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Bareilly News: उच्च शिक्षा की दौड़ में बेटियां आगे

Sun, 16 Nov 2025 02:59 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 16 Nov 2025 02:59 AM IST
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Girls are ahead in the race for higher education.
बरेली। उच्च शिक्षा हासिल करने में बेटियां आगे हैं। बरेली कॉलेज में संचालित 25 पाठ्यक्रमों के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। बीएससी गणित को छोड़कर अन्य सभी पाठ्यक्रमों में बेटियों की संख्या ज्यादा है। इनमें कई पाठ्यक्रम ऐसे हैं, जिनमें कुछ वर्ष पहले तक छात्रों का दबदबा रहता था।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पदक हासिल करने वाले छात्रों की कम संख्या को लेकर चिंता जाहिर की थी। बरेली कॉलेज के आंकड़े इसे सच साबित कर रहे हैं। इस वर्ष बरेली कॉलेज में स्नातक व परास्तनातक कोर्स में नए पंजीकरण कराने वाली छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। स्नातक प्रथम वर्ष में छात्राओं की संख्या 3630 है, जबकि छात्रों की संख्या सिर्फ 2214 है।
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बीएससी गणित में 383 छात्रों और 218 छात्राओं ने प्रवेश लिया है। हालांकि, एमए गणित में छात्रों की संख्या दो और छात्राओं की संख्या छह है। एमएससी सांख्यिकी में एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया है, छात्राओं की संख्या चार है। एमए इंग्लिश, एमए अर्थशास्त्र, हिंदी, राजनीति शास्त्र आदि में भी छात्राएं आगे हैं। संवाद
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कोर्स छात्र छात्राएं
बीए 665 1304
बीकॉम 544 566
बीएससी 229 538
बीएससी 383 218
एमए 28 68
एमए अंग्रेजी 19 140
एमए इतिहास 64 108
एमए हिंदी 15 65
एमए राजनीति शास्त्र 33 53
एमएससी रसायन विज्ञान 18 38
एमएससी गणित 45 60
एमएससी जीव विज्ञान 4 18
एसएससी समाजशास्त्र 16 135
एमए उर्दू 17 26
एमए ड्राइंग व पेंटिंग 2 23
एमएससी फिजिक्स 16 17
एमएससी जूलॉजी 6 16
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समाज में लड़कियों की स्थिति बदल रही है। हालांकि, उच्च शिक्षा में लड़कियों की संख्या बढ़ने का एक पक्ष यह भी है कि अधिकांश लोग जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक है वह लड़कों को पढ़ने के लिए बाहर भेजते हैं। लड़कियों को कॅरिअर बनाने की छूट तो मिल रही है मगर, ज्यादातर अभिभावक उन्हें बाहर नहीं भेजना चाहते।

- असिस्टेंट प्रो. अमित चिकारा, समाजशास्त्र विभाग
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पहले की अपेक्षा अब परिवार छोटे हो गए हैं। कई परिवारों में तो सिर्फ लड़कियां ही हैं। वहीं, अब माता-पिता अपनी बेटियों को आगे बढ़ाने पर मेहनत कर रहे हैं। पहले के समय में बच्चे ज्यादा होते थे तो इसलिए लड़कों को महत्व ज्यादा दिया जाता था। भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए भी अभिभावक बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। - यशिका वर्मा, कांउसलर व प्रवक्ता, मंडलीय मनोवैज्ञानिक केंद्र
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