UP: फर्जी बिलों से 10 करोड़ का कारोबार, 50 लाख से अधिक की कर चोरी, एसआईबी जीएसटी की जांच में खुलासा
एसआईबी जीएसटी टीम ने बुधवार को शाहजहांपुर के अल्हागंज स्थित दो फर्मों पर छापा मारा। यहां जांच के दौरान बड़ी टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। टीम ने दोनों फर्मों से माल और अभिलेख जब्त किए हैं।
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टैक्स (कर) चोरी की शिकायत पर बरेली की एसआईबी जीएसटी टीम ने बुधवार को शाहजहांपुर के अल्हागंज स्थित दो फर्मों पर छापा मारा। जांच में करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की मूंगफली के फर्जी बिल जारी किए जाने और 50 लाख रुपये से अधिक की कर चोरी सामने आई। टीम ने दोनों फर्मों के व्यापार स्थल से मिले माल और अभिलेखों को सीज कर दिया है।
उपायुक्त एसआईबी बरेली अनिरुद्ध सिंह के नेतृत्व में सहायक आयुक्त राहुल, राज्यकर अधिकारी प्रदीप और ताराचंद समेत 15 अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की टीम ने सोनाली ट्रेडिंग कंपनी और अहमद राइस मिल पर कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार दोनों फर्मों पर फर्जी बिलों के जरिये खरीद-बिक्री दिखाकर कर चोरी किए जाने की शिकायत थी।
उपायुक्त ने बताया कि मामले का खुलासा गोरखपुर में सचल दल इकाई की चेकिंग के दौरान हुआ। शाहजहांपुर के यादव ट्रांसपोर्ट की एक खाली गाड़ी को जांच के लिए रोका गया था। वाहन का ई-वे बिल बिहार के लिए बना था, लेकिन जांच में सामने आया कि वाहन बिहार गया ही नहीं था और माल रास्ते में ही उतार दिया गया था।
गोरखपुर तक जांच की आंच
चालक के बयान के आधार पर पता चला कि वाहन में लदा माल गोरखपुर स्थित विश्वनाथ कोल्ड स्टोर में उतारा गया था। इसके बाद गोरखपुर एसआईबी टीम ने विश्वनाथ कोल्ड स्टोर की जांच की। जांच में अल्हागंज की सोनाली ट्रेडिंग कंपनी और अहमद राइस मिल द्वारा करोड़ों रुपये की मूंगफली के बिल गोरखपुर की सिद्धि विनायक ट्रेडिंग कंपनी के नाम जारी किए जाने की जानकारी मिली।
माल गोरखपुर से बंगाल और फिर शाहजहांपुर भेजना दिखाया
जांच में यह भी सामने आया कि गोरखपुर में पंजीकृत सिद्धि विनायक ट्रेडिंग कंपनी ने बंगाल में भी अपने नाम से पंजीयन कराया था। गोरखपुर से खरीद दिखाई गई मूंगफली को पश्चिम बंगाल भेजा जाना दर्शाया गया। इसके बाद बंगाल में पंजीकृत उसी फर्म से मूंगफली की खरीद शाहजहांपुर की अहमद राइस मिल और सोनाली ट्रेडिंग कंपनी द्वारा किया जाना दिखाया गया।
अधिकारियों को लेनदेन की इस कड़ी पर संदेह हुआ। माल वास्तव में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा या केवल बिलों का लेनदेन हुआ, इसकी जांच के लिए माल ढोने वाले वाहनों के नंबरों की टोल रिपोर्ट निकलवाई गई। टोल रिपोर्ट में सामने आया कि संबंधित वाहन गोरखपुर से आगे गए ही नहीं थे। इससे अधिकारियों को फर्मों द्वारा वास्तविक माल की आवाजाही के बजाय केवल बिलों का लेनदेन किए जाने की पुष्टि हुई।
माल और अभिलेख सीज, करापवंचना की गणना जारी
उपायुक्त एसआईबी अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि कार्रवाई के दौरान व्यापार स्थल पर मिले माल को सीज कर दिया गया है। साथ ही फर्मों से मिले अभिलेख भी कब्जे में लेकर सीज किए गए हैं। इन अभिलेखों के आधार पर करापवंचना की विस्तृत गणना की जा रही है। प्रारंभिक जांच में 10 करोड़ रुपये से अधिक की मूंगफली के बिल बेचे जाने और 50 लाख रुपये से अधिक की करापवंचना सामने आई है। संबंधित व्यापारियों को कर की धनराशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित कर जमा नहीं करने पर नियमानुसार वसूली की कार्रवाई की जाएगी।