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मोस्ट वांटेड आदेश को पकड़ने में क्यों हुई देरी?
बरेली
Updated Sat, 06 Jun 2015 01:57 AM IST
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सेना में फर्जी प्रमाण पत्रों पर लड़कों को मोटी रकम लेकर भर्ती कराने वाले मास्टर माइंड आदेश गुर्जर के खिलाफ हत्या और धोखाधड़ी के तमाम मामलों में सुबूत होने के बाद भी मेरठ पुलिस उस पर मेहरबानी करती रही। सेना जैसे गंभीर मामले को पुलिस ने इतने हल्के में लिया कि आदेश अपने साथी रिटायर मेजर आदित्य चौहान के साथ मेरठ में ही प्रॉपर्टी डीलिंग करता रहा, लेकिन उसकी गिरफ्तारी नहीं की गई। बरेली पुलिस का भी यही आलम था। मुकदमे लिखने के बाद पुलिस ने सभी को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
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अमर उजाला के खुलासों के बाद डीआईजी आरकेएस राठौर के इस मामले को गंभीरता से लेने पर क्राइम ब्रांच ने कुछ तेजी दिखाई। लेकिन विवेचक आदेश के खिलाफ सुबूत न होने की बात कहती रही। एसएसपी धर्मवीर यादव पुराने तीन मामलों की विवेचना उप निरीक्षक घनश्याम तिवारी को दी तो उन्होंने आदेश के खिलाफ सुबूत जुटा लिए। भर्ती रैली में पकड़े गए चार लड़कों ने आदेश और आदित्य के खिलाफ यह लिखकर दे दिया कि उसने पांच लाख रुपये लेकर सेना में फर्जी प्रमाण पत्रों पर भर्ती कराने के लिए थे। इसके बाद आदेश और आदित्य की तलाश शुरू हो गई। लेकिन बाकी किसी मामले में बरेली क्राइम ब्रांच के विवेचकों को आदेश के खिलाफ अभी भी सुबूतों का इंतजार है। वह उसका नाम अभी तक नहीं खोल रहे हैं।
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ऐसे फर्जी पतों पर कराता था सेना में भर्ती
-सेना भर्ती बोर्ड के कर्नल राजीव दीक्षित ने 22 अगस्त 2014 को स्टेशन रोड स्थित होटल में छापामार चार लड़कों को पकड़ने के बाद कैंट थाने में मुकदमा लिखाया था। पकड़े गए लड़कों में विष्णु शर्मा नाम का लड़का राजस्थान के भरतपुर जिले के इकनहरा गांव का रहने वाला था, लेकिन वह ग्राम देवरिया, थाना बीसलपुर, पीलीभीत के फर्जी पते पर सेना में भर्ती होने के लिए आया था। राहुल कुमार और हरेंद्र सिंह, ग्राम निगुना सुगना, थाना टप्पल, अलीगढ़ के थे। यह दोनों ईंटगांव, बीसलपुर, पीलीभीत के पते पर भर्ती होने आए थे। चौथा जीतू भी राहुल कुमार के गांव ही उनके साथ पकड़ा गया था। पूछताछ के दौरान चारों में से किसी ने आदेश गुर्जर और आदित्य के खिलाफ मुंह नहीं खोला था। भर्ती बोर्ड के कर्नल के मुकदमा लिखाने के बाद कैंट पुलिस ने चारों को जमानत पर छोड़ दिया था। मुकदमे में आदेश गुर्जर और मेजर आदित्य चौहान का नाम भी होटल से भागने वालों में शामिल था।
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इस तरह रुपये लेकर टरकाता था
आदेश गुर्जर का शिकार हुआ राहुल कुमार ने विवेचक को लिखित में बयान दिया है कि वह कानपुर की सेना भर्ती रैली में फेल हो गया था। आदेश गुर्जर ने उससे ढाई लाख रुपये दिए थे। वापस करने पर वह उसे बरेली में भर्ती कराने के लिए आया था। हरेंद्र सिंह ने बताया कि 2013 में वह मेरठ में होने वाली भर्ती में दौड़ में निकल गया था। आदेश ने ढाई लाख रुपये लेकर उसे बरेली में भर्ती कराने का वादा किया था। विष्णु शर्मा ने लिखकर दिया है कि आदेश गुर्जर ने छह लाख रुपये में उसने भर्ती कराने का वादा किया था। राजेंद्र नाम के लड़के ने उसकी आदेश से गुर्जर से बात कराई थी।
खुद ही बना देता था फर्जी प्रमाण पत्र
क्राइम ब्रांच के विवेचक घनश्याम तिवारी ने बताया कि लड़कों ने आदेश गुर्जर के पास तमाम मोहरें हैं। न्यू सांई कंकडखेड़ा मवाना रोड पर आदेश और आदित्य ने ऑफिस बना रखा था। वह सेना में भर्ती कराने के लिए ट्रेनिंग देने के लिए बुलाता था। इसी दौरान लड़कों से भर्ती कराने के लिए डीलिंग होती थी। वह जाति और शैक्षिक प्रमाण पत्र बनाकर भी देता था।
सभी मुकदमों में नाम खोलने की तैयारी
-इसी साल ग्यारह लोगों के फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए भर्ती होने के मामले में पकड़े जाने का मामला सुर्खियों में आने पर अधिकारियों ने पिछले मुकदमों में भी सुध ले ली है। एसएसपी छह पुराने मुकदमों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। तीन मामलों की विवेचना घनश्याम तिवारी कर रहे हैं। जबकि बाकी में इंस्पेक्टर अजय चौहान को लगाया गया है। सर्विलांस सेल के दरोगा सचिन कुमार और सिपाही को आरोपियों की कॉल डिटेल पर काम करके आदेश और आदित्य के खिलाफ सुबूत जुटाने को लगाया गया था। लेकिन मोबाइल कॉल के आधार पर आदेश गुर्जर के खिलाफ ठोस सुबूत नहीं मिल पाए थे। वह फोन दूसरों के मोबाइल से करता था। एसपी क्राइम का कहना है कि अब सभी मामलों में आदेश गैंग का नाम खोला जाएगा।
जमानतियों को बचा क्यों रही है पुलिस
-फर्जी पतों पर सेना में भर्ती होकर सेंध लगाने की कोशिश करने के आरोप में पकड़े गए ग्यारह लड़कों में से किसी के भी जमानती के खिलाफ पुलिस ने अभी तक कार्रवाई नहीं की है। पुलिस आरोपियों को बचाने की जुगाड़ में लगी है। फर्जी पतों के प्रमाण पत्र कागजी कार्रवाई के बाद बनवाए गए हैं तो उसमें लेखपाल और दरोगा की भूमिका भी संदिग्ध हैं। इसलिए उनके खिलाफ भी अब तक कार्रवाई हो जाने चाहिए थी। विवेचक अजय चौहान का कहना है कि कोर्ट ही इस मामले में कार्रवाई कर सकती है। हम फर्जी पतों की तस्दीक होने के बाद कोर्ट को रिपोर्ट भेज देंगे।
आखिर रंग लाई अमर उजाला की मुहिम
-सेना में फर्जीवाड़े करके लड़कों को भर्ती कराने वाले मास्टर माइंड आदेश गुर्जर गैंग के नाम का खुलासा अमर उजाला ने ही सबसे पहले किया था। इसके बाद सेना में जिन फर्जी पतों पर लड़के भर्ती हुए उनका भी खुलासा हमने ही कि या। साथ ही यह भी बताया कि उनके असली पते क्या हैं। डीआईजी ने इस मामले को गंभीरता से लेकर क्राइम ब्रांच की मीटिंग लेकर सेना मामले का खुलासा जल्द करने को कहा। डीआईजी के कड़े रुख पर विवेचक एक्टिव हो गए और सूचनाएं जुटाकर आदेश के खिलाफ सुबूत जुटाकर चार दिन पहले मेरठ में दबिश देने पहुंच गए। तीन दिन क्राइम ब्रांच की टीम आदेश और आदित्य के घरों के अलावा उन लड़कों के घर भी दबिश दे आई, जो उनके साथ पकड़े गए थे। बुधवार को ही टीम बैंरग लौटी थी, बृहस्पतिवार को मेरठ पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
आदेश से पूछताछ कर सकती है आर्मी इंटेलिजेंस
सेना भर्ती के फर्जीबाड़े के सरगना आदेश गुर्जर की मेरठ में गिरफ्तारी के बाद आर्मी इंटेलिजेंस भी हरकत में आ गई है। उसको आदेश से इस मामले में और भी सुराग मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि सेना के अफसर फिलहाल इस मामले में अधिकृत तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन उन्होंने आदेश गुर्जर से पूछताछ के संकेत दिए हैं ताकि वह मामले की तह तक पहुंच सकें। इसके लिए संभव है कि आर्मी इंटेलिजेंस मेरठ जाकर गुर्जर से पूछताछ करे।