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खुद को बचाते-छिपाते शहर में आकर मदद मांग गए कश्मीरी
बरेली।
Updated Tue, 26 Dec 2017 01:59 AM IST
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कश्ममीरी
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मैथोडिस्ट चर्च में क्रिसमस के आयोजन के बीच तीन कश्मीरी खुद को छात्र बताकर लोगों से मदद मांग गए। खास बात यह रही कि वे लोगों से मिले तो लेकिन अपनी जानकारी बचाते-छिपाते रहे। इन तीनों, जिनमें दो युवक और एक युवती थी, ने चर्च प्रबंधन को दी जानकारी में अपना ठिकाना मुरादाबाद बताया। मगर इन कश्मीरियों के आने-जाने के बारे में खुफिया इकाइयों को कोई जानकारी नहीं है।
खुद को कश्मीरी छात्र बताने वाले ये तीनों सोमवार दोपहर करीब 12 बजे मैथोडिस्ट चर्च पहुंचे। मुरादाबाद में फिलिप मैमोरियल मैथोडिस्ट चर्च के पास्टर ब्रजेश मेंसल का परिचय देकर पास्टर सुनील मसीह से मिले। अपने परिचय के तौर पर उन्हें अंग्रेजी में लिखा एक पोस्टर दिया जिस पर जम्मू एंड कश्मीर स्टूडेंट्स नेशनल रिलीफ कैंप लिखा था। उस पर नोट लिखा था कि कैंप में अनाथ और विधवाएं हैं, इसलिए ज्यादा से ज्यादा दान दें। पोस्टर का मजमून था- ‘हम जान की हिफाजत के लिए बॉर्डर क्षेत्र कश्मीर से मुरादाबाद आए हैं, क्योंकि वहां कोई सुरक्षा नहीं है। आप जानते ही हैं कि पिछले 18 साल से आतंक के चलते कश्मीर बहुत परेशानियां झेल रहा है। इस ग्रुप में अनाथ बच्चे, विधवा, बुजुर्ग और अधिकांश ऐसे लोग हैं जो कश्मीरी ही जानते हैं। खराब परिस्थितियों के चलते हम अपना घर और कारोबार खो चुके हैं, इसलिए छात्रों का ग्रुप इस कैंप के लिए मदद एकत्र कर रहा है। हमें अनाज, कंबल व कुछ अन्य मदद चाहिए। हम आप सभी से मदद की अपील करते हैं, क्योंकि आप हमारे भारतीय भाई हैं।’ पोस्टर पर नीचे ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ, आजादनगर संभल रोड, मुरादाबाद लिखा है।
अपनी जानकारी छिपाते रहे
पास्टर सुनील ने उन्हें लोगों से मदद मांगने की अनुमति दे दी। इसके बाद वह कैंपस में घूमकर मदद मांगते रहे लेकिन वापसी के दौरान अपना पोस्टर भी उनसे मांगने लगे, लेकिन उन्होंने पोस्टर वापस नहीं किया। इस दौरान वह लोगों से मिले तो जरूर लेकिन अपने बारे में ज्यादा बात करने से बचते रहे।
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एलआईयू को जानकारी नहीं
सीओ एलआईयू यशपाल सिंह ने कश्मीरियों के आने के बारे में ऐसी किसी भी जानकारी से इन्कार किया। बोले, न तो यहां आने की जानकारी मिली है और न ही मुरादाबाद में उनके रहने का कोई इनपुट मिला है।
खुद को कश्मीरी छात्र बताने वाले ये तीनों सोमवार दोपहर करीब 12 बजे मैथोडिस्ट चर्च पहुंचे। मुरादाबाद में फिलिप मैमोरियल मैथोडिस्ट चर्च के पास्टर ब्रजेश मेंसल का परिचय देकर पास्टर सुनील मसीह से मिले। अपने परिचय के तौर पर उन्हें अंग्रेजी में लिखा एक पोस्टर दिया जिस पर जम्मू एंड कश्मीर स्टूडेंट्स नेशनल रिलीफ कैंप लिखा था। उस पर नोट लिखा था कि कैंप में अनाथ और विधवाएं हैं, इसलिए ज्यादा से ज्यादा दान दें। पोस्टर का मजमून था- ‘हम जान की हिफाजत के लिए बॉर्डर क्षेत्र कश्मीर से मुरादाबाद आए हैं, क्योंकि वहां कोई सुरक्षा नहीं है। आप जानते ही हैं कि पिछले 18 साल से आतंक के चलते कश्मीर बहुत परेशानियां झेल रहा है। इस ग्रुप में अनाथ बच्चे, विधवा, बुजुर्ग और अधिकांश ऐसे लोग हैं जो कश्मीरी ही जानते हैं। खराब परिस्थितियों के चलते हम अपना घर और कारोबार खो चुके हैं, इसलिए छात्रों का ग्रुप इस कैंप के लिए मदद एकत्र कर रहा है। हमें अनाज, कंबल व कुछ अन्य मदद चाहिए। हम आप सभी से मदद की अपील करते हैं, क्योंकि आप हमारे भारतीय भाई हैं।’ पोस्टर पर नीचे ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ, आजादनगर संभल रोड, मुरादाबाद लिखा है।
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अपनी जानकारी छिपाते रहे
पास्टर सुनील ने उन्हें लोगों से मदद मांगने की अनुमति दे दी। इसके बाद वह कैंपस में घूमकर मदद मांगते रहे लेकिन वापसी के दौरान अपना पोस्टर भी उनसे मांगने लगे, लेकिन उन्होंने पोस्टर वापस नहीं किया। इस दौरान वह लोगों से मिले तो जरूर लेकिन अपने बारे में ज्यादा बात करने से बचते रहे।
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एलआईयू को जानकारी नहीं
सीओ एलआईयू यशपाल सिंह ने कश्मीरियों के आने के बारे में ऐसी किसी भी जानकारी से इन्कार किया। बोले, न तो यहां आने की जानकारी मिली है और न ही मुरादाबाद में उनके रहने का कोई इनपुट मिला है।