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किताबें खरीदने में अभिभावकों के छूटे पसीने

बरेली Updated Tue, 31 Mar 2015 12:46 AM IST
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सीन एक- कोतवाली स्थित शहर की एक बड़ी किताबों की दुकान के पास खड़ी वहीदा अपने बेटे के लिए किताबें लेने आई थीं। कुछ किताबें मिलीं लेकिन कुछ नहीं मिलीं, बताया गया कि अभी मार्केट में नहीं आई हैं। उन्होंने अपने किसी परिचित को फोन कर पुरानी किताबें मांगी लेकिन पता चला कि अब वे किताबें नहीं चलेंगी।
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सीन दो- पंकज कुमार राधा माधव में पढ़ने वाले अपने सातवीं और आठवीं के बच्चाें के लिए किताबें लेने आए थे। उन्हाेंने बताया कि पिछले साल उनकी बेटी सातवीं में थी जिसकी किताबें अपने बेटे को दिलवाई लेकिन जब लिस्ट मिली तो पता चला कि कुछ किताबें बदली हुई हैं। हर बार पाठ्यक्रम बदलने से परेशान पंकज ने 7400 रुपये की किताबें खरीदीं।


बरेली। किताबाें की दुकान पर ऐसे सैकड़ों मामले देखने को मिलेंगे जिसमें अभिभावक अपने बच्चाें की किताबाें के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। उनके लिए अप्रैल का महीना भारी पड़ रहा है। प्रत्येक सत्र में किताबें बदलने से समस्या और बढ़ रही है। इसके अलावा स्टेशनरी के कुछ ऐसे सामान भी अभिभावकों पर थोपे जा रहे हैं जिन्हें वे नहीं खरीदना चाहते। हालांकि किताबाें के विक्रेता गुरु मेहरोत्रा कहते हैं कि अगर किसी को स्टेशनरी में से कुछ वापस करना है तो कर सकते हैं, वे इसके लिए किसी को बाध्य नहीं करते। वहीं अलग से भी स्टेशनरी उपलब्ध है।
वर्कबुक का बढ़ गया लोड
अभिभावकाें की शिकायत है कि अब स्कूलाें ने वर्कबुक के नाम पर एक दर्जन से अधिक किताबें खरीदवाना शुरू कर दिया है। जहां कापियाें की जरूरत होती है वहां उसी विषय की वर्कबुक भी मंगवाई जा रही है। एयर फोर्स स्थित अभिभावक देवेंद्र सक्सेना ने जानकारी दी कि उनके बेटे के स्कूल में 10 वर्कबुक मंगवाई गई है।
स्टेशनरी भी थोपी जा रही है
दुकानाें पर किताबाें के सेट के साथ स्टेशनरी का सामान भी दिया जा रहा है। जबकि अभिभावक इनमें से कुछ लेना नहीं चाहते। डेलापीर स्थित पशुपति बुक एजेंसी के अतुल अग्रवाल बताते हैं कि अभिभावक जो सामान घर ले जाने से पहले वापस करना चाहते हैं कर सक ते हैं, बिकने के बाद सामान वापस कर पाना मुश्किल होता है।
बढ़ गए हैं रेट
इस बार कापी, बैग, स्टेशनरी व ड्रेस की कीमतों में हल्की बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले साल रजिस्टर का सेट जहां 480 में था इस बार 550 रुपये में है। बैग में अलग- अलग दाम पर 10 से 15 फीसदी और ड्रेस में 5 से 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

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