{"_id":"5d1e56a98ebc3e3ca626edf2","slug":"feaver-bareilly-news-bly3673163199","type":"story","status":"publish","title_hn":"चाइनीज मांझा बिकता रहेगा... गर्दनें कटती रहेंगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चाइनीज मांझा बिकता रहेगा... गर्दनें कटती रहेंगी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। हवा में लहराती बला लोगों के गले पड़ती रहेगी। चाइनीज मांझा धड़ल्ले से बिकता रहेगा और गर्दनें भी कटती रहेंगी, क्योंकि पतंगबाजों को आसानी से मिल जाने वाला ये खूनी मांझा प्रशासन को ढूंढे से भी नहीं मिल रहा। कलक्ट्रेट के बाबू और एक मासूम बच्ची की गर्दन कटने के बाद अफसरशाही चेती, लेकिन धंधेबाज उनसे ज्यादा चेत गए। गुरुवार को भी सिटी मजिस्ट्रेट ने टीम के साथ बाकरगंज, बाजार संदल खां में चाइनीज मांझे की तलाश में छापे मारे, लेकिन नतीजा वही निकला जो निकलना था। अफसरों को खाली हाथ लौटना पड़ा। हां इतना जरूर हो पाया कि अफसर बिना रजिस्ट्रेशन वाला रैपर साथ ले आए।
ब्लेड जैसी धार वाले प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। श्यामगंज फ्लाईओवर और किला और चौपुला ओवरब्रिज पर राहगीर आए दिन जख्मी हो रहे हैं। सोमवार को कलक्ट्रेट के एक बाबू और एक मासूम बच्ची की गर्दन लहूलुहान हो गई थी। इसके बाद प्रशासन कुछ गंभीर जरूर हुआ, लेकिन गर्दनें काटने वाले मांझे का पता नहीं लगा पाया। बृहस्पतिवार को भी सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार और एसीएम फर्स्ट मदन कुमार ने टीम के साथ बाकरगंज में छापा मार कार्रवाई की। वहां ईदगाह के पास कारीगर धागे से सामान्य मांझे ही बनाते हुए मिले। उनसे चाइनीज मांझे के बारे में पूछा गया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। टीम ने बाजार संदल खां में शाकिर नाम के एक मांझा के कारखाना संचालक के यहां भी चेकिंग की। टीम ने गोदाम के कोने-कोने में गत्तों में रखे स्टॉक को खंगाला। वहां हजारों की तादाद में चरखी और मांझे तो थे, लेकिन चाइनीज मांझे का स्टॉक का कोई अता-पता नहीं चला। हालांकि यहां कई नाम से रैपर मांझों की चरखियों पर लगाए जा रहे थे, जबकि कारखाना मालिक के पास अपने ट्रेडमार्क का कोई रैपर नहीं था। टीम जांच के लिए रैपर ले आई। अधिकारी दुकानदारों को यह चेतावनी दे गए कि वह फिर चेकिंग करेंगे। चाइनीज मांझा मिला तो किसी भी हालत में छोड़ेंगे नहीं।
चाइनीज मांझों को लेकर एक-दूसरे को बता रहे जिम्मेदार
प्रशासन की टीम ने पहले जब सराय खा और बांस मंडी में छापा मार था तो कई दुकानदारों ने यह बताया था कि चाइनीज मांझे का बाकरगंज में स्टॉक है। लेकिन जब टीम बाकरगंज पहुंची तो विक्रेताओं ने बताया कि सारा कारोबार सुनहरी मस्जिद के पास कुछ दुकानदार कर रहे हैं। करीब दो साल पहले एक ट्रांसपोर्ट से बड़ी मात्रा में चाइनीज मांझा भी मिला था, जो इसमें से ही एक दुकानदार का था। सिटी मजिस्ट्रेट ने जब एक विक्रेता से यह पूछा यह किसका मांझा था तो वह चुप्पी साध गया।
विज्ञापन
‘चाइनीज मांझे से पतंगबाजी हो रही है और उससे लोग भी जख्मी हो रहे हैं। इससे यह तो साबित हो रहा है कि चोरी-छिपे यह मांझा खूब बिक रहा है, लेकिन अभी इसकी बरामदगी नहीं हो पा रही है। आगे भी छापेमार कार्रवाई जारी रहेगी।’
- संजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
विज्ञापन
ब्लेड जैसी धार वाले प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। श्यामगंज फ्लाईओवर और किला और चौपुला ओवरब्रिज पर राहगीर आए दिन जख्मी हो रहे हैं। सोमवार को कलक्ट्रेट के एक बाबू और एक मासूम बच्ची की गर्दन लहूलुहान हो गई थी। इसके बाद प्रशासन कुछ गंभीर जरूर हुआ, लेकिन गर्दनें काटने वाले मांझे का पता नहीं लगा पाया। बृहस्पतिवार को भी सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार और एसीएम फर्स्ट मदन कुमार ने टीम के साथ बाकरगंज में छापा मार कार्रवाई की। वहां ईदगाह के पास कारीगर धागे से सामान्य मांझे ही बनाते हुए मिले। उनसे चाइनीज मांझे के बारे में पूछा गया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। टीम ने बाजार संदल खां में शाकिर नाम के एक मांझा के कारखाना संचालक के यहां भी चेकिंग की। टीम ने गोदाम के कोने-कोने में गत्तों में रखे स्टॉक को खंगाला। वहां हजारों की तादाद में चरखी और मांझे तो थे, लेकिन चाइनीज मांझे का स्टॉक का कोई अता-पता नहीं चला। हालांकि यहां कई नाम से रैपर मांझों की चरखियों पर लगाए जा रहे थे, जबकि कारखाना मालिक के पास अपने ट्रेडमार्क का कोई रैपर नहीं था। टीम जांच के लिए रैपर ले आई। अधिकारी दुकानदारों को यह चेतावनी दे गए कि वह फिर चेकिंग करेंगे। चाइनीज मांझा मिला तो किसी भी हालत में छोड़ेंगे नहीं।
विज्ञापन
चाइनीज मांझों को लेकर एक-दूसरे को बता रहे जिम्मेदार
प्रशासन की टीम ने पहले जब सराय खा और बांस मंडी में छापा मार था तो कई दुकानदारों ने यह बताया था कि चाइनीज मांझे का बाकरगंज में स्टॉक है। लेकिन जब टीम बाकरगंज पहुंची तो विक्रेताओं ने बताया कि सारा कारोबार सुनहरी मस्जिद के पास कुछ दुकानदार कर रहे हैं। करीब दो साल पहले एक ट्रांसपोर्ट से बड़ी मात्रा में चाइनीज मांझा भी मिला था, जो इसमें से ही एक दुकानदार का था। सिटी मजिस्ट्रेट ने जब एक विक्रेता से यह पूछा यह किसका मांझा था तो वह चुप्पी साध गया।
विज्ञापन
‘चाइनीज मांझे से पतंगबाजी हो रही है और उससे लोग भी जख्मी हो रहे हैं। इससे यह तो साबित हो रहा है कि चोरी-छिपे यह मांझा खूब बिक रहा है, लेकिन अभी इसकी बरामदगी नहीं हो पा रही है। आगे भी छापेमार कार्रवाई जारी रहेगी।’
- संजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट