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बरेली कॉलेज की परीक्षाएं संदेह के घेरे में
बरेली
Updated Tue, 31 Mar 2015 12:51 AM IST
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बरेली कॉलेज में एमएससी प्रथम वर्ष केमिस्ट्री का द्वितीय पेपर आउट होकर बाहर से इसकी कॉपी लिखकर आने के मामले ने कॉलेज प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सछास का पूर्व प्रदेश सचिव विक्रम सिंह गंगवार कैसे कॉपी बाहर ले गया। कैसे उसने सॉल्वर तक पेपर पहुंचा दिया और बाद में कैसे परीक्षा कक्ष तक उसके पास कॉपी लिखकर पहुंच गई? यह ऐसे सवाल हैं, जो इस मामले में कॉलेज कर्मियों के शामिल होने का संदेह पैदा करते हैं।
कॉलेज के पश्चिमी और पूर्वी दोनों गेटों पर चीफ प्रॉक्टर की टीम हर-आने जाने वाले की छानबीन करती है। परीक्षार्थियों की तलाशी ली जाती है। किसी बाहरी को अंदर नहीं आने दिया जाता है फिर भी इतना बड़ा खेल कैसे हो गया। यह बात हर किसी के गले नहीं उतर रही है। दबंगई करने वाले छात्रनेताओं के टॉपर बन जाने की कहानी भी इसी तरह की करतूत से जुड़ा होने की ओर संकेत कर रही है। हालांकि यह जांच का विषय है लेकिन बरेली कॉलेज में पिछले सालों में भी नकल के मामले, दाखिला बिना एक्जाम में शामिल किए जाने के मामले और भी ऐसे तमाम प्रकरण संदेह बढ़ाते हैं।
सछास के इस छात्र नेता विक्रम की कोचिंग चलती है। बताया गया है कि इसमें कॉलेज के कुछ शिक्षक भी पढ़ाते हैं। इन्हीं से इस छात्र नेता के अच्छे संबंध हैं इसीलिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस मामले में इन्हीं में से किसी ने विक्रम की मदद की। वरना यह काम आसान नहीं था। कॉलेज के सूत्रों ने बताया कि सोमवार की परीक्षा में इस छात्र नेता का व्यवहार शुरू से संदिग्ध रहा। यह टायलेट के बहाने परीक्षा कक्ष से बाहरा गया। अब यह बात अलग है कि उसने जेब में रखा पेपर कॉलेज से बाहर नहीं तो इतने बड़े कॉलेज के किसी विभाग में भिजवा दिया होगा, जहां सॉल्वर बैठा होगा। माना जा रहा है कि इससे पूर्व की परीक्षाओं में भी इस तरह के खेल किए गए लेकिन कभी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। हो सकता है कि इस बार भी मामला दब जाता लेकिन एक तेजतर्रार स्थाई शिक्षक की नजरें परीक्षार्थी की संदिग्ध स्थिति को ताड़ गईं और इसके बाद मामले पकड़ में आते देर नहीं लगी।
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बरेली कॉलेज के कुछ प्रकरण
लॉ की परीक्षा के निरीक्षण को पहुंचे कुलपति से छात्र नेताओं ने दुर्व्यवहार किया।
एलएलबी की परीक्षाओं में नकल के कई मामले सामने आए, इसीलिए कॉलेज प्रशासन को विधि विभाग से हटाकर दूसरे विभाग में परीक्षा करानी पड़ी।
नकल की कोशिश रोकने पर शिक्षकों से अभद्रता की गई।
वर्जन------
मैं दो दिन के लिए बाहर हूं। फोन पर मुझे इस मामले की जानकारी दी गई, जिस पर मैंने कार्रवाई के निर्देश वरिष्ठ केंद्राध्यक्ष को दे दिए थे। मामला वाकई गंभीर है और इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूर कराई जाएगी।
-डॉ. सोमेश यादव, प्राचार्य बरेली कॉलेज
---------
बरेली कॉलेज की रिपोर्ट अभी मिली नहीं है, इसीलिए पूरा मामला संज्ञान में नहीं आया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही पूरे मामले को देखेंगे और जांच कराकर हर हाल में कार्रवाई की जाएगी।
-एके सिंह, कुलसचिव- रुहेलखंड विश्वविद्यालय
इंसेट...
::::छात्र नेता का वर्जन...
मैं तो परीक्षा देकर कॉलेज से घर चला आया था। वही कॉपी जमा की, जो परीक्षा कक्ष में मिली थी। मुझे नहीं पता कॉपी कैसे बदल गई। मुझे तो इस मामले की जानकारी ही नहीं है और अगर मेरी कॉपी बदली गई है तो कॉलेज वाले ही बताएंगे कि यह कैसे हुआ। अगर मेरे स्तर से ऐसा हुआ होता तो मुझे मौके पर ही क्यों नहीं पकड़ा। मुझे अपने खिलाफ यह साजिश नजर आती है, क्योंकि मैं छात्र नेता हूं और कॉलेज में छात्रों के मुद्दे उठाता रहता हूं।
-विक्रम सिंह गंगवार, पूर्व प्रदेश सचिव-सछास
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इंसेट...
सछास नेताओं ने खड़े किए हाथ
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कॉलेज के पश्चिमी और पूर्वी दोनों गेटों पर चीफ प्रॉक्टर की टीम हर-आने जाने वाले की छानबीन करती है। परीक्षार्थियों की तलाशी ली जाती है। किसी बाहरी को अंदर नहीं आने दिया जाता है फिर भी इतना बड़ा खेल कैसे हो गया। यह बात हर किसी के गले नहीं उतर रही है। दबंगई करने वाले छात्रनेताओं के टॉपर बन जाने की कहानी भी इसी तरह की करतूत से जुड़ा होने की ओर संकेत कर रही है। हालांकि यह जांच का विषय है लेकिन बरेली कॉलेज में पिछले सालों में भी नकल के मामले, दाखिला बिना एक्जाम में शामिल किए जाने के मामले और भी ऐसे तमाम प्रकरण संदेह बढ़ाते हैं।
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सछास के इस छात्र नेता विक्रम की कोचिंग चलती है। बताया गया है कि इसमें कॉलेज के कुछ शिक्षक भी पढ़ाते हैं। इन्हीं से इस छात्र नेता के अच्छे संबंध हैं इसीलिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस मामले में इन्हीं में से किसी ने विक्रम की मदद की। वरना यह काम आसान नहीं था। कॉलेज के सूत्रों ने बताया कि सोमवार की परीक्षा में इस छात्र नेता का व्यवहार शुरू से संदिग्ध रहा। यह टायलेट के बहाने परीक्षा कक्ष से बाहरा गया। अब यह बात अलग है कि उसने जेब में रखा पेपर कॉलेज से बाहर नहीं तो इतने बड़े कॉलेज के किसी विभाग में भिजवा दिया होगा, जहां सॉल्वर बैठा होगा। माना जा रहा है कि इससे पूर्व की परीक्षाओं में भी इस तरह के खेल किए गए लेकिन कभी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। हो सकता है कि इस बार भी मामला दब जाता लेकिन एक तेजतर्रार स्थाई शिक्षक की नजरें परीक्षार्थी की संदिग्ध स्थिति को ताड़ गईं और इसके बाद मामले पकड़ में आते देर नहीं लगी।
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बरेली कॉलेज के कुछ प्रकरण
लॉ की परीक्षा के निरीक्षण को पहुंचे कुलपति से छात्र नेताओं ने दुर्व्यवहार किया।
एलएलबी की परीक्षाओं में नकल के कई मामले सामने आए, इसीलिए कॉलेज प्रशासन को विधि विभाग से हटाकर दूसरे विभाग में परीक्षा करानी पड़ी।
नकल की कोशिश रोकने पर शिक्षकों से अभद्रता की गई।
वर्जन------
मैं दो दिन के लिए बाहर हूं। फोन पर मुझे इस मामले की जानकारी दी गई, जिस पर मैंने कार्रवाई के निर्देश वरिष्ठ केंद्राध्यक्ष को दे दिए थे। मामला वाकई गंभीर है और इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूर कराई जाएगी।
-डॉ. सोमेश यादव, प्राचार्य बरेली कॉलेज
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बरेली कॉलेज की रिपोर्ट अभी मिली नहीं है, इसीलिए पूरा मामला संज्ञान में नहीं आया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही पूरे मामले को देखेंगे और जांच कराकर हर हाल में कार्रवाई की जाएगी।
-एके सिंह, कुलसचिव- रुहेलखंड विश्वविद्यालय
इंसेट...
::::छात्र नेता का वर्जन...
मैं तो परीक्षा देकर कॉलेज से घर चला आया था। वही कॉपी जमा की, जो परीक्षा कक्ष में मिली थी। मुझे नहीं पता कॉपी कैसे बदल गई। मुझे तो इस मामले की जानकारी ही नहीं है और अगर मेरी कॉपी बदली गई है तो कॉलेज वाले ही बताएंगे कि यह कैसे हुआ। अगर मेरे स्तर से ऐसा हुआ होता तो मुझे मौके पर ही क्यों नहीं पकड़ा। मुझे अपने खिलाफ यह साजिश नजर आती है, क्योंकि मैं छात्र नेता हूं और कॉलेज में छात्रों के मुद्दे उठाता रहता हूं।
-विक्रम सिंह गंगवार, पूर्व प्रदेश सचिव-सछास
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सछास नेताओं ने खड़े किए हाथ
समाजवादी छात्र सभा के महानगर अध्यक्ष विशाल यादव और जिलाध्यक्ष हृदेश यादव ने मामला पकड़ में आने के बाद अपने संगठन के पूर्व प्रदेश सचिव विक्रम से अपना पल्ला झाड़ लिया। दोनों ने कहा कि विक्रम पहले सछास में रहा है, अब इसका संगठन से कोई वास्ता नहीं है।