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कई विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर शुरू होंगे संयुक्त पाठ्यक्रम
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छात्र-छात्राएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
विदेशी भाषाओं का अध्ययन कराने, विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए निदेशालय बनाने की भी स्वीकृति
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कार्य परिषद ने मंगलवार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इसमें विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए निदेशालय बनाने, दूसरे देशों के विश्वविद्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त पाठ्यक्रम शुरू करने, देश-विदेश की तमाम भाषाओं का अध्ययन कराने सहित कई अन्य प्रस्ताव शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग के सिंडिकेट हॉल में कुलपति प्रो. केपी सिंह की अध्यक्षता में कार्य परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के निदेशालय की स्थापना के संबंध में प्रस्तुत प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस निदेशालय के माध्यम से विदेशी छात्रों को रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने के लिए आकर्षित किया जाएगा। इसके साथ कई दूसरे देशों के विश्वविद्यालय के साथ संयुक्त डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रयास होगा। कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय में परामर्श नीति के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी है। इस नीति के लागू होने के बाद विश्वविद्यालय व उससे सम्बद्ध महाविद्यालय के शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी अपनी योग्यता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में परामर्श दे सकेंगे। इससे उद्योग व व्यवसाय को बढ़ावा मिलने के साथ विश्वविद्यालय की भी आय बढ़ेगी।
छात्र प्रायोगिक शिक्षण कार्यक्रम के संबंध में प्रस्तुत कार्ययोजना को भी कार्य परिषद ने मंजूरी दे दी है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ आय का भी अवसर मिलेगा। इसके अलावा महिला अध्ययन में उत्कृष्ट केंद्र की स्थापना भी होगी। इसमें महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, जनसंख्या आदि विषयों पर अध्ययन कार्य करेगा। छात्रों को देश-विदेश की कई भाषाओं का अध्ययन कराने के लिए विश्वविद्यालय में बहुभाषा अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसमें हिंदी व संस्कृत के साथ विदेशी भाषा जर्मन, फ्रेेंच, पर्सियन आदि भाषाओं का ज्ञान कराया जाएगा।
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विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग के सिंडिकेट हॉल में कुलपति प्रो. केपी सिंह की अध्यक्षता में कार्य परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के निदेशालय की स्थापना के संबंध में प्रस्तुत प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस निदेशालय के माध्यम से विदेशी छात्रों को रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने के लिए आकर्षित किया जाएगा। इसके साथ कई दूसरे देशों के विश्वविद्यालय के साथ संयुक्त डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रयास होगा। कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय में परामर्श नीति के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी है। इस नीति के लागू होने के बाद विश्वविद्यालय व उससे सम्बद्ध महाविद्यालय के शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी अपनी योग्यता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में परामर्श दे सकेंगे। इससे उद्योग व व्यवसाय को बढ़ावा मिलने के साथ विश्वविद्यालय की भी आय बढ़ेगी।
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छात्र प्रायोगिक शिक्षण कार्यक्रम के संबंध में प्रस्तुत कार्ययोजना को भी कार्य परिषद ने मंजूरी दे दी है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ आय का भी अवसर मिलेगा। इसके अलावा महिला अध्ययन में उत्कृष्ट केंद्र की स्थापना भी होगी। इसमें महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, जनसंख्या आदि विषयों पर अध्ययन कार्य करेगा। छात्रों को देश-विदेश की कई भाषाओं का अध्ययन कराने के लिए विश्वविद्यालय में बहुभाषा अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसमें हिंदी व संस्कृत के साथ विदेशी भाषा जर्मन, फ्रेेंच, पर्सियन आदि भाषाओं का ज्ञान कराया जाएगा।
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स्टार्टअप को बढ़ावा देने की भी तैयारी
विश्वविद्यालय स्टार्टअप को बढ़ावा देने के साथ सूक्ष्म व लघु उद्योग का एक हब बनाने के लिए भी योगदान देगा। इनोवेशन क्लब का गठन भी होगा। इसके माध्यम से युवाओं को जोड़ा जाएगा।कार्य परिषद की बैठक में लिए गए कई और निर्णय
- -विश्वविद्यालय में पूर्व छात्र परिषद की स्थापना होगी। इसके माध्यम से विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा।
- -शोध को बढ़ावा देने के लिए शोध निदेशालय और शोध समिति को गठित करने पर भी सहमति बनी। यह निदेशालय विश्वविद्यालय में प्रवेश से लेकर पीएचडी उपाधि अवार्ड होने तक सभी गतिविधियों का केंद्र रहेगा।
- -शासन के निर्देश पर कार्य परिषद ने एमफिल पाठ्यक्रम को बंद कर दिया है। विश्वविद्यालय ने नैनीताल के आर्य भट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ ऑब्जर्वेशनल साइंस के साथ हुए समझौता को अनुमोदित कर दिया।
- -बरेली शहर के जोगी नवादा के पंडित दीनदयाल मिश्र इंटर कालेज की नई प्रशासन योजना को लागू करने की स्वीकृति मिली। विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह कराने और विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों को 70 वर्ष की आयु तक दोबारा नियुक्त करने के शासनादेश पर भी हामी भरी गई।