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होलिका दहन पर इस बार नहीं है भद्रा का साया
बरेली।
Updated Sat, 11 Mar 2017 01:14 AM IST
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Holika Dahan is not at this time.
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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होली पर इस बार काफी शुभ योग बन रहा है। भद्रा का साया नहीं रहेगा और होलिका दहन भी लोग अपने समय और सुविधानुसार मुहूर्त पर कर सकेंगे। ज्योतिषाें के मुताबिक सर्वार्थ सिद्धि योग 13 घंटे तक रहेगा। ऐसे में यह समय काफी श्रेष्ठ माना जाता है।
आचार्य मुकेश मिश्रा और पंडित रमेश चंद्र शास्त्री के अनुसार होलिका दहन का श्रेष्ठ समय 12 मार्च को शाम साढ़े छह बजे और दूसरा रात 8 बजे शुरू होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग 12 की शाम को 5 बजकर 40 मिनट पर शुरू हो जाएगा तो अगले दिन सुबह 6 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। ऐसे सर्वार्थ सिद्धि योग सभी कार्यों को सिद्ध करने वाला है। होलिका दहन 12 मार्च को प्रदोष काल में किया जाना सर्वश्रेष्ठ है। सूर्योदय से रात 8 बजकर 23 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। होलिका दहन अलग- अलग मुहूर्त में कभी भी किया जा सकता है। हालांकि प्रदोष काल सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।
ऐसे करें होलिका की पूजा
आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि होलिका दहन से पहले लकड़ियों और गाय के गोबर के उपलाें से इसे सजाएं। मंडप व रंगोली भी बना सकते हैं। दहन के बाद रोली, चावल, मीठा और पुष्प चढ़ाएं। आरती करें। ऊं होलिकाए नम: का जाप करें। इस दौरान इष्ट देवता और कुल देवता के नाम की थाली अलग निकालें। इनकी पूजा करना आवश्यक है।
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होलिका दहन के मुहूर्त
शुभ- शाम 6:35 से 8:05 बजे तक
अमृत- रात 8:05 से 9:35 बजे तक
चंचल- रात 9:35 से 11:06 बजे तक
लाभ- रात 2:06 से 3:37 बजे तक
प्रदोष काल- शाम 6:38 से 9:02 बजे तक
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आचार्य मुकेश मिश्रा और पंडित रमेश चंद्र शास्त्री के अनुसार होलिका दहन का श्रेष्ठ समय 12 मार्च को शाम साढ़े छह बजे और दूसरा रात 8 बजे शुरू होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग 12 की शाम को 5 बजकर 40 मिनट पर शुरू हो जाएगा तो अगले दिन सुबह 6 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। ऐसे सर्वार्थ सिद्धि योग सभी कार्यों को सिद्ध करने वाला है। होलिका दहन 12 मार्च को प्रदोष काल में किया जाना सर्वश्रेष्ठ है। सूर्योदय से रात 8 बजकर 23 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। होलिका दहन अलग- अलग मुहूर्त में कभी भी किया जा सकता है। हालांकि प्रदोष काल सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।
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ऐसे करें होलिका की पूजा
आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि होलिका दहन से पहले लकड़ियों और गाय के गोबर के उपलाें से इसे सजाएं। मंडप व रंगोली भी बना सकते हैं। दहन के बाद रोली, चावल, मीठा और पुष्प चढ़ाएं। आरती करें। ऊं होलिकाए नम: का जाप करें। इस दौरान इष्ट देवता और कुल देवता के नाम की थाली अलग निकालें। इनकी पूजा करना आवश्यक है।
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होलिका दहन के मुहूर्त
शुभ- शाम 6:35 से 8:05 बजे तक
अमृत- रात 8:05 से 9:35 बजे तक
चंचल- रात 9:35 से 11:06 बजे तक
लाभ- रात 2:06 से 3:37 बजे तक
प्रदोष काल- शाम 6:38 से 9:02 बजे तक