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सफाई कर्मियों की मिलीभगत से कूड़े में खपा रहे मेडिकल वेस्ट

Mon, 29 Jul 2019 01:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2019 01:48 AM IST
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Health
बरेली। नगर निगम और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाले कर्मचारियों की मिलीभगत से अस्पताल संचालक कूड़े में मेडिकल वेस्ट खपा रहे हैं। इससे संक्रमण होने का खतरा है, बावजूद इसके नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अफसर अनजान बने हुए हैं। कई अस्पताल तो ऐसे हैं, जो न तो कूड़ा और मेडिकल वेस्ट अलग करते हैं और न ही इसका निस्तारण करने वाली कंपनी को देते हैं। शहर में हर दिन ही होने वाले इस खेल को लेकर स्वास्थ्य विभाग और निस्तारण करने वाली कंपनी एकदूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
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डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाला नगर निगम का एक वाहन शनिवार को डेलापीर डलावघर पर पहुंचा तो उसमें भरे कूड़े में मेडिकल वेस्ट भी मिला हुआ था। वहां से गुजर रहे कुछ लोगों ने कूड़े में मेडिकल वेस्ट देखकर विरोध किया और निगम के अफसरों को बुलाने की बात कही तो कर्मचारी वाहन लेकर भाग निकला। हालांकि लोगों ने कूड़े में मिले मेडिकल वेस्ट के फोटो खींच लिए। यह तो एक मामला है, जो संज्ञान में आया है, लेकिन शहर के तमाम अस्पताल संचालक खेल रोजाना खेल रहे हैं। मगर न तो स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर गंभीर है, न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या नगर निगम के अफसर।
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थोड़े रुपये बचाने को फैला रहे हैं संक्रमण
चंद रुपये बचाने के चक्कर में अस्पताल संचालक संक्रमण फैला रहे हैं। इनविराड कंपनी हर अस्पताल से प्रतिदिन साढ़े चार रुपये प्रति बेड की दर से लेती है। यह राशि बचाने के लिए ही कुछ अस्पताल संचालक अपना मेडिकल वेस्ट निस्तारण को न देकर प्लास्टिक मैटीरियल कबाड़ में बेचकर कमाई कर लेते हैं और बाकी सामान डोर-टू-डोर कर्मचारी को दे देते हैं। कर्मचारी कुछ पैसों के लालच में मेडिकल वेस्ट ले जाते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा खतरे में वही रहते हैं। इसके अलावा कूड़े में भोजन तलाशने वाले जानवर भी इससे संक्रमित हो जाते हैं।
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कई अस्पताल तो पंजीकृत ही नहीं
बरेली में इनविराड कंपनी के पास 448 अस्पताल और पैथोलॉजी लैब ही पंजीकृत हैं, जबकि शहर में यह संख्या इससे कहीं ज्यादा है। दांतों के इलाज से जुड़े अधिकांश अस्पताल और बीएएमएस डॉक्टरों के अधिकांश क्लीनिक का इस कंपनी से कोई करार नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि इनका मेडिकल वेस्ट कहां जाता है।

निस्तारण करने वाली कंपनी भी सवालों के घेरे में
स्वास्थ्य विभाग इनविराड कंपनी की कार्यशैली को ही सवालों के कठघरे में खड़ा कर रहा है। बताया जाता है कि करीब महीने भर पहले स्वास्थ्य विभाग ने इस कंपनी को रेगुलर मेडिकल वेस्ट न उठाए जाने को लेकर नोटिस भी दिया था। मगर सांठगांठ के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वहीं पिछले दिनों एनजीटी ने भी इस कंपनी पर जुर्माना लगाया था।

तीन अस्पतालों का निरस्त होना था लाइसेंस, निपट गया मामला
बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में गड़बड़ी को लेकर करीब तीन महीने पहले स्वास्थ्य विभाग ने तीन अस्पताल में गड़बड़ी पकड़ी थी। इन पर कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्त करने के लिए सीएमओ ऑफिस को संस्तुति की गई थी। इसके बाद अस्पताल संचालकों ने सांठगांठ कर कागजी प्रक्रिया पूरी कर अपने लाइसेंस बचा लिए। वहीं नकटिया में एक बीएएमएस डॉक्टर के यहां मेडिकल वेस्ट को लेकर कोई इंतजाम न होने पर करीब महीने भर पहले कार्रवाई को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लिखा गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की मंशा पर भी सवाल उठ रहा है।

मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल करने वाली कमेटी में नगर निगम भी शामिल है। इसको लेकर नगर निगम को ध्यान देना चाहिए कि अस्पतालों से कूड़े के साथ मेडिकल वेस्ट नहीं कलेक्ट किया जाए। इस गड़बड़ी के लिए नगर निगम को नोटिस भी भेजा जाएगा।

- डॉ. अशोक कुमार, एसीएमओ

कूड़े के साथ मेडिकल वेस्ट नहीं कलेक्ट किया जा सकता। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाली एजेंसियों को इसकी हिदायत दी जाएगी। हो सकता है कि उनके कर्मचारी अनभिज्ञता में ऐसा कर रहे हों तो उन्हें ट्रेनिंग भी कराई जाएगी।
- ईश शक्ति सिंह, अपर नगर आयुक्त
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