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पुलिस की रखवाली में बिकते हैं ठेले
बरेली।
Updated Sun, 19 Feb 2017 11:53 PM IST
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पुलिस की रखवाली में बिकते हैं ठेले
- फोटो : Police guarding sold from carts
रोडवेज के अफसर ने सेटेलाइट बस अड्डे के अंदर ठेला लगाने पर दुकानदार को बहार निकाल दिया था। पुलिस की शह पाकर ठेले वाले ने चौकी पर उस रोडवेज अफसर के खिलाफ तहरीर दे दी। रोडवेज के अफसर दबाव में आ गए और ठेले वालों से कुछ कहना ही छोड़ दिया। ठेले वाले फिर पूरी दबंगई के साथ बस अड्डे के अंदर ठेला लगाने लगे। जब पुलिस की रखवाली में अवैध ठेले और फड़ सजेंगे उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से जगह बेची जाएगी तो जाम से कैसे मिलेगी निजात और कैसे सुधरेगी व्यवस्था। सेटेलाइट बस अड्डे की सीमा के अंदर के अलावा शाहजहांपुर और पीलीभीत रोड के किनारे आटो, टैंपो, डग्गामार जीप, मार्शल, छोटा हाथी, प्राइवेट बसों के अलावा अनाधिकृत ठेले और खोखे वालों का रोजाना लगने वाले जमावड़े के पीछे पुलिस की हर महीने होने वाली लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा की उगाही है। ट्रैफिक पुलिस और बारादरी पुलिस ने हर महीने होने वाली मोटी कमाई के चलते सेटेलाइट बस के आस-पास की पूरी व्यवस्था बिगाड़ रखी है। बस अड्डे के अंदर या सड़क के किनारे से ठेले खोखे या टेंपो वालों को हटाने की पहल रोडवेज की ओर से होती है तो पुलिस की शह पाकर बस अड्डे के अंदर लगने वाले खोखे और ठेले वाले रोडवेज अफसरों और कर्मचारियों से लड़ने पर उतारू हो जाते हैं। पुलिस अफसरों पर मुकदमा लिखे जाने का भय दिखाकर व्यवस्था सुधरने नहीं देती। पुलिस का अवैध उगाही का ये खेल लंबे समय से चल रहा है। इसके चलते सेटेलाइट से श्यामगंज, पीलीभीत बाईपास रोड और शहर से शाहजहांपुर रोड पर जाने वाले वाहनों को रोजाना घंटों जाम से जूझना पड़ता है। पुलिस किसी हाल में ये व्यवस्था ठीक नहीं होने देना चाहती और न ही होने देती है।
ऐसे होती है उगाही
सेटेलाइट से शहर के अंदर गुजरने वाले दो पहिया वाहनों या कार को ट्रैफिक पुलिस चेकिंग के नाम पर रोकती है। उनसे सड़क के किनारे खोखों की आड़ में ले जाकर सौदेबाजी होती है। जब सौदा पट जाता है तो वाहन चालक को जलजीरा का ठेले वाले के पास भेज दिया जाता है। वाहन चालक ठेले वाले को रुपये देकर चला जाता है। ठेले वाले से हिसाब शाम को होता है।
खोखे और ठेले से वसूली
सूत्रों के मुताबिक सेटेलाइट के आस-पास लगने वाले फल, गजक, पेठा, पकौड़ी, नाश्ता और खाना बेचने वाले ठेलों से सोनू और सुंदर नाम के दो युवक रोजाना वसूली करते हैं। प्रत्येक खोखे और ठेले वाले से ट्रैफिक और चौकी पुलिस रोजाना 50-50 रुपये वसूलती है। ये पैसा सड़क के किनारे एक खोखे पर जमा होता है। पांच-पांच सौ रुपये दोनों को मेहनताना देने के बाद ये पैसे पुलिस तक पहुंचा दिए जाते हैं।
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ऐसे होती है उगाही
सेटेलाइट से शहर के अंदर गुजरने वाले दो पहिया वाहनों या कार को ट्रैफिक पुलिस चेकिंग के नाम पर रोकती है। उनसे सड़क के किनारे खोखों की आड़ में ले जाकर सौदेबाजी होती है। जब सौदा पट जाता है तो वाहन चालक को जलजीरा का ठेले वाले के पास भेज दिया जाता है। वाहन चालक ठेले वाले को रुपये देकर चला जाता है। ठेले वाले से हिसाब शाम को होता है।
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खोखे और ठेले से वसूली
सूत्रों के मुताबिक सेटेलाइट के आस-पास लगने वाले फल, गजक, पेठा, पकौड़ी, नाश्ता और खाना बेचने वाले ठेलों से सोनू और सुंदर नाम के दो युवक रोजाना वसूली करते हैं। प्रत्येक खोखे और ठेले वाले से ट्रैफिक और चौकी पुलिस रोजाना 50-50 रुपये वसूलती है। ये पैसा सड़क के किनारे एक खोखे पर जमा होता है। पांच-पांच सौ रुपये दोनों को मेहनताना देने के बाद ये पैसे पुलिस तक पहुंचा दिए जाते हैं।
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