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नवीं में दो बार फेल होने पर खुदकुशी कर ली
बरेली
Updated Thu, 09 Apr 2015 02:07 AM IST
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कक्षा नौ में दो बार फेल होने के बाद कम्पार्टमेंट परीक्षा देकर लौटे छात्र ने अवसाद में डूबकर फांसी लगा ली। लॉबी का दरवाजा तोड़कर फंदे पर लटका उसका शव उतारा गया। पोस्टमार्टम के बाद परिवार वाले शव बछरावां ले गए।
बछरावां (रायबरेली) में रहने वाले शरद वर्मा का 15 वर्षीय बेटा अभिषेक वर्मा इज्जतनगर (बरेली) इलाके की वसंत विहार कॉलोनी में रहने वाली अपनी मौसी धर्मदेवी के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह सेक्रेड हार्ट स्कूल में कक्षा नौ का छात्र था। पिछले साल वह फेल हो गया था। इस बार भी तीन विषय में फेल हो गया। बुधवार को वह निराशा की ही हालत में कम्पार्टमेंट पेपर देने अपने स्कूल गया था। वहां से करीब साढ़े ग्यारह बजे घर लौटा। उसकी मौसी धर्म देवी रेलवे में कर्मचारी हैं। वह ड्यूटी पर गई हुई थीं। उनका बेटा प्रमोद रोड नंबर चार पर मैच खेलने गया था और बेटी रूबी भी बीए की परीक्षा देने गई थी। घर में अभिषेक अकेला था। इसी दौरान उसने लॉबी का दरवाजा अंदर से बंद किया और फांसी लगाकर जान दे दी। दोपहर करीब 12 बजे जब प्रमोद मैच खेलकर लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद पाया। उसने आसपास के लोगों के साथ पुलिस को भी बुलाया। सिटकनी तोड़कर दरवाजा खोला गया और फिर रोशनदान से लटक रही अभिषेक की लाश को उतारा गया।
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दोस्त बोले बेहद हंसमुख था अभिषेक
अभिषेक की खुदकुशी की जानकारी पाकर काफी संख्या मेें उसके दोस्त घर पहुंच गए। उनका कहना था कि अभिषेक की मौत का उन्हें बेहद अफसोस है क्योंकि वह बेहद हंसमुख था। वह अपनी से बड़ी उम्र के लोगों से भी हंसी मजाक करता रहता था।
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बछरावां (रायबरेली) में रहने वाले शरद वर्मा का 15 वर्षीय बेटा अभिषेक वर्मा इज्जतनगर (बरेली) इलाके की वसंत विहार कॉलोनी में रहने वाली अपनी मौसी धर्मदेवी के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह सेक्रेड हार्ट स्कूल में कक्षा नौ का छात्र था। पिछले साल वह फेल हो गया था। इस बार भी तीन विषय में फेल हो गया। बुधवार को वह निराशा की ही हालत में कम्पार्टमेंट पेपर देने अपने स्कूल गया था। वहां से करीब साढ़े ग्यारह बजे घर लौटा। उसकी मौसी धर्म देवी रेलवे में कर्मचारी हैं। वह ड्यूटी पर गई हुई थीं। उनका बेटा प्रमोद रोड नंबर चार पर मैच खेलने गया था और बेटी रूबी भी बीए की परीक्षा देने गई थी। घर में अभिषेक अकेला था। इसी दौरान उसने लॉबी का दरवाजा अंदर से बंद किया और फांसी लगाकर जान दे दी। दोपहर करीब 12 बजे जब प्रमोद मैच खेलकर लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद पाया। उसने आसपास के लोगों के साथ पुलिस को भी बुलाया। सिटकनी तोड़कर दरवाजा खोला गया और फिर रोशनदान से लटक रही अभिषेक की लाश को उतारा गया।
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दोस्त बोले बेहद हंसमुख था अभिषेक
अभिषेक की खुदकुशी की जानकारी पाकर काफी संख्या मेें उसके दोस्त घर पहुंच गए। उनका कहना था कि अभिषेक की मौत का उन्हें बेहद अफसोस है क्योंकि वह बेहद हंसमुख था। वह अपनी से बड़ी उम्र के लोगों से भी हंसी मजाक करता रहता था।
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