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सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद शील अस्पताल के मालिक-डॉक्टर पर रिपोर्ट
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बरेली। पेटीएम की सॉफ्टवेयर इंजीनियर आयुषी की बुखार से मौत के मामले में शनिवार को शील अस्पताल के मालिक डॉ. नवल गुप्ता और इलाज करने वाले डॉक्टर महेश गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। समाधान दिवस में आयुषी के पिता की गुहार के बाद कमिश्नर और डीआईजी के आदेश पर ये कार्रवाई हुई।
प्रेमनगर क्षेत्र की द्वारिकापुरम कालोनी निवासी राकेश सारस्वत की बेटी आयुषी सारस्वत नोयडा में पेटीएम कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं। राकेश की क्षेत्र में ही मंगलम स्वीट्स के नाम पर दुकान है। आयुषी रक्षाबंधन पर घर आईं थीं। दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, तबीयत बिगड़ने पर उन्हें राजेंद्रनगर स्थित शील अस्पताल में डॉ. महेश गुप्ता को दिखाया गया था। डॉक्टर ने सामान्य बुखार बताकर दवा दे दी। जोर देने पर डॉक्टर ने जांच कराई तो बेटी तो टायफाइड निकला। इसके बाद दवा बदल दी गई। 18 अगस्त को हालत बिगड़ने पर दोबारा दिखाया तो भर्ती कर लिया। भर्ती करने के बावजूद हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, लेकिन डॉक्टर स्थिति सामान्य बताते रहे। राकेश कुमार ने बताया की देर रात बेटी की तबीयत दोबारा खराब हुई, लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया और डॉक्टर का फोन लगातार बंद जाता रहा। सुबह करीब पांच बजे डॉक्टर आए तब तक बेटी की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। डॉक्टर के आने के कुछ मिनट बाद ही बेटी की मौत हो गई। लापरवाही के आरोपोें के चलते डॉक्टर महेश गुप्ता और मालिक डॉ. नवल किशोर गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। इससे पहले आयुषी के पिता के पिता ने डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रेमनगर थाने में तहरीर दी थी, लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं की गई । शनिवार को समाधान दिवस के दौरान पीड़ित थाने पहुंचे अधिकारियों से शिकायत के बाद रिपोर्ट दर्ज की गई।
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प्रेमनगर क्षेत्र की द्वारिकापुरम कालोनी निवासी राकेश सारस्वत की बेटी आयुषी सारस्वत नोयडा में पेटीएम कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं। राकेश की क्षेत्र में ही मंगलम स्वीट्स के नाम पर दुकान है। आयुषी रक्षाबंधन पर घर आईं थीं। दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, तबीयत बिगड़ने पर उन्हें राजेंद्रनगर स्थित शील अस्पताल में डॉ. महेश गुप्ता को दिखाया गया था। डॉक्टर ने सामान्य बुखार बताकर दवा दे दी। जोर देने पर डॉक्टर ने जांच कराई तो बेटी तो टायफाइड निकला। इसके बाद दवा बदल दी गई। 18 अगस्त को हालत बिगड़ने पर दोबारा दिखाया तो भर्ती कर लिया। भर्ती करने के बावजूद हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, लेकिन डॉक्टर स्थिति सामान्य बताते रहे। राकेश कुमार ने बताया की देर रात बेटी की तबीयत दोबारा खराब हुई, लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया और डॉक्टर का फोन लगातार बंद जाता रहा। सुबह करीब पांच बजे डॉक्टर आए तब तक बेटी की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। डॉक्टर के आने के कुछ मिनट बाद ही बेटी की मौत हो गई। लापरवाही के आरोपोें के चलते डॉक्टर महेश गुप्ता और मालिक डॉ. नवल किशोर गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। इससे पहले आयुषी के पिता के पिता ने डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रेमनगर थाने में तहरीर दी थी, लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं की गई । शनिवार को समाधान दिवस के दौरान पीड़ित थाने पहुंचे अधिकारियों से शिकायत के बाद रिपोर्ट दर्ज की गई।
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