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अंतिम संस्कार से इनकार, आश्वासन पर माने
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बिलसंडा (पीलीभीत)। सगी बहनों की हत्या का परिवार पर ही शक जताने से क्षुब्ध घर वालों ने दोनों लड़कियों का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। भाई ने आरोप लगाया कि भट्ठा मालिक, ठेकेदार और मुनीम तीनों आए दिन बड़ी बहन से दुष्कर्म किया करते थे। घटना के दिन छोटी बहन ने देख लिया था इसलिए दोनों की हत्या कर दी गई। इस बीच एसडीएम सीओ भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। परिवार के लोगों को 72 घंटे में खुलासे का आश्वासन देकर मनाया गया, तब जाकर अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि पुलिस परिवार के सदस्यों की निगरानी करती रही।
पुलिस ने मंगलवार देर रात भाई की ओर से अज्ञात के खिलाफ हत्या कर साक्ष्य मिटाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली थी। मगर, बुधवार को भाई ने दूसरी तहरीर अधिकारियों को दी। पूर्व में मनमाफिक तहरीर लिखने का पुलिस पर आरोप लगाया। मूल रूप से बिलसंडा थाना क्षेत्र की रहने दो सगी बहनों (17 वर्ष और 20 वर्ष) की हत्या कर दी गई थी। दोनों पांच महीने से परिवार के साथ बीसलपुर क्षेत्र के एक गांव में ईंट भट्टे पर काम करती थीं। परिवार वालों के अनुसार दोनों सोमवार शाम सात बजे खेत पर दिनचर्या के जरूरी काम से गई थीं। बाद में छोटी बेटी का शव भट्ठे से सौ मीटर दूर पीलीभीत-बीसलपुर मार्ग पर सड़क किनारे, जबकि बड़ी बेटी का शव मंगलवार सुबह भट्ठे से दो सौ मीटर दूर खेत में यूकेलिप्टिस के पेड़ पर रस्सी के फंदे से लटका मिला था। भट्ठा मालिक से सूचना पर पहुंची पुलिस छानबीन में जुटी थी।
परिजन दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जता रहे थे, जबकि पुलिस शुरूआती छानबीन के बाद ऑनर किलिंग का शक जता रही थी। पुलिस मां, भाई और भाभी को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की। इधर, पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव देर रात गांव पहुंच गए। अंतिम संस्कार की वजह से हिरासत में लिए गए परिवार के लोगों को पुलिस ने छोड़ दिया। बुधवार सुबह अचानक परिवार ने अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। दुष्कर्म के बाद हत्या करने का आरोप लगाते हुए भट्ठे के मुनीम, भट्ठा मालिक और ठेकेदार को जेल भेजने की मांग रख दी। पुलिस पहले ही गांव में तैनात थी। अंतिम संस्कार से मना करने की जानकारी मिलते ही एसडीएम बीसलपुर राकेश गुप्ता, सीओ पूरनपुर लल्लन सिंह पहुंच गए। परिवार के लोगों से बातचीत की। सुबह आठ बजे से अफसर परिवार को मनाने में लगे रहे। कई बार तीखी बहस भी हुई। बाद में अधिकारियों के 72 घंटे में खुलासे का आश्वासन देने पर परिजन मान गए । फिर शवों को गांव में ही खाली जगह पर दफन किया गया। इस बीच गांव में कुछ पुलिसकर्मी वर्दी कुछ को सिविल ड्रेस में भी निगरानी के लिए लगाया गया है। अधिकारियों का दावा है कि घटना परिवार के लोगों ने ही की है। इसके काफी साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं। कुछ बिंदुओं पर काम चल रहा है, जल्द खुलासा होगा।
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मृतका की भाभी ने पुलिस पर पीटने के आरोप लगाए, विधायक ने कराया मेडिकल
पुलिस ने प्रारंभिक जांच में परिवार पर शक उजागर होने पर मां, भाई और भाभी को हिरासत में लिया था। उन्हें देर रात छोड़ दिया गया। इसके बाद मृतका की भाभी ने पुलिस पर हिरासत में लेने के बाद निर्वस्त्र कर बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया। सीओ को बीसलपुर पुलिस के खिलाफ तहरीर भी दी। मामला संज्ञान में आने पर भाजपा के बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा रात में ही गांव पहुंच गए। परिवार से मिलकर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। विधायक के दखल के बाद पुलिस ने भाभी का मेडिकल परीक्षण भी सीएचसी भेजकर कराया। हालांकि मेडिकल में कोई गंभीर चोट स्पष्ट नहीं हुई। जांघ और गाल में हल्की सूजन बताते हुए एक्सरे को लिख दिया गया।
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नेताओं की लगी रही आवाजाही
दो सगी बहनों की हत्या के बाद राजनेताओं का परिवार के पास पहुंचना दूसरे दिन भी जारी रहा। सुबह आठ बजे पहले भाजपा विधायक रामसरन वर्मा गांव पहुंचे और परिवार को कार्रवाई का भरोसा दिलाकर मनाते रहे। मगर परिवार नहीं माना। इस पर विधायक दस बजे चले गए। आधे घंटे बाद ही सपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद, जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा, महासचिव यूसुफ कादरी, नीरज गंगवार समेत कई नेता परिवार से मिले। बताया कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुलाकात को भेजा है। न्याय दिलाने के लिए साथ खड़े होने का आश्वासन दिया। फिर 11 बजे वह भी लौट गए।
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छावनी में तब्दील दिखा गांव
घटना के बाद मंगलवार को जहां मृतका के गांव में सन्नाटा पसरा था, वहीं दूसरे दिन बुधवार को गांव छावनी में तब्दील दिखा। एसडीएम सीओ के अलावा बिलसंडा, बीसलपुर, दियोरियाकलां, बरखेड़ा, गजरौला, एसओजी समेत कई थानों की पुलिस मौजूद रही। पुलिस लाइन का भी फोर्स तैनात रहा। परिवार की हरकत पर अभी भी पुलिसकर्मी निगाह रखे हुए हैं। गांव की गलियों के अलावा बाहर के रास्तों पर भी पुलिस रही। हालांकि किसी तरह की आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं लगा।
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एक ही गड्ढे में दफनाए गए दोनों के शव
घटना को अंजाम देने के आरोप में भले ही परिवार भी शक के दायरे में हो, मगर अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीण भी गमगीन दिखे। दोनों बहनें हंसमुख थीं। परिवार के साथ ही गांव के लोगों से भी उनका मेलजोल बेहतर था। ऐसे में सभी मौत को लेकर दुख व्यक्त करते दिखाई दिए। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे खुलासे के आश्वासन पर परिवार राजी हुआ था। फिर दोनों के शवों को अलग-अलग अर्थी पर रखकर गांव के बाहर तान किनारे ग्राम समाज की जमीन पर ले गए। जेसीबी मंगाकर एक बड़ा गड्ढा खुदवाया गया। फिर एक ही गड्ढे में दोनों के शव दफन कर दिए गए।
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पुलिस दूर ठहर गई तो परिवार ने जताई नाराजगी
अंतिम संस्कार के दौरान गड्ढा खोदने के बाद परिजन शवों को दफन करने जा रहे थे। यह देख पुलिस कुछ दूरी पर खड़ी हो गई। इस पर भी परिवार के सदस्यों ने आपत्ति जता दी। पुलिस को नजदीक रहने को कहा। एसडीएम सीओ ने उन्हें बात कर समझाया और अंतिम संस्कार कराया।
फैक्ट फाइल
- 07.45 बजे परिवार ने कर दिया अंतिम संस्कार से इनकार।
- 08.00 बजे भाजपा विधायक पहुंचे परिवार के पास।
- 10.00 बजे वापस चले गए विधायक।
- 10.30 बजे पहुंचा सपा का प्रतिनिधिमंडल।
- 12.30 बजे परिवार ने आश्वासन पर भरी अंतिम संस्कार की हामी।
- 01. 10 बजे घर से उठीं दोनों की अर्थियों।
- 01.24 बजे पहुंचे ताल के किनारे।
- 01.50 बजे गड्ढा खोदने को पहुंची जेसीबी।
- 02.12 बजे जेसीबी से खोदा गया गड्ढा।
- 02. 45 बजे कर दिया अंतिम संस्कार।
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पुलिस ने मंगलवार देर रात भाई की ओर से अज्ञात के खिलाफ हत्या कर साक्ष्य मिटाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली थी। मगर, बुधवार को भाई ने दूसरी तहरीर अधिकारियों को दी। पूर्व में मनमाफिक तहरीर लिखने का पुलिस पर आरोप लगाया। मूल रूप से बिलसंडा थाना क्षेत्र की रहने दो सगी बहनों (17 वर्ष और 20 वर्ष) की हत्या कर दी गई थी। दोनों पांच महीने से परिवार के साथ बीसलपुर क्षेत्र के एक गांव में ईंट भट्टे पर काम करती थीं। परिवार वालों के अनुसार दोनों सोमवार शाम सात बजे खेत पर दिनचर्या के जरूरी काम से गई थीं। बाद में छोटी बेटी का शव भट्ठे से सौ मीटर दूर पीलीभीत-बीसलपुर मार्ग पर सड़क किनारे, जबकि बड़ी बेटी का शव मंगलवार सुबह भट्ठे से दो सौ मीटर दूर खेत में यूकेलिप्टिस के पेड़ पर रस्सी के फंदे से लटका मिला था। भट्ठा मालिक से सूचना पर पहुंची पुलिस छानबीन में जुटी थी।
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परिजन दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जता रहे थे, जबकि पुलिस शुरूआती छानबीन के बाद ऑनर किलिंग का शक जता रही थी। पुलिस मां, भाई और भाभी को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की। इधर, पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव देर रात गांव पहुंच गए। अंतिम संस्कार की वजह से हिरासत में लिए गए परिवार के लोगों को पुलिस ने छोड़ दिया। बुधवार सुबह अचानक परिवार ने अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। दुष्कर्म के बाद हत्या करने का आरोप लगाते हुए भट्ठे के मुनीम, भट्ठा मालिक और ठेकेदार को जेल भेजने की मांग रख दी। पुलिस पहले ही गांव में तैनात थी। अंतिम संस्कार से मना करने की जानकारी मिलते ही एसडीएम बीसलपुर राकेश गुप्ता, सीओ पूरनपुर लल्लन सिंह पहुंच गए। परिवार के लोगों से बातचीत की। सुबह आठ बजे से अफसर परिवार को मनाने में लगे रहे। कई बार तीखी बहस भी हुई। बाद में अधिकारियों के 72 घंटे में खुलासे का आश्वासन देने पर परिजन मान गए । फिर शवों को गांव में ही खाली जगह पर दफन किया गया। इस बीच गांव में कुछ पुलिसकर्मी वर्दी कुछ को सिविल ड्रेस में भी निगरानी के लिए लगाया गया है। अधिकारियों का दावा है कि घटना परिवार के लोगों ने ही की है। इसके काफी साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं। कुछ बिंदुओं पर काम चल रहा है, जल्द खुलासा होगा।
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मृतका की भाभी ने पुलिस पर पीटने के आरोप लगाए, विधायक ने कराया मेडिकल
पुलिस ने प्रारंभिक जांच में परिवार पर शक उजागर होने पर मां, भाई और भाभी को हिरासत में लिया था। उन्हें देर रात छोड़ दिया गया। इसके बाद मृतका की भाभी ने पुलिस पर हिरासत में लेने के बाद निर्वस्त्र कर बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया। सीओ को बीसलपुर पुलिस के खिलाफ तहरीर भी दी। मामला संज्ञान में आने पर भाजपा के बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा रात में ही गांव पहुंच गए। परिवार से मिलकर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। विधायक के दखल के बाद पुलिस ने भाभी का मेडिकल परीक्षण भी सीएचसी भेजकर कराया। हालांकि मेडिकल में कोई गंभीर चोट स्पष्ट नहीं हुई। जांघ और गाल में हल्की सूजन बताते हुए एक्सरे को लिख दिया गया।
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नेताओं की लगी रही आवाजाही
दो सगी बहनों की हत्या के बाद राजनेताओं का परिवार के पास पहुंचना दूसरे दिन भी जारी रहा। सुबह आठ बजे पहले भाजपा विधायक रामसरन वर्मा गांव पहुंचे और परिवार को कार्रवाई का भरोसा दिलाकर मनाते रहे। मगर परिवार नहीं माना। इस पर विधायक दस बजे चले गए। आधे घंटे बाद ही सपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद, जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा, महासचिव यूसुफ कादरी, नीरज गंगवार समेत कई नेता परिवार से मिले। बताया कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुलाकात को भेजा है। न्याय दिलाने के लिए साथ खड़े होने का आश्वासन दिया। फिर 11 बजे वह भी लौट गए।
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छावनी में तब्दील दिखा गांव
घटना के बाद मंगलवार को जहां मृतका के गांव में सन्नाटा पसरा था, वहीं दूसरे दिन बुधवार को गांव छावनी में तब्दील दिखा। एसडीएम सीओ के अलावा बिलसंडा, बीसलपुर, दियोरियाकलां, बरखेड़ा, गजरौला, एसओजी समेत कई थानों की पुलिस मौजूद रही। पुलिस लाइन का भी फोर्स तैनात रहा। परिवार की हरकत पर अभी भी पुलिसकर्मी निगाह रखे हुए हैं। गांव की गलियों के अलावा बाहर के रास्तों पर भी पुलिस रही। हालांकि किसी तरह की आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं लगा।
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एक ही गड्ढे में दफनाए गए दोनों के शव
घटना को अंजाम देने के आरोप में भले ही परिवार भी शक के दायरे में हो, मगर अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीण भी गमगीन दिखे। दोनों बहनें हंसमुख थीं। परिवार के साथ ही गांव के लोगों से भी उनका मेलजोल बेहतर था। ऐसे में सभी मौत को लेकर दुख व्यक्त करते दिखाई दिए। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे खुलासे के आश्वासन पर परिवार राजी हुआ था। फिर दोनों के शवों को अलग-अलग अर्थी पर रखकर गांव के बाहर तान किनारे ग्राम समाज की जमीन पर ले गए। जेसीबी मंगाकर एक बड़ा गड्ढा खुदवाया गया। फिर एक ही गड्ढे में दोनों के शव दफन कर दिए गए।
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पुलिस दूर ठहर गई तो परिवार ने जताई नाराजगी
अंतिम संस्कार के दौरान गड्ढा खोदने के बाद परिजन शवों को दफन करने जा रहे थे। यह देख पुलिस कुछ दूरी पर खड़ी हो गई। इस पर भी परिवार के सदस्यों ने आपत्ति जता दी। पुलिस को नजदीक रहने को कहा। एसडीएम सीओ ने उन्हें बात कर समझाया और अंतिम संस्कार कराया।
फैक्ट फाइल
- 07.45 बजे परिवार ने कर दिया अंतिम संस्कार से इनकार।
- 08.00 बजे भाजपा विधायक पहुंचे परिवार के पास।
- 10.00 बजे वापस चले गए विधायक।
- 10.30 बजे पहुंचा सपा का प्रतिनिधिमंडल।
- 12.30 बजे परिवार ने आश्वासन पर भरी अंतिम संस्कार की हामी।
- 01. 10 बजे घर से उठीं दोनों की अर्थियों।
- 01.24 बजे पहुंचे ताल के किनारे।
- 01.50 बजे गड्ढा खोदने को पहुंची जेसीबी।
- 02.12 बजे जेसीबी से खोदा गया गड्ढा।
- 02. 45 बजे कर दिया अंतिम संस्कार।