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साइबर ठगी का नया तरीका: ओटीपी बताएं न बताएं.. खाता हैक और पूरी रकम गायब

Sat, 27 Mar 2021 01:11 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 27 Mar 2021 01:11 PM IST
सार

-अपने शिकार को करते हैं फोन- आपका खाता हैक कर हमने निकाल ली है पूरी रकम
-महीने भर में ही ताबड़तोड़ वारदातें, पुलिस की सलाह- किसी हालत में न बताएं ओटीपी

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cyber thugs are using a new method of cheating police advice do not share otp with anyone
fraud call - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अब तक साइबर ठग किसी न किसी बहाने ओटीपी पूछकर लोगों के खाते साफ कर रहे थे लेकिन अब बगैर ओटीपी पूछे ही खातों में सेंध लगा रहे हैं। यही नहीं वे अपने शिकार को पहले ही फोन करके बताते हैं कि उसका खाता हैक किया जा रहा है। कुछ ही सेकेंड में खाते में बैलेंस शून्य होने का मैसेज भी मोबाइल पर आ जाता है। साइबर एक्सपर्ट भी अभी पता नहीं लगा सके हैं कि बगैर ओटीपी बताए साइबर ठग आखिर कैसे खाता हैक करने में कामयाब हो रहे हैं।

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साइबर पुलिस के मुताबिक ठगी का यह तरीका इसी महीने शुरू हुआ है और हाल ही में ताबड़तोड़ वारदातें हुई हैं। साइबर थाने में 15 दिनों में ही इस तरह के करीब छह मामले आ चुके हैं। साइबर ठग अपने शिकार को उसके खाते से रकम निकालने से पहले या बाद में फोन करके इसकी जानकारी भी देते हैं। साफ-साफ बताते हैं कि वे ठग हैं और उन्होंने उसका खाता हैक कर लिया है। कुछ ही पलों में जब मोबाइल पर मैसेज शून्य बैलेंस हो जाने का मैसेज पहुंचता है तब कहीं लोगों को उनकी बात पर यकीन आता है।
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आपके खाते का बैलेंस शून्य है.. इस मैसेज के बाद शुरू होता है ठगों का असली खेल
मोबाइल पर खाते का बैलेंस शून्य होने का मैसेज आते ही किसी के भी होश उड़ जाते हैं। ज्यादातर लोग ठगों के आगे अपनी रकम वापस कर देने के लिए गिड़गिड़ाते हैं। यहीं से ठगी का असली खेल शुरू होता है। ठग उसे कुछ रकम वापस करने का झांसा देकर मोबाइल पर आने वाला ओटीपी बताने को कहते हैं। ओटीपी बताते ही ठगों का काम पूरा हो जाता है। खाते से निकाली गई रकम ठगों के खाते में ट्रांसफर हो जाती है। 

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केस- 1

यूपी 112 में तैनात सिपाही मुकेश को सात मार्च को साइबर ठगों ने फोन कर बताया कि उनका खाता हैक कर वे सारी रकम निकालने जा रहे हैं। कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर भी खाते से 3.32 लाख रुपये निकलने का मैसेज आ गया। ठगों से दोबारा बातचीत हुई तो उन्होंने मुकेश से कहा कि वे उनकी कुछ रकम वापस कर देंगे, इसके लिए उन्हें वह ओटीपी बताना होगा जो वे उनके मोबाइल पर भेज रहे हैं। मुकेश ने ठगों को ओटीपी बताने के बजाय तत्काल साइबर थाने को सूचना दी। साइबर पुलिस की छानबीन में पता चला कि मुकेश के खाते से रकम निकालकर एफडी बनवा ली गई है। अगर वह ओटीपी बता देते तो रकम हथिया ली जाती। साइबर पुलिस की कोशिश से पूरे 3.32 लाख रुपये दोबारा मुकेश के खाते में पहुंच गए। 

केस- 2
12 मार्च को रिटायर्ड एचसीपी ब्रह्मानंद के खाते से भी ठगों ने करीब तीन लाख रुपये निकाल लिए और फिर उन्हें फोन कर उनका खाता हैक करने के बारे में बताया। ब्रह्मानंद ने ठगों से यह कहते हुए रहम की फरियाद की कि वह रिटायर हो चुके हैं और खाते में उनकी पेंशन की रकम है। इस पर ठगों ने उन्हें कुछ रकम लौटाने का झांसा देते हुए ओटीपी पूछा। ब्रह्मानंद ने भी ओटीपी बताने के बजाय साइबर थाने आकर सूचना दी। छानबीन में पता चला उनके खाते से भी रकम निकालकर एफडी बनवा ली गई है। उनकी रकम भी खाते में वापस कराई गई। इसी तरह संभल में भी एक सिपाही के खाते से 40 हजार रुपये निकाल लिए गए। 


साइबर पुलिस का दावा, ओटीपी न बताने पर खाते में वापस लौट सकती है रकम 

साइबर थाने के इंस्पेक्टर अनिल कुमार के मुताबिक ठग लोगों का खाता हैक कर उसमें मौजूद रकम की एफडी बनवा लेते है। शातिरपन यह है कि यह एक ही दिन के लिए बनती है। लिहाजा उसी दिन या कुछ घंटे बाद उसकी अवधि पूरी हो जाती है। ऐसे में ठग के पास अपना खेल पूरा करने के लिए अधिकतम 12 घंटे होते हैं। वे खाताधारक से ओटीपी पूछते हैं और ओटीपी मिलते ही एफडी से रकम सीधे अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं। इंस्पेक्टर अनिल कुमार के मुताबिक ओटीपी न बताने पर रकम ठग के खाते में नहीं जा सकती। साइबर थाने के एसआई शशांक सिंह ने बताया कि ओटीपी पता न चलने पर खाते से निकाली गई रकम  बैंक की  पार्किंग जेल में पड़ी रहती है। समय रहते शिकायत की जाए तो इसे वापस खाते में लाया जा सकता है।   

साइबर ठगी के ऐसे केस करीब 15 दिनों से सामने आ रहे हैं। हैकर्स खाते से रकम निकालकर एक दिन के लिए एफडी बनवा लेते हैं। फिर कुछ रकम लौटाने का झांसा देकर खाताधारक से ओटीपी पूछ लेते हैं। ओटीपी न बताने वालों की रकम बच जाती है, लिहाजा साइबर ठगों को किसी भी दशा में ओटीपी न बताएं। - अनिल कुमार, प्रभारी साइबर थाना

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