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साहब नहीं चाहते कि नाजिर का चिट्ठा सामने आए

Sun, 01 Sep 2019 12:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 01 Sep 2019 12:36 AM IST
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साहब नहीं चाहते थे, नायब नाजिर का चिट्ठा सामने आए
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-दो साल से लेखा टीम को रिकार्ड देने से टकरा रहे थे मीरगंज के अफसर
-लाखों के गबन में निलंबित चल रहे हैं नायब नाजिर की जांच अब तक पेंडिंग
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। लाखों के गबन में फंसे नायब नाजिर को बचाने और लेखा टीम को रिकार्ड न देने के मामले में कई एसडीएम और तहसीलदार की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। अपर आयुक्त प्रशासन की तरफ से कई बार मीरगंज के एसडीएम और तहसीलदार को नोटिस देने के बावजूद लेखा टीम की जांच के लिए कोई रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं कराए गए। जबकि कुछ समय पहले ही एसडीएम बनाए गए राजेश चंद्र को तहसील की नजारत में ही इस प्रकरण से संबंधित सभी रिकार्ड मिल गए, जिन्हें पहले अधिकारी अभिलेख न मिल पाने की बात कहते हुए कन्नी काटते रहे।

मीरगंज में तैनात रहे नायब नाजिर शशिकांत के खिलाफ यह मामला खुला था कि उन्होंने वर्ष 2015-16 और वर्ष 2016-17 के दौरान 868745 रुपये की सरकारी रकम जमा ही नहीं की। इसके अलावा उनके खिलाफ कई और भी वित्तीय गड़बड़ी सामने आईं थी। इसके बाद शशिकांत सस्पेंड हो गए लेकिन इस प्रकरण में बड़ा घोटाला होने की संभावना जताते हुए उच्चाधिकारियों ने लेखा टीम से इसकी जांच कराए जाने के निर्देश दिए थे। सितंबर 2017 में इस प्रकरण की विशेष जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष टीम भी भेजी गई थी लेकिन तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार ने जांच टीम को रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं कराए। इस वजह से इसकी जांच भी नहीं हो सकी। इसके बाद यह मामला लंबे समय तक ठंडा पड़ा रहा लेकिन 15 जुलाई 2019 में राजस्व परिषद के कड़े निर्देश के बाद तहसीलदार मीरगंज को एक बार फिर से मामले से संबंधित रिकार्ड पेश करने को कहा गया, ताकि लेखा टीम लंबे समय से लटके इस घोटाले की सच्चाई को उजागर कर सके। इसके बाद 27 जुलाई को लेखा टीम फिर से मीरगंज पहुंची लेकिन अधिकारियों ने पूरे अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। हाल में एसडीएम के तौर पर तैनात हुए राजेश चंद्र ने कार्यभार लेने के कुछ ही दिन बाद इस प्रकरण से संबंधित सभी रिकार्ड डीएम को सौंप दिए हैं। उनका कहना है कि मीरगंज तहसील की नजारत में ही सभी अभिलेख मौजूद थे। इधर अब इस मामले नायब नाजिर के साथ लेखा टीम को अभिलेख न देने वाले दो साल के दौरान तैनात रहे तहसीलदार और एसडीएम की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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