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ग्लैंडर्स पीड़ित घोड़े को सुलाया मौत की नींद, इंजेक्शन के बाद दस मिनट में थम गईं सांसें
Thu, 09 May 2019 03:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 09 May 2019 03:15 AM IST
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मौत की नींद
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में ग्लैंडर्स से पीड़ित पाए गए दो घोड़ों में से एक घोड़े को पशुपालन विभाग ने तय कार्यक्रम के तहत बुधवार को मौत की नींद सुला दिया। शहर से बाहर बीसलपुर मार्ग पर राधा माधव स्कूल के सामने खाली पड़े विशाल मैदान में इस कार्य को अंजाम दिया गया। मृत घोड़े के शव को छह फिट गहरे गड्ढे में दफन करवा दिया गया है। ऊपर से चूना व नमक आदि डाला गया है ताकि उसके जीवाणु फैल न सकें।
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अश्व प्रजाति में ग्लैंडर्स बीमारी की जांच के लिए शासन के निर्देश पर जिले में चलाए जा रहे सैंपल अभियान के तहत पिछले माह जिले से 60 घोड़ों के खून के सैंपल लेकर जांच को भेजे गए थे। एक सप्ताह पहले आई रिपोर्ट के बाद रिठौरा निवासी किशन बाबू व भोजीपुरा क्षेत्र के ग्राम बोहित निवासी अनोखेलाल के एक-एक घोड़े में इस बीमारी की पुष्टि हुई।
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पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने दोनों घोड़ों के मालिकों को इसकी जानकारी देते हुए ऐहतियात बरतने को कहा था। उसमें से एक रिठौरा निवासी किशन बाबू को उनके घोड़े को बुधवार को मौत की नींद सुलाने के लिए राजी कर लिया था। चिकित्सकों की टीम अपनी तैयारी के मुताबिक सुबह निर्धारित स्थान राधा माधव स्कूल के सामने खाली पड़े विशाल मैदान में पहुंच गई। किशन भी अपना घोड़ा लेकर वहां पहुंच गए। चिकित्सकों ने सबसे पहले जेसीबी से वहां छह फिट गहरा गड्ढा खुदवाया।
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डॉक्टरों की टीम ने सुरक्षा उपकरण पहनने के बाद घोड़े को गड्ढे के पास ले जाकर उसे मौत की नींद का इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगते ही घोड़ा बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा और दस मिनट में उसकी सांसें थम गईं। चिकित्सकों की टीम ने उसकी मौत होने की पुष्टि की, जिसके बाद उसे दफना दिया गया। मृत घोड़े के जीवाणु कहीं फैल न सकें, इसके लिए जिस गड्ढे में घोड़े को दफन किया गया उसमें चूना, नमक व अन्य केमिकल चिकित्सकों की टीम ने डाले। चिकित्सकों ने जो सुरक्षा किट पहनी हुई थी वह भी घोड़े के साथ ही दफन कर दी।
टीम में ये रहे शामिल
पशु चिकित्साधिकारी शहामतगंज रामलखन की अगुवाई में ब्रूक इंडिया संस्था के चिकित्सक डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. महेश चौधरी, ब्रूक इंडिया के सीनियर प्रोग्राम अफसर रमेश रंजन, साकार संस्था के परियोजना प्रबंधन विजय कृष्ण तिवारी आदि मौजूद रहे।