सीओ ने प्रैक्टीकल करवाया तो खेल गया अर्जुन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला में अर्जुन की कहानी और उसकी झोल छपने के बाद एसपी सिटी ने उसे बदायूं से बरेली बुलवाया। उन्होंने सीओ मुकुल द्विवेदी को उससे पूछताछ करके सच्चाई का पता लगाने को कहा। अर्जुन ने सीओ को बताया कि 20 मई को साढ़े पांच बजे बदायूं से बस में बैठकर साढ़े छह बजे चौपुला उतरे। यहां से जंक्शन को टैंपो किया। वह पीछे पत्नी के साथ बैठा। एक युवक उसके पास बैठा था तो एक आगे ड्राइवर के पास। पोस्टमार्टम हाउस के पास इनमें से दो लोगों ने उसकी कमर पर चाकू लगा दिया। सीओ ने पूछा कि पीछे बैठा युवक ही तुम्हारी कमर पर चाकू लगा सकता था, फिर आगे वाले ने कैसे लगा दिया? इस पर अर्जुन हड़बड़ाया तो सीओ ने एक आटो बुला लिया और प्रैक्टीकल करके देखा। आसानी से ऐसा संभव नहीं हो सका तो अर्जुन का चेहरा फक पड़ गया। तब बोला कि इसी बीच वह बेहोश हो गया, आगे क्या हुआ उसे नहीं पता। सीओ ने उसे मेडिकल परीक्षण को भेज दिया। अर्जुन का यह बयान कल के बयान से बदला हुआ था।
वर्जन
हमने इतना तो पता लगा लिया कि अर्जुन सरासर झूठ बोल रहा है। उच्चाधिकारियों को इस स्थिति से अवगत भी करा दिया है। चूंकि उसकी गुमशुदगी कादरचौक में दर्ज है इसलिए यहां नया मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। जांच रिपोर्ट भेज दी जाएगी, आगे की कार्रवाई कादरचौक पुलिस ही करेगी। - मुकुल द्विवेदी, सीओ प्रथम
ससुर तो बेदाग मान रहे अर्जुन को
ऊषा की तलाश में जुटे उसके मायके वाले भी मंगलवार को अर्जुन के पिता के साथ सूरजपाल कोतवाली में जमा थे। लुधियाना निवासी ऊषा के पिता सत्यपाल ने बताया कि वे मूल रूप से परौर (शाहजहांपुर) के मुड़िया गांव के निवासी हैं। कई साल से लुधियाना जाकर बस गए हैं। अर्जुन और ऊषा वहीं जा रहे थे। बेटी की शादी करीब पांच साल पहले की थी, उस पर कोई बच्चा नहीं था। फिर भी ससुराल वालों या पति से कोई मनमुटाव नहीं था। अब तो इनके घर में शादी है, ऐसे में मेरी बेटी के साथ भला गलत क्यों करते। मेरी बेटी ससुराल का ही काफी जेवर पहने थी। अगर इनके दिल में कुछ होता तो उसे जेवर क्यों ले जाने देते। सूरजपाल ने कहा कि वे लोग तो बहू की तलाश में जुटे थे अब बेटे को पुलिस ने बैठा लिया है। समझ नहीं आता कि उसका क्या कसूर है।