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जमीनों की हेराफेरी में एडीएम-एसडीएम के बाद डीएम-डिप्टी कमिश्नर भी घिरे
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बरेली। कीमती जमीनों पर कब्जे के एक से एक संगीन मामले सामने आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। कई मामलों में एसडीएम और एडीएम स्तर के अफसर पहले से फंसे हुए हैं, अब करोड़ों की जमीन पर कब्जा कराने का एक और मामला वाणिज्य कर विभाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ सामने आया है जिसमें पूर्व डीएम गौरव दयाल की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया है। बहेड़ी की इस जमीन को अवैध रूप से नीलाम कराकर उस पर एक विधायक और उसके रिश्तेदारों का कब्जा कराए जाने का आरोप है जिसकी कई सालों से लटकी जांच अब जाकर पूरी हुई है। जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस जमीन की नीलामी गलत तथ्यों के आधार पर कराई गई थी।
मामला बहेड़ी तहसील के गांव सैदपुर बुजुर्ग परगना चौमहला का है जहां करीब चार साल पहले वाणिज्य कर विभाग ने करोड़ों कीमत की एक जमीन नीलाम कराई थी। शासन में की गई शिकायत के मुताबिक इस नीलामी के लिए तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर खंड-2 महेश गिडवानी ने गलत तथ्य प्रस्तुत कर तत्कालीन डीएम गौरव दयाल से वर्ष 1979 यानी 36 साल पुराना 12550 रुपये का विक्रय पत्र जारी करा लिया था। आरोप है कि इस जमीन को अवैध रूप से नीलाम कराकर बहेड़ी के पूर्व विधायक अताउर्रहमान और उनके रिश्तेदारों से कब्जा करा दिया गया। यह जमीन इससे पहले कबीर खां नाम के शख्स ने खरीदी थी जिसने नीलामी प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसे अवैध बताते हुए तहसील से लेकर उच्चाधिकारियों तक के चक्कर काटे और उन्हें अपने दस्तावेज दिखाए लेकिन किसी ने उसकी शिकायत पर गौर नहीं किया।
जमीन की नीलामी के बाद कबीर खां ने इसकी शिकायत शासन में की तो जांच शुरू हो गई लेकिन करीब चार सालों से यह जांच भी सिर्फ कागजों पर दौड़ाई जाती रही। शासन के अफसरों के तमाम रिमाइंडर पर भी जांच आगे नहीं बढ़ी तो कबीर खां ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी। इसके साथ विधायक के जरिये विधानसभा में भी यह मामला उठाया तो इस मामले में दोबारा जांच ने रफ्तार पकड़ी। छह महीने पहले तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने इस मामले में जांच पूरी कराकर वाणिज्य कर कमिश्नर को रिपोर्ट भेज दी थी। चूंकि इस जांच रिपोर्ट में लीपापोती कर वाणिज्य कर विभाग के अफसरों को साफ बचा दिया गया था लिहाजा शासन ने इस पर दोबारा जांच करने का निर्देश दे दिया। इस पर पिछले महीने डीएम की ओर से वाणिज्य कर विभाग को फिर जमीन की नीलामी की जांच करने का निर्देश जारी कर दिया गया।
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हाल ही में एडिशनल कमिश्नर एमएन वर्मा ने विभागीय जांच रिपोर्ट डीएम कार्यालय को भेज दी है। सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर महेश गिडवानी की ओर से गलत तथ्य पेश कर जमीन की नीलामी कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के साथ इससे संबंधित रिकॉर्ड का भी जिक्र किया गया है। सूत्रों के मुताबिक यह रिपोर्ट अब शासन को भेजी जाएगी जिसके बाद कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
नीलामी में नाबालिग की जमीन भी समेट ली
इस मामले का एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि वाणिज्य कर विभाग के तत्कालीन अफसरों ने जमीन के एक नाबालिग साझीदार चंद्रप्रकाश खंडूजा की जमीन को भी अवैध तरीके से नीलाम कर दिया था। इसके लिए वाणिज्य कर विभाग ने अपने वसूली पत्र यानी आरसी में चंद्रप्रकाश को बालिग तक दिखा दिया। सूत्रों के मुताबिक लगातार शिकायतों के बावजूद जब जिले से लेकर शासन तक के अफसरों ने गंभीरता नहीं दिखाई तो इस मामले में पहले स्थानीय न्यायालय और फिर हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी गई। इसके बाद अफसर जांच पर गंभीर हुए। बताया जाता है कि नीलाम हुई जमीन किला निवासी कबीर खां और अजर खां ने खरीदी थी और तब वाणिज्य कर विभाग ने इस पर कोई आपत्ति नहीं की थी।
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मामला बहेड़ी तहसील के गांव सैदपुर बुजुर्ग परगना चौमहला का है जहां करीब चार साल पहले वाणिज्य कर विभाग ने करोड़ों कीमत की एक जमीन नीलाम कराई थी। शासन में की गई शिकायत के मुताबिक इस नीलामी के लिए तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर खंड-2 महेश गिडवानी ने गलत तथ्य प्रस्तुत कर तत्कालीन डीएम गौरव दयाल से वर्ष 1979 यानी 36 साल पुराना 12550 रुपये का विक्रय पत्र जारी करा लिया था। आरोप है कि इस जमीन को अवैध रूप से नीलाम कराकर बहेड़ी के पूर्व विधायक अताउर्रहमान और उनके रिश्तेदारों से कब्जा करा दिया गया। यह जमीन इससे पहले कबीर खां नाम के शख्स ने खरीदी थी जिसने नीलामी प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसे अवैध बताते हुए तहसील से लेकर उच्चाधिकारियों तक के चक्कर काटे और उन्हें अपने दस्तावेज दिखाए लेकिन किसी ने उसकी शिकायत पर गौर नहीं किया।
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जमीन की नीलामी के बाद कबीर खां ने इसकी शिकायत शासन में की तो जांच शुरू हो गई लेकिन करीब चार सालों से यह जांच भी सिर्फ कागजों पर दौड़ाई जाती रही। शासन के अफसरों के तमाम रिमाइंडर पर भी जांच आगे नहीं बढ़ी तो कबीर खां ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी। इसके साथ विधायक के जरिये विधानसभा में भी यह मामला उठाया तो इस मामले में दोबारा जांच ने रफ्तार पकड़ी। छह महीने पहले तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने इस मामले में जांच पूरी कराकर वाणिज्य कर कमिश्नर को रिपोर्ट भेज दी थी। चूंकि इस जांच रिपोर्ट में लीपापोती कर वाणिज्य कर विभाग के अफसरों को साफ बचा दिया गया था लिहाजा शासन ने इस पर दोबारा जांच करने का निर्देश दे दिया। इस पर पिछले महीने डीएम की ओर से वाणिज्य कर विभाग को फिर जमीन की नीलामी की जांच करने का निर्देश जारी कर दिया गया।
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हाल ही में एडिशनल कमिश्नर एमएन वर्मा ने विभागीय जांच रिपोर्ट डीएम कार्यालय को भेज दी है। सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर महेश गिडवानी की ओर से गलत तथ्य पेश कर जमीन की नीलामी कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के साथ इससे संबंधित रिकॉर्ड का भी जिक्र किया गया है। सूत्रों के मुताबिक यह रिपोर्ट अब शासन को भेजी जाएगी जिसके बाद कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
नीलामी में नाबालिग की जमीन भी समेट ली
इस मामले का एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि वाणिज्य कर विभाग के तत्कालीन अफसरों ने जमीन के एक नाबालिग साझीदार चंद्रप्रकाश खंडूजा की जमीन को भी अवैध तरीके से नीलाम कर दिया था। इसके लिए वाणिज्य कर विभाग ने अपने वसूली पत्र यानी आरसी में चंद्रप्रकाश को बालिग तक दिखा दिया। सूत्रों के मुताबिक लगातार शिकायतों के बावजूद जब जिले से लेकर शासन तक के अफसरों ने गंभीरता नहीं दिखाई तो इस मामले में पहले स्थानीय न्यायालय और फिर हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी गई। इसके बाद अफसर जांच पर गंभीर हुए। बताया जाता है कि नीलाम हुई जमीन किला निवासी कबीर खां और अजर खां ने खरीदी थी और तब वाणिज्य कर विभाग ने इस पर कोई आपत्ति नहीं की थी।