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दहशत में भूले सुधबुध- 1 लाख मास्क बिक गए तीन दिन के अंदर

Fri, 20 Mar 2020 02:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2020 02:33 AM IST
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Forgotten in horror - 1 lakh masks sold within three days
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो

आने वाली मुसीबत से अनजान कारोबारी कोरोना की दहशत को कैश करने में जुटे

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बरेली। कोरोना की दहशत को बाजार जी भरकर कैश करने में जुटा हुआ है। कुछ ही दिनों में मास्क बनाने का धंधा बड़े कारोबार में तब्दील हो गया है। ठेले-खोमचों तक मास्क बिकने लगे हैं। अनुमान जताया जा रहा है कि पिछले तीन दिनों में ही शहर में एक लाख से ज्यादा मास्क की सेल हुई है। कोरोना की दहशत के बावजूद मास्क पर फैशन का भी असर दिख रहा है। बाजार में अलग-अलग कलर और डिजाइन के मास्क की भरमार है।
कोरोना से बचने के लिए लोग एहतियात बरत रहे हैं और मुनाफाखोर इसका जमकर फायदा उठा रहे हैं। दर्जियों की दुकानों पर मास्क बनवाकर उन्हें ठेले-खोमचों तक पर बेचा जा रहा है। न मास्क बनाने और बेचने वालों ने उसे प्रमाणित कराया है न बड़ी दुकानों पर छापे मार रहे एफएसडीए का ध्यान इधर है। दहशत में डूबे लोग भी बगैर कुछ सोचे-समझे धड़ाधड़ मास्क खरीद रहे हैं। कुतुबखाना, कोहाड़ापीर, कोतवाली इलाके में सड़क पर लग रहे बाजारों में ठेले, खोमचे पर भी मास्क बेचे जा रहे हैं। इनकी कीमत 50 रुपये तक है।
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दो करोड़ के पार मास्क का कारोबार
केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी दुर्गेश खटवानी के मुताबिक जिले में करीब एक लाख से ज्यादा मास्क की बिक्री पिछले सप्ताह में हुई है। प्रमाणित मास्क की कीमत उपयोगिता के आधार पर 15 रुपये से लेकर डेढ़ सौ रुपये तक है लेकिन तमाम दुकानदार मास्क की किल्लत होने के कारण ऊंची कीमतों पर बेच रहे हैं। उन्होंने करीब दो करोड़ रुपये तक का मास्क का कारोबार होने की बात कही है।
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..मगर सच यह है कि कोरोना
से नहीं बचा पाएगा मास्क
विशेषज्ञों ने कहा है कि मास्क वायु प्रदूषण से तो बचा सकता है लेकिन कोरोना से बचाने में सक्षम नहीं हैं। सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन की जानकारी न होने से ही लोग भ्रम में हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक मास्क का उपयोग सिर्फ कोरोना से संक्रमित और उसके संपर्क में आने वाले लोगों के लिए अनिवार्य है। ऐसे लोगों के इलाज में जुटे डॉक्टर, नर्स, स्टाफ समेत अस्पताल जा रहे लोगों को मास्क पहनना चाहिए क्योंकि वहां जांच के लिए पहुंच रहे लोगों में कौन संक्रमित है, यह टेस्ट के बाद ही पता चलता है। सरकार ने भी इन्हीं स्थानों के लिए मास्क अनिवार्य किया है। उन्होंने बताया कि शहर में बिक रहे मास्क कारगर नहीं हैं। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए एन 95 या 99 मास्क ही कारगर है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस का संक्रमण सांस के जरिये नहीं फैलता बल्कि संक्रमित व्यक्ति के छूने से फैलता है। डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक कोरोना वायरस छींक या खांसी के जरिए पास की दीवार, फर्नीचर, ग्लास या अन्य किसी वस्तु या पदार्थ पर चिपक जाता है। इस स्थान को छूने पर ही कोरोना का संक्रमण हो सकता है। दहशत की वजह से लोग मास्क भले ही लगा रहे हों लेकिन यह कारगर नहीं है।
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