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दिल्ली-लखनऊ हाईवे- टुकड़ों में बजट मांगने से टुकड़े-टुकड़े हो रहा हाईवे
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बरेली। कई साल से टूट और धंस रहे दिल्ली-लखनऊ हाईवे की मरम्मत का बजट एक साथ के बजाय टुकड़ों में मिल रहा है। इसलिए हाईवे सुधरने के बजाय और ज्यादा खराब हो गया है। बरेली-सीतापुर के बीच इस हाईवे को ठीक कराने के नाम पर दो बार में करीब 13.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। फिर भी हाईवे की दशा न सुधरने पर एनएचएआई ने मंत्रालय से 60 करोड़ रुपये के बजट की डिमांड और भेज दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस बजट को मिलने में अभी कुछ वक्त लगेगा।
दो राजधानियों को जोड़ने वाले इस हाईवे का बरेली से सीतापुर के बीच करीब 157 किलोमीटर का काम इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर नाम की कंपनी पिछले साल छोड़कर फरार हो चुकी है। इसके बाद से ही आधे-अधूरे फ्लाईओवर-ओवरब्रिज और सड़क दरक और धंस रही हैं। हाईवे पर जगह-जगह पर खतरनाक खड्ड की मिट्टी बारिश के पानी से लगातार बह रही है। सबसे ज्यादा खराब हालत फरीदपुर बाईपास फ्लाईओवर की है। यहां कई-कई फुट गहरी दरारें बनी हुई हैं। इसकी भी मिट्टी बह रही है। कोलतार की परत टूट रही है। फरीदपुर फ्लाईओवर पर अभी भी एक साइड में ट्रैफिक निकलने का सिलसिला जारी है। इससे हादसे का खतरा बना हुआ है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि एनएचएआई के अधिकारी मरम्मत के नाम पर दो बार बजट ले चुके हैं। पिछले साल 7.50 करोड़ रुपये से मरम्मत के काम कराए गए थे। हालांकि पैच वर्क और गड्ढा भरने के नाम पर रेत की बोरियां रखी गईं, जो हैवी ट्रैफिक के चलते नहीं टिक सकीं। इस साल भी करीब छह करोड़ रुपये फिर से रिपेयरिंग के नाम पर खर्च हुए हैं। इसमें भी गौसगंज, फरीदपुर और फतेहगंज पूर्वी के पास गड्ढे भरने के लिए पैच बनाए गए, लेकिन बारिश में ये फिर से उधड़ रहे हैं।
कमिश्नर ने भी देखा फरीदपुर बाईपास का हाल
बारिश से खस्ताहाल हो रहे फरीदपुर बाईपास का निरीक्षण कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने भी किया। उन्होंने फ्लाईओवर और एप्रोच रोड पर बनाई गई व्हाइट पट्टी को देखा। कमिश्नर ने कहा कि रिपेयरिंग के अभी और भी काम कराए जाने की जरूरत है। इसलिए लिए एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया है कि कुछ और बजट सरकार से मांगा गया है। कमिश्नर ने कहा कि हाईवे पर निगरानी रखी जाए। एक्सीडेंट जोन पर सुरक्षा के कामों को तत्परता से कराया जाए।
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दो राजधानियों को जोड़ने वाले इस हाईवे का बरेली से सीतापुर के बीच करीब 157 किलोमीटर का काम इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर नाम की कंपनी पिछले साल छोड़कर फरार हो चुकी है। इसके बाद से ही आधे-अधूरे फ्लाईओवर-ओवरब्रिज और सड़क दरक और धंस रही हैं। हाईवे पर जगह-जगह पर खतरनाक खड्ड की मिट्टी बारिश के पानी से लगातार बह रही है। सबसे ज्यादा खराब हालत फरीदपुर बाईपास फ्लाईओवर की है। यहां कई-कई फुट गहरी दरारें बनी हुई हैं। इसकी भी मिट्टी बह रही है। कोलतार की परत टूट रही है। फरीदपुर फ्लाईओवर पर अभी भी एक साइड में ट्रैफिक निकलने का सिलसिला जारी है। इससे हादसे का खतरा बना हुआ है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि एनएचएआई के अधिकारी मरम्मत के नाम पर दो बार बजट ले चुके हैं। पिछले साल 7.50 करोड़ रुपये से मरम्मत के काम कराए गए थे। हालांकि पैच वर्क और गड्ढा भरने के नाम पर रेत की बोरियां रखी गईं, जो हैवी ट्रैफिक के चलते नहीं टिक सकीं। इस साल भी करीब छह करोड़ रुपये फिर से रिपेयरिंग के नाम पर खर्च हुए हैं। इसमें भी गौसगंज, फरीदपुर और फतेहगंज पूर्वी के पास गड्ढे भरने के लिए पैच बनाए गए, लेकिन बारिश में ये फिर से उधड़ रहे हैं।
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कमिश्नर ने भी देखा फरीदपुर बाईपास का हाल
बारिश से खस्ताहाल हो रहे फरीदपुर बाईपास का निरीक्षण कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने भी किया। उन्होंने फ्लाईओवर और एप्रोच रोड पर बनाई गई व्हाइट पट्टी को देखा। कमिश्नर ने कहा कि रिपेयरिंग के अभी और भी काम कराए जाने की जरूरत है। इसलिए लिए एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया है कि कुछ और बजट सरकार से मांगा गया है। कमिश्नर ने कहा कि हाईवे पर निगरानी रखी जाए। एक्सीडेंट जोन पर सुरक्षा के कामों को तत्परता से कराया जाए।
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