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फफूंद से पता चलता है हजारों साल का इतिहास

Tue, 02 Nov 2021 01:14 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 02 Nov 2021 01:14 AM IST
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Fungus reveals thousands of years of history
bareilly college
कचरे और पौधों के तने पर उगने वाली फफूंद के बारे में वैज्ञानिकों ने दी जानकारी
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बरेली। बरेली कॉलेज में पौधों के नामकरण और हरबेरियम तकनीक पर आयोजित कार्यशाला में वैज्ञानिक डॉ. मनोज हेंब्रम ने कहा कि फंगस (फफूंद) को पौधों की तरह सुखाकर संरक्षित किए जाने से हजारों सालों के पृथ्वी के इतिहास की जानकारी मिल सकती है। फफूं द से निवासियों का पर्यावरण के प्रति दृष्टिकोण को आसानी से समझा जा सकता है। लिहाजा, हरबेरियम तैयार करना बेहद जरूरी होता है।
भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण द्वारा बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग में आयोजित कार्यशाला के दौरान वनस्पति सर्वेक्षण के वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र सिंह ने बरेली और उत्तराखंड में नमी, कम तापमान पर मिलने वाले ब्रायोफाइट की पहचान करने और उनके हरबेरियम निर्माण की जानकारी दी। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. एम पलानिस्वामी, डॉ. सुधीर कुमार यादव ने अपने-अपने प्रयोगों से शैवाल की पहचान, उनके हरबेरियम निर्माण की विधि बताई और शोध कार्यों की जानकारी दी। विद्यार्थियों को हरबेरियम निर्माण के लिए जरूरत पड़ने पर बोटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया से सहयोग की बात कही।
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इस दौरान कार्यशाला की संयोजिका वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी राजकीय महिला महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निशा वर्मा, बरेली कॉलेज बॉटनी विभाग के असिस्टेंट प्रो. राजीव यादव, स्वयंसेवक पुनीत यादव समेत कॉलेज के विद्यार्थी मौजूद रहे।
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