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नागमणि के नाम पर ठगी करने वाले पांच और गिरफ्तार
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ठगी
- फोटो : lakhimpur
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लखीमपुर खीरी। तराई के जंगलों की ‘रहस्य गाथा’ का फायदा उठाकर नकली नागमणि और दूसरे बनावटी साधनों से ठगी करने वाले रविवार को जेल भेजे गए ठगी के आरोपी इमाम अली और कासिम से जुटाई जानकारी के आधार पर निघासन और पढुआ चौकी पुलिस ने गांव सोठियाना सहित कई जगहों पर छापा मारा। इस दौरान ठगी करने वाले गिरोह के पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया।
चार युवकों ने मध्य प्रदेश के भिंड के थाना नयागांव क्षेत्र गांव कोट निवासी कुलदीप सिंह को 26 जून को लखीमपुर के वीरबाबा मंदिर बुलाया और नागमणि के बहाने उससे 60 हजार रुपये ले लिए थे। ‘नागमणि’ के लिए इंतजार करने के बाद वे लोग चकमा देकर भाग गए थे। इस मामले में इमाम अली, कासिम, बबलू सिसैया कोतवाली धौरहरा और सादिक लहरपुर (सीतापुर) के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने रविवार की सुबह करीब 11 बजे देउवापुर नहर पुलिया के पास इमाम अली और कासिम को दबोच लिया था। वे दोनों सदर कोतवाली के गांव रंगीलानगर के निवासी हैं।
इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए कई जगह दबिश दी गईं। एसपी पूनम ने बताया कि गांव सोठियाना में छापा मारने के दौरान अलीम, सबर हुसैन, इरफान, सरजन, वहाब को पकड़ा गया है, जबकि शोएब निवासी पठाननपुरवा हाथ नहीं लगा। पकड़े गए लोगों के पास से दोमुंहा एक सांप, तांबे का फूलदार गिलास, एक मोरपंखी, एक डिबिया में रखी नकली नागमणि, सात चुंबक, कांच की दो शीशियां में चावल के दाने, 315 बोर की एक एक अद्धी, एयर पिस्टल और दो कारतूस बरामद किए हैं। आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया है, जहां से अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया। पुलिस के मुताबिक ठगी को समझने पर यदि कोई सौदे से बिदके तो उसे ये हथियार दिखाकर लूट लें।
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ऐसी थी ठगों की नागमणि...डिब्बी में रुई, दवा की गोलियां और चमचमाता बल्ब
पुलिस की कम पहुंच वाला सोठियाना गांव बना रखा था अड्डा, पूरा जिले में यहीं से फैला था नेटवर्क
लखीमपुर खीरी। सोठियाना, यह वह गांव है जहां नकली नागमणि बनती थी और ठगों ने इसी जगह को अपना अड्डा बना रखा था। सोमवार को गिरफ्तार पांच लोगों में दो तो निघासन इलाके के इसी गांव के रहने वाले हैं। दो नदियों की तलहटी में बसे इस गांव में पुलिस आसानी से नहीं पहुंच पाती। इसी का वे फायदा उठाते थे। ठग यहां पर नकली नागमणि के साथ ‘करामाती गिलास’ और डबल स्टार वाली नकली मोरपंखी बनाते थे। फिर शिकार हुए लोगों को यहां या फिर आसपास के गांव में बुलाते थे।
ठगी के सामान तैयार करने का तरीका जितना चौकाने वाला है, उतना ही यह भी कि सोठियाना गांव को उन्होंने अड्डा बनाया था। वैसे तो गिरोह के कई सदस्य दूसरे गांव के रहने वाले हैं, मगर संचालन इसी गांव से करने का कारण यह है कि बहराइच बॉर्डर पर होने के कारण एक तो वैसे ही पुलिस का ध्यान ज्यादा वहां नहीं जाता। दूसरा थाने से 20 और पड़ुवा चौकी से करीब 12 किलोमीटर दूर इस गांव में पुलिस का पहुंचना आसान नहीं है। शारदा और कौड़ियाला नदी की तलहटी में बसे इस गांव के रास्ते काफी घुमावदार हैं। लोगों की आवाजाही कम होने के कारण भी गांव की बातें बाहर नहीं जातीं। सोठियाना से ही पूरा जिला ही नहीं दूसरे प्रदेशों में नेटवर्क फैला रखा था।
जेवर की डिब्बी होती थी ‘नागमणि’
सोठियाना से सोमवार को पकड़े गए अलीम, सबर ने पुलिस को बताया कि नागमणि से तमाम इच्छाओं की पूर्ति करने की कोशिश करने वाले लोग आसानी से शिकार बन जाते थे। वे लोग नकली नागमणि के लिए सुनार की दुकान से जेवर की पारदर्शी डिब्बी लेते थे। डिब्बी में रूई रखने के बाद रतौंधी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली गोलियां इस्तेमाल करते थे। ये गोलियां छोटी और हल्की चमकीली होने के कारण खासतौर से इस्तेमाल किया जाता था। भी होती है। रुई के बीच इन गोलियां को रखते थे। रोशनी के इंतजाम के लिए एलईडी बल्ब को छोटे सेल से जोड़ते थे। यह सेल एक तार के जरिए डिब्बी से जुड़ा होता था, जो 50 मीटर दूर बैठा साथी जोड़ता और हटाता था। रोशनी कम करने या बढ़ाने के लिए वे एक डिवाइस का इस्तेमाल करते थे। इस डिब्बी के एकदम नजदीक कोई नहीं होता था। रोशनी देखकर लोग इस पर विश्वास कर बैठते थे। फिर इस नागमणि को बाद में देने की बात कहकर ठग रुपये ऐंठ लेते थे। कोई अगर ले भी जाता था तो उसे बाद में असलियत पता लगती थी। इस बार गड़बड़ी यही हो गई थी कि गिरोह के कुछ सदस्य अपना असली नाम बता बैठे थे।
दो पंखुड़ियों को जोड़कर बनाते हैं डबल स्टार वाली मोरपंखी
दो स्टार वाली मोरपंखी दुलर्भ होती है इसलिए उसका महत्व भी ज्यादा होता है। मान्यता है कि जिस व्यक्ति के पास डबल टिकली की मोरपंखी होती है। उस व्यक्ति के पास धन की कमी नहीं रहती। ठग बड़ी सफाई के साथ मोरपंखी के ऊपरी सिरे को विशेष प्रकार चिपकाने वाले पदार्थ से जोड़ लेते थे। फिर वह डबल स्टार वाली लगने लगती है। हाथ में लेने के बाद भी उसकी आसानी से परखा नहीं जा सकता। ठग इसका भी सौदा सूर्य ढलने के बाद ही अक्सर अंधेरे कमरे में ही करते हैं।
करामाती गिलास
तांबे के गिलास की पेंदी में नक्कासी बनवाकर उसे करामाती गिलास बताकर भी ठगी करते थे। इस गिलास को वे जमीन में दबे खजाने से मिलना बताकर कहते थे कि जिसके पास यह गिलास रहेगा, उस पर धन की कमी नहीं रहेगी। इसकी कीमत 50 हजार रुपये से शुरू होकर काफी आगे तक जाती थी।
निघासन थाना क्षेत्र में ठगी का धंधा जोरों पर होता है। दूसरे प्रदेशों के लोग यहां पिछले सालों में अनेक बार ठगी का शिकार हो चुके हैं। इस पर पुलिस ने दबिशें देकर ठगी करने वाले मुख्य आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। फिलहाल सुरागरसी की जा रही है। यदि गिरोह के कुछ रह गए हैं तो उनका पता लगाकर उन्हें भी जेल भेजा जाएगा। -पूनम, एसपी।
चार युवकों ने मध्य प्रदेश के भिंड के थाना नयागांव क्षेत्र गांव कोट निवासी कुलदीप सिंह को 26 जून को लखीमपुर के वीरबाबा मंदिर बुलाया और नागमणि के बहाने उससे 60 हजार रुपये ले लिए थे। ‘नागमणि’ के लिए इंतजार करने के बाद वे लोग चकमा देकर भाग गए थे। इस मामले में इमाम अली, कासिम, बबलू सिसैया कोतवाली धौरहरा और सादिक लहरपुर (सीतापुर) के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने रविवार की सुबह करीब 11 बजे देउवापुर नहर पुलिया के पास इमाम अली और कासिम को दबोच लिया था। वे दोनों सदर कोतवाली के गांव रंगीलानगर के निवासी हैं।
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इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए कई जगह दबिश दी गईं। एसपी पूनम ने बताया कि गांव सोठियाना में छापा मारने के दौरान अलीम, सबर हुसैन, इरफान, सरजन, वहाब को पकड़ा गया है, जबकि शोएब निवासी पठाननपुरवा हाथ नहीं लगा। पकड़े गए लोगों के पास से दोमुंहा एक सांप, तांबे का फूलदार गिलास, एक मोरपंखी, एक डिबिया में रखी नकली नागमणि, सात चुंबक, कांच की दो शीशियां में चावल के दाने, 315 बोर की एक एक अद्धी, एयर पिस्टल और दो कारतूस बरामद किए हैं। आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया है, जहां से अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया। पुलिस के मुताबिक ठगी को समझने पर यदि कोई सौदे से बिदके तो उसे ये हथियार दिखाकर लूट लें।
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ऐसी थी ठगों की नागमणि...डिब्बी में रुई, दवा की गोलियां और चमचमाता बल्ब
पुलिस की कम पहुंच वाला सोठियाना गांव बना रखा था अड्डा, पूरा जिले में यहीं से फैला था नेटवर्क
लखीमपुर खीरी। सोठियाना, यह वह गांव है जहां नकली नागमणि बनती थी और ठगों ने इसी जगह को अपना अड्डा बना रखा था। सोमवार को गिरफ्तार पांच लोगों में दो तो निघासन इलाके के इसी गांव के रहने वाले हैं। दो नदियों की तलहटी में बसे इस गांव में पुलिस आसानी से नहीं पहुंच पाती। इसी का वे फायदा उठाते थे। ठग यहां पर नकली नागमणि के साथ ‘करामाती गिलास’ और डबल स्टार वाली नकली मोरपंखी बनाते थे। फिर शिकार हुए लोगों को यहां या फिर आसपास के गांव में बुलाते थे।
ठगी के सामान तैयार करने का तरीका जितना चौकाने वाला है, उतना ही यह भी कि सोठियाना गांव को उन्होंने अड्डा बनाया था। वैसे तो गिरोह के कई सदस्य दूसरे गांव के रहने वाले हैं, मगर संचालन इसी गांव से करने का कारण यह है कि बहराइच बॉर्डर पर होने के कारण एक तो वैसे ही पुलिस का ध्यान ज्यादा वहां नहीं जाता। दूसरा थाने से 20 और पड़ुवा चौकी से करीब 12 किलोमीटर दूर इस गांव में पुलिस का पहुंचना आसान नहीं है। शारदा और कौड़ियाला नदी की तलहटी में बसे इस गांव के रास्ते काफी घुमावदार हैं। लोगों की आवाजाही कम होने के कारण भी गांव की बातें बाहर नहीं जातीं। सोठियाना से ही पूरा जिला ही नहीं दूसरे प्रदेशों में नेटवर्क फैला रखा था।
जेवर की डिब्बी होती थी ‘नागमणि’
सोठियाना से सोमवार को पकड़े गए अलीम, सबर ने पुलिस को बताया कि नागमणि से तमाम इच्छाओं की पूर्ति करने की कोशिश करने वाले लोग आसानी से शिकार बन जाते थे। वे लोग नकली नागमणि के लिए सुनार की दुकान से जेवर की पारदर्शी डिब्बी लेते थे। डिब्बी में रूई रखने के बाद रतौंधी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली गोलियां इस्तेमाल करते थे। ये गोलियां छोटी और हल्की चमकीली होने के कारण खासतौर से इस्तेमाल किया जाता था। भी होती है। रुई के बीच इन गोलियां को रखते थे। रोशनी के इंतजाम के लिए एलईडी बल्ब को छोटे सेल से जोड़ते थे। यह सेल एक तार के जरिए डिब्बी से जुड़ा होता था, जो 50 मीटर दूर बैठा साथी जोड़ता और हटाता था। रोशनी कम करने या बढ़ाने के लिए वे एक डिवाइस का इस्तेमाल करते थे। इस डिब्बी के एकदम नजदीक कोई नहीं होता था। रोशनी देखकर लोग इस पर विश्वास कर बैठते थे। फिर इस नागमणि को बाद में देने की बात कहकर ठग रुपये ऐंठ लेते थे। कोई अगर ले भी जाता था तो उसे बाद में असलियत पता लगती थी। इस बार गड़बड़ी यही हो गई थी कि गिरोह के कुछ सदस्य अपना असली नाम बता बैठे थे।
दो पंखुड़ियों को जोड़कर बनाते हैं डबल स्टार वाली मोरपंखी
दो स्टार वाली मोरपंखी दुलर्भ होती है इसलिए उसका महत्व भी ज्यादा होता है। मान्यता है कि जिस व्यक्ति के पास डबल टिकली की मोरपंखी होती है। उस व्यक्ति के पास धन की कमी नहीं रहती। ठग बड़ी सफाई के साथ मोरपंखी के ऊपरी सिरे को विशेष प्रकार चिपकाने वाले पदार्थ से जोड़ लेते थे। फिर वह डबल स्टार वाली लगने लगती है। हाथ में लेने के बाद भी उसकी आसानी से परखा नहीं जा सकता। ठग इसका भी सौदा सूर्य ढलने के बाद ही अक्सर अंधेरे कमरे में ही करते हैं।
करामाती गिलास
तांबे के गिलास की पेंदी में नक्कासी बनवाकर उसे करामाती गिलास बताकर भी ठगी करते थे। इस गिलास को वे जमीन में दबे खजाने से मिलना बताकर कहते थे कि जिसके पास यह गिलास रहेगा, उस पर धन की कमी नहीं रहेगी। इसकी कीमत 50 हजार रुपये से शुरू होकर काफी आगे तक जाती थी।
निघासन थाना क्षेत्र में ठगी का धंधा जोरों पर होता है। दूसरे प्रदेशों के लोग यहां पिछले सालों में अनेक बार ठगी का शिकार हो चुके हैं। इस पर पुलिस ने दबिशें देकर ठगी करने वाले मुख्य आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। फिलहाल सुरागरसी की जा रही है। यदि गिरोह के कुछ रह गए हैं तो उनका पता लगाकर उन्हें भी जेल भेजा जाएगा। -पूनम, एसपी।