल्टेंट फर्म, एनएचएआई के तत्कालीन अफसरों, कर्मचारियों की जानकारी जुटाई जाएगी। प्रपत्रों पर सिर्फ उनके हस्ताक्षर हैं, नाम नहीं। तकनीकी स्तर से भी जांच की सिफारिश की गई है। इसके बाद ही संबंधित की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
धारा-80 के बाद भी कृषि भूमि का दिया मुआवजा, पहुंचे कोर्ट
विभागीय सूत्रों के मुताबिक ज्यादा मुआवजा हासिल करने के लिए कई किसानों ने भू उपयोग में परिवर्तन कराया, पर उन्हें मुआवजा कृषि भूमि का दे दिया गया। लिहाजा, कई किसानों ने वाद दायर किया है। कमोबेश यही स्थिति जांच के दौरान भी रही। इस सुनियोजित खेल में कौन दोषी होगा, यह तय करना मुश्किल है। अगर पुख्ता सुबूत के अभाव में उन्हें दोषी माना गया तो वे हाईकोर्ट जा सकते हैं।
- राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा-3 (ए) के प्रकाशन की सूचना एनएचएआई की ओर से संबंधित उप जिलाधिकारी को देकर अनुरोध किया जाए कि नोटिफिकेशन में शामिल गावों में धारा-80 की कार्रवाई से पहले एनएचएआई का पक्ष अनिवार्य रूप से सुना जाए।
- उप्र राजस्व संहिता 2006 में वर्तमान में केवल विकास प्राधिकरण की सीमा में भूमि स्थित होने पर संबंधित विकास प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने का प्रावधान धारा-80 (8) में है। इसलिए उप्र राजस्व संहिता-2006 में यह संशोधन किया जाए कि यदि एनएचएआई ने संबंधित उप जिलाधिकारी से अनुरोध किया है तो वह धारा-80 की कार्रवाई से पहले अनिवार्य रूप से एनएचएआई का पक्ष सुनने के लिए नोटिस देंगे। साथ ही साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद निर्णय देंगे।
- उप्र राजस्व संहिता 2006 में यह भी संशोधित किया जाए कि जिन वादों में धारा-80 की कार्रवाई से पहले एनएचएआई को नोटिस जारी करने की अनिवार्यता है, उनमें धारा-80 के प्रार्थना पत्र निस्तारण के लिए 45 दिन की समय सीमा का पालन अनिवार्य नहीं होगा। उप जिलाधिकारी एनएचएआई व संबंधित भू-स्वामी को सुनवाई के लिए पर्याप्त अवसर देने के बाद जल्द निर्णय देने का प्रयास करेंगे।
- परिसंपत्तियों का मूल्यांकन संबंधित सक्षम प्राधिकारी या सरकारी एजेंसी से कराए जाने की व्यवस्था है। आमताैर पर यह मूल्यांकन लोक निर्माण विभाग से कराया जाता है। इसलिए उचित होगा कि परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कराने के बाद उसकी रिपोर्ट एनएचएआई को भेजी जाए। साथ ही, एनएचएआई अधिसूचना की तिथि को कैप्चर किए गए सेटेलाइट डाटा के आधार पर यह सुनिश्चित करे कि मूल्यांकन को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। यदि कोई आपत्ति है तो लिखित आपत्ति तय समय सीमा में सक्षम प्राधिकारी को भेजी जाए। सक्षम प्राधिकारी उस पर कार्रवाई करें। संपत्तियों के मूल्यांकन पर एनएचएआई से अनापत्ति मिलने के बाद ही मूल्यांकित धनराशि अवाॅर्ड में शामिल हो।
- परिसंपत्तियों का मूल्यांकन डीएम सर्किल रेट पर किया जाए या फिर पीडब्ल्यूडी के एसओआर पर, इस बारे में भी एनएचएआई की ओर से सक्षम प्राधिकारी को स्पष्ट जानकारी दी जाए। इससे परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में स्पष्टता रहेगी।
- भुगतान के समय सक्षम प्राधिकारी को परिसंपत्तियों की मूल्यांकन धनराशि पर साल्वेज वैल्यू की कटौती करनी है या नहीं और यदि कटौती करनी है तो किस दर पर की जाएगी? इसकी जानकारी एनएचएआई की ओर से सक्षम प्राधिकारी को दी जाए। इससे अधिक भुगतान होने पर रोक लगेगी।
अधिसूचना के बाद जिन भूखंडों को खरीदा गया, उनके विक्रय अभिलेख में किसी प्रकार का निर्माण अंकित नहीं है। इसके बाद भी संबंधित भू-स्वामियों को परिसंपत्तियों का भी भुगतान किया गया है। इनमें उगनपुर में गाटा सं.-78, अमरिया में गाटा संख्या-84, 86, 230, हुसैन नगर में गाटा सं.- 145, 146, 185, सरदार नगर में गाटा संख्या-32, मुड़लिया गौसू में गाटा संख्या-41 व भैसहा में गाटा संख्या-211 की जमीन शामिल है।
इन अधिकारियों ने की जांच
अपर आयुक्त (प्रशासन) बरेली मंडल प्रीति जायसवाल, नगर आयुक्त शाहजहांपुर बिपिन कुमार मिश्र, बरेली विकास प्राधिकरण के सचिव योगेन्द्र कुमार, उप महानिरीक्षक, स्टांप व निबंधन, रिकवरी शम्भू नाथ यादव, शाहजहांपुर की तिलहर तहसील के तहसीलदार जय प्रकाश यादव।
आठ गाटा संख्या में नोटिफिकेशन के बाद भू उपयोग में हुआ बदलाव
जांच में पाया गया कि एनएच एक्ट के तहत हाईवे के नोटिफिकेशन के बाद आठ गाटा संख्या के भू उपयोग में बदलाव किया गया। इनमें अमरिया में गाटा संख्या-84, 86, हेतमडांडी में गाटा संख्या 125, सरदार नगर में गाटा संख्या-32, 41, 206, मुड़लिया गौसू व भैसहा में गाटा संख्या-211, 213 शामिल हैं।
नाै गांवों में 50 लाख से अधिक मुआवजे के 20 मामले मिले : 27 गांव के 735 गाटों में 3,457 किसानों/लाभार्थियों की भूमि, परिसंपत्तियों का अधिग्रहण किया गया है। इनमें 50 लाख रुपये से अधिक प्रतिकर भुगतान वाले मामलों की विशेष जांच की गई है। नौ गांवों में ऐसे 20 प्रकरण पाए गए।
पीलीभीत के 27 गांवों की हुई जांच : जांच समिति ने बरेली-सितारगंज हाईवे के पैकेज एक के कुकरी खेड़ा, विलई पसियापुर, उगनपुर, हंडा, देवीपुरा व शाही और पैकेज दो के बढेपुरा, हुसैननगर, मुड़लिया गौसू, धुंधरी, कल्यानपुर चक्रतीर्थ, बल्लिया, दबका, विलहरा माफी, भौनी, कैचूटांडा, माधौपुर, मुड़लिया इलाहीबक्श, लाहौरगंज, भौना, भैसहा, अमरिया, हेतमडांडी, सरदारनगर, बारात बोझ, सहगवां नगरिया, कटमती गांवों के भू अधिग्रहण की जांच की।