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Lakhimpuri Kheri: हाथियों ने तहस-नहस कर दी वन विभाग की नर्सरी, चौकीदार और माली ने भागकर बचाई जान

Tue, 10 Jan 2023 06:01 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 10 Jan 2023 06:01 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी में महेशपुर जंगल से निकलकर भूखे हाथी उत्पात मचा रहे हैं। लगातार दूसरे दिन हाथियों ने उत्पात मचाया है। इस बार वन विभाग की नर्सरी को तहस-नहस कर दिया। नर्सरी के चौकीदार और माली ने बामुश्किल अपनी जान बचाई। 

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Elephants destroyed the nursery of the Forest Department in Lakhimpuri Kheri
हाथियों का झुंड (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी के ममरी क्षेत्र में सोमवार की रात जंगली हाथी उत्पात मचाते हुए देवीपुर वीट के जंगल में स्थित वन विभाग की नर्सरी में घुस गए और पौधों को रौंदकर तहस-नहस कर डाला। नर्सरी की रखवाली कर रहे चौकीदार और माली ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई। एक दिन पूर्व हाथियों ने खेतों में खड़ी फसलों को नष्ट कर दिया था। 
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वनरक्षक नरेंद्र वर्मा ने बताया कि भूख लगने पर जंगल से बाहर निकले हाथियों ने गांव रायपुर, शिवपुरी निवासी किसानों के खेतों में खड़ा गन्ना खाकर अपनी भूख मिटाई और फिर वापस देवीपुर जंगल में आ गए। रेंजर नरेश पाल सिंह का कहना है कि हाथी दिन भर तो जंगल में रहते हैं और रात होने पर भूख मिटाने खेतों में निकल जाते हैं। जिनके सामने किसी का बस नहीं चल पा रहा है।
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Elephants destroyed the nursery of the Forest Department in Lakhimpuri Kheri
नर्सरी के हाथियों के पैरों के निशान - फोटो : अमर उजाला

रविवार को फसलें कर दी थीं नष्ट 

रविवार की रात महेशपुर जंगल से देवीपुर बीट के जंगल में पहुंचे हाथियों के झुंड ने उत्पात मचाया था। रायपुर बंजरिया मूड़ा गालिब गांव के पास भूखे हाथियों ने शिव शंकर लाल, सुरेश यादव, विक्रम सिंह, राहुल यादव, वीरेंद्र यादव, विनोद कुमार आदि किसानों के खेतों में खड़ी गन्ना, गेहूं, मसूर की फसल रौंदकर तहस-नहस कर डाली। 

किसानों की सूचना पर पहुंचे फॉरेस्टर जगदीश वर्मा, वनरक्षक राजकुमार आदि वनकर्मियों ने बर्बाद हुई फसलों का निरीक्षण कर किसानों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही गांव वालों को सतर्क रहने की सलाह दी। पीड़ित किसानों का कहना है कि जंगल के आसपास लहन पीकर मदमस्त हो रहे हैं। इसलिए हाथी जंगल नहीं छोड़ रहे हैं। 
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