{"_id":"610ae5408ebc3eb9fc43e376","slug":"every-employee-of-both-the-meat-factories-will-be-verified-police-asked-for-records-bareilly-news-bly4553081119","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोनों मीट फैक्टरियों के हर कर्मचारी का होगा सत्यापन, पुलिस ने मांगा रिकॉर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोनों मीट फैक्टरियों के हर कर्मचारी का होगा सत्यापन, पुलिस ने मांगा रिकॉर्ड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। कैंट इलाके की मारिया फ्रोजन मीट फैक्टरी से बांग्लादेशी आले मियां और अब्दुल शकूर उर्फ गनी की लखनऊ एटीएस के गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने भी जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। मारिया और उससे सटी रहबर फूड्स मीट फैक्टरी में कई कश्मीरियों के भी नौकरी करने की सूचना पर वहां के हर कर्मचारी का सत्यापन कराए जाने की तैयारी की जा रही है। पुलिस ने दोनों फैक्टरियों के प्रबंधन से बाकायदा फार्म पर कर्मचारियों का पूरा ब्योरा मांगा है।
लखनऊ एटीएस ने मानव तस्करी के मामले में कैंट इलाके की मारिया फ्रोजन मीट फैक्टरी से बांग्लादेशी आले मियां और अब्दुल शकूर उर्फ गनी को गिरफ्तार किया था। दोनों करीब दो महीने से मारिया में नौकरी कर रहे थे। इनकी गिरफ्तारी के बाद कैंट पुलिस सक्रिय हुई तो पता चला है कि मारिया और उससे सटी रहबर फूड्स मीट फैक्टरी में तमाम कश्मीरी भी काम कर रहे हैं। न तो पुलिस को उनके बारे में सूचना दी गई है न ही उनका सत्यापन कराया गया है। एडीजी अविनाश चंद्र ने इसे गंभीर मानते हुए दोनों फैक्टरियों के सभी कर्मचारियों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे।
बुधवार को कैंट पुलिस की टीम दोनों मीट फैक्टरियों में पहुंची और प्रबंधन के लोगों को वहां काम कर रहे प्रत्येक कर्मचारी का सत्यापन कराने का निर्देश दिया। इंस्पेक्टर कैंट राजीव सिंह ने बताया कि फैक्टरी के प्रत्येक कर्मचारी का ब्योरा प्रबंधन फार्म भरवाकर देगा। यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सभी कर्मचारियों का ब्योरा मिलने के बाद उनका उनके मूल निवास से भी सत्यापन कराया जाएगा।
विज्ञापन
एटीएस का दावा मारिया फ्रोजन से पकड़े गए
मारिया फ्रोजन की ओर से पत्र देकर बताया गया है कि बांग्लादेशी रहबर फूड्स में काम करते थे। दोनों ही फैक्टरी का प्रबंधन अपने सभी कर्मचारियों का ब्योरा उपलब्ध करा रहा है। उनके मूल निवास से उसका सत्यापन कराया जाएगा। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी
इस मामले में विवेचक की ओर से संयुक्त निदेशक अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट बनाया है जो भारत-बांग्लादेश सीमा पर सक्रिय है। यह गिरोह म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेश नागरिकों को प्रलोभन देकर शोषण के लिए तस्करी कर भारत ला रहा है। आरोपियों ने मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा और गाजियाबाद में जिन लोगों से संपर्क कर जाली दस्तावेज बनवाए हैं, उनकी बरामदगी करना है। वहीं इस शामिल लोगों की शिनाख्त करनी है। साथ ही साक्ष्य संकलन के लिए आरोपियों को मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हैदराबाद व जम्मू-कश्मीर समेत अन्य जगहों पर ले जाना है। इन तर्कों के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया। ब्यूरो
विज्ञापन
लखनऊ एटीएस ने मानव तस्करी के मामले में कैंट इलाके की मारिया फ्रोजन मीट फैक्टरी से बांग्लादेशी आले मियां और अब्दुल शकूर उर्फ गनी को गिरफ्तार किया था। दोनों करीब दो महीने से मारिया में नौकरी कर रहे थे। इनकी गिरफ्तारी के बाद कैंट पुलिस सक्रिय हुई तो पता चला है कि मारिया और उससे सटी रहबर फूड्स मीट फैक्टरी में तमाम कश्मीरी भी काम कर रहे हैं। न तो पुलिस को उनके बारे में सूचना दी गई है न ही उनका सत्यापन कराया गया है। एडीजी अविनाश चंद्र ने इसे गंभीर मानते हुए दोनों फैक्टरियों के सभी कर्मचारियों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
बुधवार को कैंट पुलिस की टीम दोनों मीट फैक्टरियों में पहुंची और प्रबंधन के लोगों को वहां काम कर रहे प्रत्येक कर्मचारी का सत्यापन कराने का निर्देश दिया। इंस्पेक्टर कैंट राजीव सिंह ने बताया कि फैक्टरी के प्रत्येक कर्मचारी का ब्योरा प्रबंधन फार्म भरवाकर देगा। यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सभी कर्मचारियों का ब्योरा मिलने के बाद उनका उनके मूल निवास से भी सत्यापन कराया जाएगा।
विज्ञापन
अलीगढ़ में छह महीने काम कर चुके थे बांग्लादेशी
पुलिस के मुताबिक बरेली से आने से पहले आले मियां और अब्दुल शकूर करीब छह महीने तक अलीगढ़ में काम कर चुके थे। इसके बाद ही दोनों बरेली आ गए और मीट फैक्टरी में नौकरी करने लगे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उन्होंने फर्जी पहचानपत्र और पैन कार्ड कहां बनवाए थे।एटीएस का दावा मारिया फ्रोजन से पकड़े गए
रहबर ने कहा- हमारे कर्मचारी थे बांग्लादेशी
एटीएस ने दोनों बांग्लादेशियों के मारिया मीट फैक्टरी में काम करने की बात कही है मगर मारिया के मैनेजर ईशान खान का कहना है कि दोनों बांग्लादेशी रहबर फूड्स से पकड़े गए। वह पहले उस फैक्टरी को भी चलाते थे मगर अब मारिया का उससे कोई लेेना देना नहीं है। पांच साल पहले उन लोगों ने अपना शेयर खत्म कर लिया है और अब उस फैक्टरी का नाम रहबर फूड्स है। बांग्लादेशी वहीं काम करते थे। इस संबंध में वह एसएसपी और एटीएस को अवगत करा चुके हैं। रहबर फूड्स ने भी एसएसपी को पत्र भेजा है जिसमें कहा है कि दोनों बांग्लादेशी उनकी फैक्टरी में काम करते थे और ठेकेदार के जरिये रखे गए थे। कश्मीरी कर्मचारियों के संबंध में ईशान का कहना है कि सबकी फाइल तैयार करके वह एलआईयू समेत अन्य खुफिया इकाइयों को दे चुके हैं। कैंट पुलिस को भी एक फाइल दी जा रही है। उनके यहां कश्मीर के सिर्फ एक-दो व्यक्ति ही काम करते हैं।मारिया फ्रोजन की ओर से पत्र देकर बताया गया है कि बांग्लादेशी रहबर फूड्स में काम करते थे। दोनों ही फैक्टरी का प्रबंधन अपने सभी कर्मचारियों का ब्योरा उपलब्ध करा रहा है। उनके मूल निवास से उसका सत्यापन कराया जाएगा। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी
अब्दुल शकूर और आले मियां सात दिन के पुलिस रिमांड पर
लखनऊ। बांग्लादेशी महिलाओं, बच्चों और रोहिंग्या को अवैध रूप से भारत लाने के आरोपी अब्दुल शकूर उर्फ गनी और आले मियां को विशेष अदालत ने बुधवार को सात दिन के लिए पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है। एटीएस दोनों से पांच अगस्त सुबह 11 बजे से 12 अगस्त सुबह 11 बजे तक पूछताछ करेगी।इस मामले में विवेचक की ओर से संयुक्त निदेशक अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट बनाया है जो भारत-बांग्लादेश सीमा पर सक्रिय है। यह गिरोह म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेश नागरिकों को प्रलोभन देकर शोषण के लिए तस्करी कर भारत ला रहा है। आरोपियों ने मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा और गाजियाबाद में जिन लोगों से संपर्क कर जाली दस्तावेज बनवाए हैं, उनकी बरामदगी करना है। वहीं इस शामिल लोगों की शिनाख्त करनी है। साथ ही साक्ष्य संकलन के लिए आरोपियों को मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हैदराबाद व जम्मू-कश्मीर समेत अन्य जगहों पर ले जाना है। इन तर्कों के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया। ब्यूरो